ट्रंप ने H-1B वीज़ा पर 1 लाख डॉलर फीस बरकरार रखी, निगरानी सख्त की। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स पर असर की चेतावनी दी। पढ़ें पूरी खबर।
नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने H-1B वीज़ा पर लगी 1 लाख डॉलर की फीस को आगे बढ़ाते हुए इस प्रोग्राम की निगरानी और सख्त कर दी है। इस फैसले पर कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि इसका सीधा असर भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स, छात्रों और देश के टैलेंट पूल पर पड़ेगा। खेड़ा ने इस मौके पर मोदी सरकार की ट्रंप-नीति पर भी सवाल खड़े किए हैं।
अमेरिका का नया आदेश क्या कहता है
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को एक एक्जीक्यूटिव ऑर्डर और एक प्रोक्लेमेशन पर हस्ताक्षर किए। व्हाइट हाउस के फैक्ट शीट के अनुसार इसका मकसद H-1B प्रोग्राम की "इंटीग्रिटी" मजबूत करना और एजेंसियों के बीच तालमेल बेहतर बनाना है।
इस एक्जीक्यूटिव ऑर्डर के तहत अमेरिकी विदेश मंत्री, लेबर सेक्रेटरी और होमलैंड सिक्योरिटी सेक्रेटरी को निर्देश दिया गया है कि वे H-1B वीज़ा एप्लिकेशन की समीक्षा करते समय उन कंपनियों की हाल की या प्रस्तावित छंटनी को भी ध्यान में रखें, जिनमें समान भूमिका वाले अमेरिकी कर्मचारियों की नौकरी गई हो। इसके अलावा इन तीन विभागों को कॉमर्स सेक्रेटरी, एजुकेशन सेक्रेटरी और स्मॉल बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन के प्रशासक से सलाह लेकर वेतन, औद्योगिक हालात और रोजगार विशेषज्ञता जैसे आंकड़े जुटाने के लिए भी कहा गया है।
1 लाख डॉलर फीस का दोबारा नवीनीकरण
प्रोक्लेमेशन के तहत कुछ खास H-1B वीज़ा याचिकाओं पर 1 लाख डॉलर की फीस की शर्त को फिर से लागू किया गया है। यह फीस पहली बार 19 सितंबर 2025 को लगाई गई थी। व्हाइट हाउस का कहना है कि यह कदम उन प्रैक्टिस को रोकने के लिए है जो अमेरिकी कर्मचारियों की जगह छीनती हैं और राष्ट्रीय सुरक्षा को कमजोर करती हैं।
व्हाइट हाउस फैक्ट शीट के मुताबिक, "2025 के प्रोक्लेमेशन के लागू होने के बाद सबसे बड़ी आईटी आउटसोर्सिंग फर्मों की तरफ से दाखिल H-1B रजिस्ट्रेशन में 92 प्रतिशत की कमी आई है।" इसके साथ ही कॉन्सुलर प्रोसेसिंग रिक्वेस्ट में करीब 97 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और प्रशासन का दावा है कि सस्ते विदेशी लेबर से हटकर ज्यादा कुशल और ज्यादा वेतन वाले वर्कर्स को तरजीह मिली है।
व्हाइट हाउस का तर्क: अमेरिकी वर्कर्स को नुकसान
व्हाइट हाउस ने अपने फैक्ट शीट में कहा, "H-1B वीज़ा प्रोग्राम के दुरुपयोग से कुशल अमेरिकी कर्मचारियों की तनख्वाह घटती है, क्योंकि सस्ता विदेशी लेबर उपलब्ध होने से घरेलू वेतन पर दबाव बनता है।" प्रशासन ने आगे आरोप लगाया, "कई कंपनियों ने बड़ी संख्या में उच्च योग्यता वाले अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी कर तुरंत बाद बड़ी संख्या में H-1B वर्कर्स को नौकरी पर रखा, जो अक्सर कम कुशल और कम वेतन वाले होते हैं।"
प्रशासन ने यह भी इशारा किया कि कुछ H-1B स्पॉन्सर कंपनियों के आउटसोर्सिंग मॉडल के कारण कई नौकरियां आखिरकार अमेरिका से बाहर चली जाती हैं। साथ ही यह भी कहा गया है कि "इंटरएजेंसी कोऑर्डिनेशन बेहतर करने के लिए अभी और काम किए जाने की जरूरत है।"
जुलाई 2025 के आर्थिक उपायों का हवाला
फैक्ट शीट में जुलाई 2025 में लागू किए गए टैक्स और वर्कफोर्स उपायों का भी हवाला दिया गया है। इनमें ओवरटाइम पर टैक्स न लगाना, टिप्स पर टैक्स न लगाना और स्किल्ड ट्रेड्स में आने वाले अमेरिकियों के लिए वर्कफोर्स पेल ग्रांट्स शामिल हैं। दावा किया गया है कि इससे लाखों अमेरिकी नौकरियां और आधे ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा की मजदूरी सुरक्षित हुई। फैक्ट शीट के मुताबिक 2025 में रियल वेज में 822 डॉलर की बढ़ोतरी हुई और रियल हाउसहोल्ड इनकम अपने ऐतिहासिक उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। प्रशासन ने यह भी बताया कि वह H-1B वीज़ा धोखाधड़ी की जांच जारी रखे हुए है।
पवन खेड़ा का पलटवार: भारतीय टैलेंट पर सीधी चोट
इस फैसले पर कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने X पर पोस्ट करते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने लिखा, "प्रभाव: F-1 से H-1B में जाना भारतीय छात्रों के लिए अमेरिकी वर्कफोर्स में एंट्री और कठिन होगी।
- कम नौकरियां: छोटी कंपनियां स्पॉन्सरशिप देने से बच सकती हैं।
- टैलेंट का पलायन: ज्यादा प्रोफेशनल्स ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया की तरफ रुख कर सकते हैं।
- रेमिटेंस का जोखिम: कम माइग्रेशन से भारत को मिलने वाला रेमिटेंस समय के साथ घट सकता है।"
खेड़ा ने इस मौके पर केंद्र सरकार की ट्रंप-नीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा, "मोदी ने ट्रंप को खुश करने के लिए हर हद पार कर दी। ट्रंप को खुशामद मिल गई। भारत के हिस्से में अपमान और झटका आया।" व्हाइट हाउस ने साफ किया है कि H-1B प्रोग्राम पर निगरानी और कड़ी होगी और एजेंसियों के बीच तालमेल बढ़ाने पर काम जारी रहेगा। भारतीय आईटी सेक्टर और अमेरिका में पढ़ रहे छात्रों के लिए यह देखना अहम होगा कि नई शर्तों का असर वीज़ा रजिस्ट्रेशन और स्पॉन्सरशिप पैटर्न पर किस हद तक पड़ता है।
(भाषांतर: Ravi Pandey । इनपुट: ANI)
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