सुप्रीम कोर्ट ने आईआईटी, एनआईटी, आईआईएम और एम्स जैसे देश के शीर्ष शैक्षणिक संस्थानों में छात्रों की आत्महत्याओं के बढ़ते मामलों पर नाराजगी जताते हुए कड़ी चेतावनी दी है।
आईआईटी, आईआईएम जैसे संस्थानों को सुप्रीम कोर्ट चेताया
सरकार से कहा- आत्महत्या के मामले में सर्वे में सहयोग के लिए लिखे
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने आईआईटी, एनआईटी, आईआईएम और एम्स जैसे देश के शीर्ष शैक्षणिक संस्थानों में छात्रों की आत्महत्याओं के बढ़ते मामलों पर नाराजगी जताते हुए कड़ी चेतावनी दी है। उसका कहना है कि इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित पैनल के सर्वे में ये संस्थान सहयोग नहीं कर रहे हैं।
वर्ष 2018 से अब तक इन प्रमुख संस्थानों में करीब 98 छात्रों ने आत्महत्या की है। इनमें 39 आईआईटी, 25 एनआईटी, 25 सेंट्रल यूनिवर्सिटी, चार आईआईएम और अन्य शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इन संस्थानों के रवैये पर गहरी नाराजगी जताते हुए प्रतिकूल आदेश जारी करने की चेतावनी दी है।
जस्टिस जेबी पारदीवाला और आर महादेवन की बेंच ने सोमवार को सुनवाई के दौरान कहा कि यह काम छात्रों के हित में है और सभी संस्थानों को भरपूर सहयोग करना चाहिए। इस मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता अपर्णा भट कोर्ट की एमिकस क्यूरी के रूप में हैं। उन्होंने बेंच को बताया कि 17 आईआईटी, 15 आईआईएम, 16 एआईआईएमएस और 24 एनआईटी ने चार बार याद दिलाने के बावजूद सर्वे में कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। कुल 58,000 संस्थानों में से केवल 3,500 ने ही अब तक जवाब दिया है। बेंच ने कहा कि यह पूरी कवायद छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए है। नेशनल टास्क फोर्स को अंतरिम या अंतिम रिपोर्ट तैयार करने के लिए संस्थाओं से सहयोग जरूरी है।
केंद्र सरकार को निर्देश
कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह एक बार फिर सभी संस्थानों को इस मुद्दे को गंभीरता से लेने और सर्वे में भाग लेने के लिए पत्र लिखे। बेंच ने कहा कि हम केंद्र सरकार से अनुरोध करते हैं कि यह मुद्दा बहुत गंभीरता से लें और सभी संस्थानों पर सहयोग का दबाव डालें। सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने छात्रों के हित में स्वेच्छा से आगे आकर सभी आईआईटी से बात करने का प्रस्ताव दिया। वह कोर्ट रूम में अपनी एक केस की सुनवाई के सिलसिले में मौजूद थे। कोर्ट ने उनके इस कदम की सराहना की। बेंच ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि हम सभी संस्थानों को सर्वे में शामिल होने के लिए अंतिम अवसर दे रहे हैं। यदि सहयोग नहीं किया गया तो हमें ऐसे आदेश पारित करने पड़ेंगे जो संस्थानों के लिए अप्रिय होंगे और उनकी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचा सकते हैं। केंद्र सरकार इस पहलू को स्पष्ट करते हुए सर्कुलर जारी करे।
यह आदेश छात्रों की मानसिक स्वास्थ्य और आत्महत्या रोकथाम पर केंद्रित नेशनल टास्क फोर्स के काम को तेज करने के उद्देश्य से आया है। इसकी अध्यक्षता रिटायर्ड जस्टिस रविंद्र भट कर रहे हैं। यह टास्क फोर्स मनोचिकित्सा, क्लिनिकल साइकोलॉजी और अन्य क्षेत्रों के विशेषज्ञों से मिलकर बनी है। इसका कार्य परिसरों में आत्महत्याओं के कारणों की जांच करना और उसे रोकने के उपाय सुझाना है।
इनमें रैगिंग, जाति-आधारित भेदभाव, लिंग-आधारित भेदभाव, यौन उत्पीड़न, शैक्षणिक दबाव, आर्थिक बोझ, मानसिक स्वास्थ्य, जाति, जनजातीय पहचान, विकलांगता जैसे आधार शामिल हैं। हाल के वर्षों में आईआईटी, एनआईटी और आईआईएम जैसे संस्थानों में आत्महत्याओं की संख्या चिंताजनक रूप से बढ़ी है। 2023 में ही आईआईटी दिल्ली में पांच छात्रों की आत्महत्या दर्ज की गई। एक सर्वे के अनुसार, 8,542 छात्रों में से 12 प्रतिशत ने आत्महत्या के विचार व्यक्त किए। इसके पीछे शैक्षणिक तनाव को मुख्य कारण बताया गया।