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IMF ने भारतीय रुपये को अस्थिर घोषित किया

IMF ने भारतीय रुपये को ‘स्थिर’ से ‘अस्थिर’ श्रेणी में रखा

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने भारतीय करेंसी रूपये को स्थिर से अस्थिर श्रेणी में रखने का एलान किया है।

imf ने भारतीय रुपये को ‘स्थिर’ से ‘अस्थिर’ श्रेणी में रखा

IMF Downgrades Indian Rupee |

डॉलर के मुकाबले रुपये की गिरावट बनी चिंता का कारण

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने भारतीय करेंसी रूपये को स्थिर से अस्थिर श्रेणी में रखने का एलान किया है। यह कदम डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये के घटते मूल्य और हाल ही में विदेशी मुद्रा भंडार पर बढ़ते दबाव के कारण उठाया गया है। इससे विदेशी निवेशकों में चिंता बढ़ सकती है।

IMF स्टाफ रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

आईएमएफ ने अपने बोर्ड के समक्ष ‘भारत पर 2025 की स्टाफ रिपोर्ट’ में कहा है कि, ‘रुपये की विनिमय दर अंतरबैंक बाजार में निर्धारित की जाती है जहां भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) अक्सर हस्तक्षेप करता है। आरबीआई अत्यधिक अस्थिरता को रोकने के लिए मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप करता है। भारत की विनिमय दर व्यवस्था फ्लोटिंग है और इसकी वास्तविक विनिमय दर व्यवस्था को क्रॉल जैसी व्यवस्था के रूप में वर्गीकृत किया गया है।’

क्या है ‘क्रॉलिंग पेग’ व्यवस्था?

आईएमएफ के अनुसार 'क्रॉल' जैसी व्यवस्था का तात्पर्य किसी देश और उसके व्यापारिक भागीदारों के बीच मुद्रास्फीति के अंतर को दिखाने के लिए मुद्रा में छोटे, क्रमिक समायोजन से है। स्थिर व्यवस्था में मुद्रा का मूल्य लंबे समय तक एक सीमित दायरे में रखा जाता है। भारत की बाहरी व्यापार और विदेशी मुद्रा नीतियां हाल के वर्षों में IMF स्टाफ रिपोर्ट के अनुरूप बताई गई हैं।

आरबीआई का रुख—"हमारी नीति हमेशा स्थिर रही है"

आईएमएफ बोर्ड में कार्यकारी निदेशक ऊर्जित पटेल की अगुआई में अधिकारियों द्वारा दिए गए बयान में कहा गया कि विनिमय दर को लेकर आरबीआई की नीति कई वर्षों से एक जैसी है और उद्देश्य स्थिरता बनाए रखना है।

अंतरराष्ट्रीय लेनदेन पर पाबंदियों की ओर संकेत

आईएमएफ स्टाफ रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारतीय अधिकारियों ने कुछ लेनदेन पर पाबंदियां लगाई हैं। इसमें एलआरएस योजना के तहत भेजी गई रकम पर टीसीए भी शामिल है, जिसके लिए IMF अनुमोदन जरूरी है।

ब्लूमबर्ग और रॉयटर्स की रिपोर्ट: IMF ने फिर किया भारत को डाउंग्रेड

"ब्लूमबर्ग" और "रॉयटर्स" के अनुसार IMF ने भारतीय रुपये को ‘स्थिर मुद्रा’ से नीचे गिराकर ‘क्रॉलिंग पेग’ श्रेणी में डाल दिया है। ये दूसरा मौका है जब IMF ने भारत की विदेशी मुद्रा विनियमन प्रणाली को इस श्रेणी में रखा है। इससे विदेशी निवेशकों में अनिश्चितता बढ़ सकती है।

साल में रुपये की भारी गिरावट

नवंबर 2024 से अब तक लगभग 7% की गिरावट। रुपया 83.4 रुपये प्रति डॉलर से गिरकर 89.2 रुपये प्रति डॉलर तक पहुंचा।

गिरावट रोकने के लिए RBI का संघर्ष

पिछले साल नवंबर से अब तक आरबीआई ने 50 बिलियन डॉलर की विदेशी मुद्रा बेची, फिर भी गिरावट जारी है। यह बाहरी आर्थिक दबावों की गंभीरता को दर्शाता है।

फिर भी कुछ विशेषज्ञ चिंतित क्यों नहीं?

कारण—भारत का मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार। भारत का फॉरेक्स रिज़र्व 693 बिलियन डॉलर तक पहुंच चुका है।

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