भोपाल। आईआईटी इंदौर ने मानव शरीर जैसी एक प्रतिकृति विकसित की है। यह सांस भी ले सकती है और पलक भी झपका सकती है। यही नहीं, यह अन्य कई मानवीय क्रियाओं की भी नकल कर सकती है।
बीमारियों की पहचान में होगी मदद
सबसे बड़ी बात यह है कि यह प्रतिकृति मानव शरीर में बीमारियों के पैटर्न की पहचान करने में भी मदद करती है। इस एआई रोबोट को मानव शरीर के डिजिटल जुड़वां (डिजिटल ट्विन) के रूप में डिजाइन किया गया है। 15 जनवरी को भोपाल में आयोजित मध्य प्रदेश क्षेत्रीय एआई इम्पैक्ट कॉन्फ्रेंस 2026 में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से संचालित मानव शरीर की इस प्रतिकृति का प्रदर्शन किया गया। इस प्रतिकृति को बीमारियों का पता लगाने में सक्षम बनाया गया है, जिसने शोधकर्ताओं, मेडिकल और टेक्निकल एक्सपर्ट्स का खासा ध्यान आकर्षित किया।
अंगों पर बीमारियों के प्रभाव की पहचान
यह प्रतिकृति मानव शरीर के विभिन्न अंगों पर बीमारियों के प्रभाव का भी पता कर सकती है। संवाद समिति एएनआई से बात करते हुए आईआईटी इंदौर के दृष्टि सीपीएस के वैभव जैन ने बताया कि दृष्टि सीपीएस, आईआईटी इंदौर का एक प्रौद्योगिकी नवाचार केंद्र है। उन्होंने बताया कि इस केंद्र को भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा अंतःविषयक साइबर-भौतिक प्रणाली पर राष्ट्रीय मिशन (एनएम-आईसीपीएस) के तहत समर्थन प्राप्त है।
डॉक्टरों को निदान में मिलेगी मदद
वैभव जैन ने कहा कि दृष्टि सीपीएस में शिक्षकों और छात्रों के लिए प्रौद्योगिकी विकास कार्यक्रमों समेत कई तरह का सहयोग दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि अब तक विभिन्न क्षेत्रों में लगभग 89 स्टार्टअप को वित्त पोषित किया जा चुका है जैन ने कहा कि हाल ही में ‘चरक डीटी (डिजिटल ट्विन) प्लेटफॉर्म’ नामक एक नई पहल शुरू की गई है, जिसके माध्यम से स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में तकनीक के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस पहल के तहत मानव शरीर का एक डिजिटल ट्विन तैयार किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य शरीर में होने वाली बीमारियों का पता लगाकर डॉक्टरों को सटीक निदान में मदद करना है।
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