हिंद-प्रशांत (इंडो-पैसिफिक) क्षेत्र में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक उथल-पुथल के बीच भारत और जापान ने अपनी 'विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी' को एक नए स्तर पर पहुंचा दिया है।
नई दिल्ली। हिंद-प्रशांत (इंडो-पैसिफिक) क्षेत्र में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक उथल-पुथल के बीच भारत और जापान ने अपनी 'विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी' को एक नए स्तर पर पहुंचा दिया है। दोनों देशों ने क्षेत्रीय शांति, समुद्री सुरक्षा और नियम-आधारित व्यवस्था को मजबूत करने के लिए रक्षा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अपने पहले संयुक्त विकास प्रोजेक्ट पर हस्ताक्षर किए हैं।
रणनीतिक वार्ता और विकास गाथा का नया अध्याय
नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में जापानी प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची के साथ द्विपक्षीय वार्ता के बाद एक संयुक्त प्रेस वक्तव्य को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस साझेदारी के भविष्य को रेखांकित किया। प्रधानमंत्री ने हालिया जी7 शिखर सम्मेलन में की गई अपनी टिप्पणियों का संदर्भ देते हुए कहा कि आज के वैश्विक उथल-पुथल के माहौल में आपसी विश्वास ही सबसे बड़ी पूंजी है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "मुझे गर्व है कि भारत-जापान साझेदारी इस कसौटी पर पूरी तरह खरी उतरती है। पिछले कुछ दशकों में, ऑटोमोटिव से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स तक, जापान ने भारत की विकास गाथा में एक महत्वपूर्ण भागीदार के रूप में योगदान दिया है। इससे दोस्ती और विश्वास की एक अमूल्य संपत्ति का निर्माण हुआ है। आज प्रधानमंत्री ताकाइची की यात्रा के साथ हम अपनी विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी में एक नया अध्याय शुरू कर रहे हैं।"
रक्षा और नौसैनिक तकनीक में सहयोग का विस्तार
रक्षा के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच हुआ यह समझौता सैन्य और रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जो पहले भारत-जापान संयुक्त विकास प्रोजेक्ट की नींव रखता है। 'नेवल रेडियो एंटीना यूनिकॉर्न' (UNICORN) परियोजना के तहत दोनों देश मिलकर ऐसी रक्षा तकनीकों का विकास करेंगे, जो रक्षा क्षेत्र को आत्मनिर्भर और आधुनिक बनाएंगी। इस परियोजना पर प्रकाश डालते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "नेवल रेडियो एंटीना यूनिकॉर्न का यह प्रोजेक्ट हमारी रक्षा प्रौद्योगिकी साझेदारी में एक नया अध्याय खोलेगा। अब हम संयुक्त रूप से ऐसी रक्षा तकनीकों का विकास करेंगे जो क्षेत्रीय शांति, समुद्री सुरक्षा और नियम-आधारित व्यवस्था को मजबूत करेंगी।"
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और संबंधों का क्रमिक विकास
भारत और जापान के बीच संबंधों का इतिहास सदियों पुराने सांस्कृतिक और सभ्यतागत आदान-प्रदान, आध्यात्मिक जुड़ाव और साझा लोकतांत्रिक मूल्यों से जुड़ा है। दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों की औपचारिक शुरुआत साल 1952 में हुई थी। इसके बाद, साल 2000 में इस रिश्ते को 'वैश्विक साझेदारी' (Global Partnership) का रूप दिया गया। वर्ष 2006 में इसे और उन्नत करते हुए 'रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी' (Strategic and Global Partnership) में बदला गया। साल 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान के तत्कालीन दिवंगत प्रधानमंत्री शिंजो आबे के बीच हुए शिखर सम्मेलन के दौरान इन संबंधों को सर्वोच्च स्तर पर ले जाते हुए 'विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी' (Special Strategic and Global Partnership) का दर्जा दिया गया था, जो आज भी निरंतर नई ऊंचाइयों को छू रहा है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: भारत और जापान के बीच हुआ 'यूनिकॉर्न' (UNICORN) प्रोजेक्ट क्या है?
उत्तर: यह भारत और जापान के बीच पहला रक्षा सह-विकास (Co-development) प्रोजेक्ट है, जिसके तहत दोनों देश मिलकर 'नेवल रेडियो एंटीना यूनिकॉर्न' जैसी अत्याधुनिक नौसैनिक रक्षा कूटनीति और तकनीक का विकास करेंगे। इसका उद्देश्य समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय शांति को बढ़ावा देना है।
प्रश्न 2: भारत-जापान साझेदारी को 'विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी' का दर्जा कब मिला?
उत्तर: भारत और जापान के संबंधों को साल 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे के बीच हुए शिखर सम्मेलन के दौरान 'विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी' के रूप में उन्नत किया गया था।
प्रश्न 3: वैश्विक मंच पर भारत और जापान की साझेदारी का क्या महत्व है?
उत्तर: भारत और जापान हिंद-प्रशांत क्षेत्र की दो सबसे बड़ी लोकतांत्रिक और बाजार अर्थव्यवस्थाएं हैं। वैश्विक उथल-पुथल के इस दौर में दोनों देशों का आपसी तालमेल नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था बनाए रखने और हिंद-प्रशांत क्षेत्र की स्थिरता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। (Source: ANI)
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