पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सी वी आनंद बोस अपने को इस राज्य का दत्तक पुत्र मानने लगे हैं। उनका कहना है कि उन्हें इस राज्य के लोगों से गहरा लगाव हैं।
दत्तक पुत्र के रूप में महसूस करते हैं राज्य से लगाव
पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सी वी आनंद बोस अपने को इस राज्य का दत्तक पुत्र मानने लगे हैं। उनका कहना है कि उन्हें इस राज्य के लोगों से गहरा लगाव है और यहां की भाषा, संस्कृति और परंपरा खूब आकर्षित कर रही है।
केरल से हैं, लेकिन बंगाल के लिए भावुक
राज्यपाल बोस केरल के कोट्टम के रहने वाले हैं। वे वहां के ही रहेंगे, लेकिन पश्चिम बंगाल के वोटर बनना चाहते हैं। उनका कहना है कि पूर्व राज्यपाल जगदीव धनखड़ भी इसी तरह वोटर बने थे, और वे भी चुनाव आयोग से आवेदन करेंगे।
चुनाव आयोग की अनुमति
राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी का कहना है कि राज्यपाल को यहां वोटर बनने में कोई बाधा नहीं है। वे इच्छानुसार यहां के वोटर बन सकते हैं। सी वी आनंद बोस 2022 से पश्चिम बंगाल के राज्यपाल हैं।
पहले मना कर चुके थे आवेदन
चुनाव आयोग ने जब एसआइआर प्रक्रिया शुरू की थी, तो उनसे वोटर बनने के लिए कहा गया था। उस समय उन्होंने मना कर दिया था। लेकिन अब वे पश्चिम बंगाल के वोटर बनने के इच्छुक हैं।
राज्य के आम लोगों से मुलाकात
पिछले दिनों राज्यपाल ने राज्य के कई इलाकों में आम लोगों की हालात जानने के लिए दौरा किया और उनसे बातचीत की। मुलाकात करने वाले लोग उनकी बातचीत से प्रभावित हुए।
ममता बनर्जी ने अभी तक गणना फार्म नहीं भरा
इधर, नदिया जिले के कृष्णनगर समेत राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में सभाओं में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि उन्होंने अभी तक अपना गणना फार्म नहीं भरा है। उन्होंने सवाल किया कि क्या उन्हें दंगाइयों की पार्टी को अपनी नागरिकता साबित करने की जरूरत है।
मुख्य चुनाव अधिकारी का कहना
मुख्य चुनाव अधिकारी के अनुसार, ममता बनर्जी इस राज्य की मुख्यमंत्री हैं और नियम के अनुसार वे अपने आप वोटर हैं। कालीघाट के बीएलओ उनके निवास पर गणना फार्म देने गए थे, और फार्म उन्हें प्राप्त भी हुआ।
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