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खाड़ी युद्ध से महंगाई और व्यापार खतरा

खाड़ी युद्ध से देश पर महंगाई का खतरा, व्यापार जोखिम बढ़ा

मिडिल ईस्ट में अमेरिका - ईरान के बीच छिड़े तनाव और Strait of Hormuz की नाकेबंदी की वजह से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति चेन बाधित होने से देश महंगाई की चपेट में आ सकता है।

खाड़ी युद्ध से देश पर महंगाई का खतरा व्यापार जोखिम बढ़ा

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नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में अमेरिका - ईरान के बीच छिड़े तनाव और Strait of Hormuz की नाकेबंदी की वजह से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति चेन बाधित होने से देश महंगाई की चपेट में आ सकता है। साथ ही इस कारण देश का कारोबार भी प्रभावित हो सकता है। इस संकट ने भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा, महंगाई और व्यापार के मोर्चे पर गंभीर जोखिम पैदा कर दिए हैं। Ministry of Finance India की अप्रैल की मासिक आर्थिक समीक्षा में इन चिंताओं को रेखांकित किया गया है।

सप्लाई चेन पर बढ़ा दबाव

वित्त मंत्रालय ने कहा है कि FY27 में 7% से अधिक ग्रोथ की उम्मीद बरकरार है, हालांकि जोखिम बढ़ गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक ऊर्जा और उर्वरक आपूर्ति को लेकर लंबी अनिश्चितता वृहद आर्थिक स्थिरता की परीक्षा ले सकती है। पश्चिम एशिया में युद्ध लंबा खिंचने पर तेल-गैस और उर्वरक की सप्लाई प्रभावित हो सकती है, जिससे ‘कॉस्ट-पुश’ महंगाई का खतरा है।

महंगाई और मांग दोनों पर असर

मंथली इकोनॉमिक रिव्यू के अनुसार सप्लाई चेन बाधित होने से महंगाई बढ़ सकती है और व्यापारिक प्रवाह पर असर पड़ सकता है। बढ़ती लागत का बोझ कंपनियां उपभोक्ताओं पर डाल सकती हैं, जिससे महंगाई और बढ़ेगी। साथ ही आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार धीमी होने से मांग में कमी भी चिंता का विषय बनी हुई है।

मानसून को लेकर भी चिंता

रिपोर्ट में India Meteorological Department (IMD) के अनुमान का हवाला देते हुए कहा गया है कि इस बार दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्य से कम रह सकता है। यदि बारिश कम होती है और खरीफ फसल कमजोर रहती है, तो खाद्य महंगाई पर और दबाव बढ़ सकता है।

ग्रोथ पर पड़ सकता है दबाव

इन परिस्थितियों में आर्थिक विकास दर पर दबाव रहने की आशंका जताई गई है, जबकि महंगाई और राजकोषीय घाटा बढ़ने का जोखिम बना हुआ है। मंत्रालय ने कहा कि तेल और गैस की आपूर्ति सामान्य होने में कई महीने लग सकते हैं।

मजबूत नींव से राहत की उम्मीद

चुनौतियों के बावजूद, मंत्रालय का मानना है कि भारत की अर्थव्यवस्था की नींव मजबूत है। मजबूत घरेलू मांग, नीतिगत समर्थन और सार्वजनिक निवेश से स्थिति को संभालने में मदद मिल सकती है।

विकास दर का अनुमान बरकरार

रिपोर्ट में आगामी वित्त वर्ष के लिए 7% से 7.4% के बीच विकास दर का अनुमान लगाया गया है। हालिया आंकड़ों के अनुसार भारतीय अर्थव्यवस्था ने 7.6% की दर से वृद्धि दर्ज की है, जो पिछले वर्षों में मजबूत प्रदर्शन को दर्शाता है।

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