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मारूति सुजुकी पर आयकर विभाग का नोटिस

मारुति सुजुकी को आयकर विभाग का बड़ा नोटिस

नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी यात्री वाहन निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड को आयकर विभाग से 5,786.4 करोड़ रुपये का नोटिस मिला है।

मारुति सुजुकी को आयकर विभाग का बड़ा नोटिस

Income Tax Department |

नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी यात्री वाहन निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड को आयकर विभाग से 5,786.4 करोड़ रुपये का नोटिस मिला है। यह नोटिस वित्त वर्ष 2022-23 (FY22-23) के लिए जारी किया गया है, जिसमें कंपनी से टैक्स की अतिरिक्त राशि जमा करने को कहा गया है। कंपनी ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि इस नोटिस का उसके कारोबार, कामकाज या वित्तीय स्थिति पर सीधा असर नहीं पड़ेगा।

ड्राफ्ट असेसमेंट ऑर्डर जारी

मारूति सुजुकी ने बताया कि आयकर विभाग से उसे 5,786.4 करोड़ रुपये का ड्राफ्ट असेसमेंट ऑर्डर (टैक्स डिमांड नोटिस) मिला है। मारुति सुजुकी ने मंगलवार को शेयर बाजारों को दी सूचना में बताया कि उसे वित्त वर्ष 2022-23 के लिए यह ऑर्डर प्राप्त हुआ है।

टैक्स गणना को लेकर असहमति

मारुति सुजुकी के अनुसार, यह टैक्स डिमांड कुछ विशेष गणनाओं और आकलन से जुड़ा है, जिससे कंपनी सहमत नहीं है। कंपनी का कहना है कि यह नोटिस कुछ खर्चों को अस्वीकार किए जाने से संबंधित है।

कारोबार पर असर नहीं

कंपनी ने स्पष्ट किया है कि इस नोटिस का उसके परिचालन (operational) या वित्तीय स्थिति पर कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा।

विवाद समाधान पैनल में चुनौती

कंपनी ने कहा कि वह इस नोटिस को विवाद समाधान पैनल (Dispute Resolution Panel) के समक्ष चुनौती देगी। साथ ही कंपनी ने यह भी कहा कि वह पहले भी कई टैक्स मामलों में अपील जीत चुकी है। पुराने मामलों में उसे आयकर अपीलीय अधिकरण (ITAT) से फेवरेबल ऑर्डर मिल चुका है।

कंपनी का बयान

कंपनी के वरिष्ठ कार्यकारी अधिकारी (कॉरपोरेट अफेयर्स) राहुल भारती ने कहा, “यह एक रूटीन प्रक्रिया का हिस्सा है। ऐसे ऑर्डर समय-समय पर आते रहते हैं। ज्यादातर इनकी वजह नियमों की व्याख्या से जुड़े मुद्दे होते हैं।”

लंबी कानूनी प्रक्रिया की संभावना

कंपनी इस ड्राफ्ट ऑर्डर के खिलाफ अपनी आपत्तियां दर्ज कराएगी। यह एक कानूनी प्रक्रिया है, जिसके तहत कंपनियां आयकर विभाग से मिलने वाले ऐसे डिमांड नोटिस को चुनौती दे सकती हैं। माना जा रहा है कि यह मामला अब लंबी कानूनी प्रक्रिया में जाएगा, जहां कंपनी को अपील में राहत मिलने की उम्मीद है।

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