दिल्ली में H1N1 मामलों में बढ़ोतरी के बीच LNJP अस्पताल ने मरीजों के इलाज के लिए समर्पित आइसोलेशन वार्ड बनाया और चिकित्सा सुविधाएं मजबूत कीं।
नई दिल्ली [भारत]: राष्ट्रीय राजधानी में H1N1 इन्फ्लूएंजा के मामलों में वृद्धि के बीच लोक नायक जय प्रकाश नारायण (LNJP) अस्पताल ने स्थिति से निपटने के लिए एक समर्पित आइसोलेशन वार्ड स्थापित किया है और चिकित्सा सुविधाओं को मजबूत किया है। अस्पताल ने मरीजों को तत्काल उपचार उपलब्ध कराने के लिए एक विशेष इकाई स्थापित की है। साथ ही, मामलों की संख्या बढ़ने की स्थिति में अस्पताल की क्षमता को तेजी से बढ़ाने के लिए भी प्रावधान किए गए हैं। बात करते हुए LNJP अस्पताल के दुर्घटना एवं आपातकालीन विभाग के प्रमुख (HOD) डॉ. सत्यजीत कुमार ने अस्पताल की तैयारियों की जानकारी दी। उन्होंने कहा, "हमने स्वाइन फ्लू के लिए सभी तैयारियां कर ली हैं। हमने यहां सात बिस्तरों वाला एक वार्ड बनाया है। इनमें से पांच बिस्तर उच्च निर्भरता वाले हैं और दो वेंटिलेटर पर हैं।"
मरीज बढ़े तो 70 बेड का बैकअप वार्ड
डॉ. कुमार ने बताया कि अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ने की स्थिति से निपटने के लिए आकस्मिक योजना भी तैयार रखी गई है। उन्होंने कहा, "यदि मरीजों की संख्या बढ़ती है, तो हमने सातवीं मंजिल पर 70 बिस्तरों वाला एक वार्ड बनाया है, जिसमें 10 आईसीयू बेड और 60 एचडीयू (हाई डिपेंडेंसी यूनिट) बेड हैं।"
H1N1 को लेकर ICMR ने भी जताई चिंता
इससे पहले मंगलवार को भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) के महानिदेशक राजीव बहल ने कहा कि इन्फ्लूएंजा ए का H1N1 स्ट्रेन भारत में सबसे अधिक फैलने वाला श्वसन रोगजनक बनकर उभरा है। उन्होंने बताया कि जांच किए गए इन्फ्लूएंजा ए के करीब 98 प्रतिशत मामले H1N1 स्ट्रेन के हैं।
देशभर में निगरानी नेटवर्क मजबूत
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए बहल ने बताया कि भारत ने वायरल प्रकोपों पर नजर रखने के लिए देशभर में बहुस्तरीय और वास्तविक समय रोग निगरानी नेटवर्क स्थापित किया है। यह निगरानी प्रणाली एकीकृत स्वास्थ्य सूचना मंच (IHIP) और राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC) के माध्यम से राज्य स्तर के आंकड़ों को जोड़ती है। इसके साथ ही ICMR द्वारा अस्पताल आधारित सैंपलिंग की व्यवस्था भी की गई है। इस व्यवस्था के जरिए H1N1 जैसे बढ़ते श्वसन संक्रमणों की पहचान कर तत्काल प्रकोप प्रतिक्रिया शुरू करने में मदद मिलती है।
73 अस्पतालों और प्रयोगशालाओं में सेंटिनल निगरानी
राजीव बहल ने कहा कि कोविड-19 के बाद भारत ने वास्तविक समय में देश में फैल रहे वायरस की पहचान करने और निगरानी करने की क्षमता को काफी मजबूत किया है। उन्होंने बताया कि IHIP और NCDC निगरानी के माध्यम से सभी राज्यों से संक्रमण और अन्य स्वास्थ्य संबंधी जानकारी प्राप्त होती है। इसके अलावा, श्वसन वायरस जैसे सिंड्रोम की निगरानी के लिए ICMR ने पूरे भारत में 73 प्रयोगशालाओं या अस्पतालों में सेंटिनल निगरानी स्थापित की है। बहल के अनुसार, यह व्यवस्था NCDC की निगरानी के अतिरिक्त एक और स्तर के रूप में काम करती है।
(एएनआई)
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