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एक उम्मीद की किरण बनकर उभरा भारत

भारत बनेगा AI सुपरपावर, वैश्विक संकट के बीच उभरती नई ताकत

दुनिया आज युद्ध, ऊर्जा संकट और आने वाले एआई संकट जैसी बड़ी चुनौतियों से जूझ रही है, लेकिन ऐसे निराशाजनक वैश्विक माहौल में भारत एक उम्मीद की किरण बनकर उभरा है।

भारत बनेगा ai सुपरपावर वैश्विक संकट के बीच उभरती नई ताकत

India Emerges as AI and Manufacturing Powerhouse |

नई दिल्ली। दुनिया आज युद्ध, ऊर्जा संकट और आने वाले एआई संकट जैसी बड़ी चुनौतियों से जूझ रही है, लेकिन ऐसे निराशाजनक वैश्विक माहौल में भारत एक उम्मीद की किरण बनकर उभरा है। विश्व आर्थिक मंच के पूर्व निदेशक और होरासिस के अध्यक्ष फ्रैंक-जुर्गन रिक्टर का मानना है कि भारत में एआई और विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) के क्षेत्र में वैश्विक लीडर बनने की पूरी क्षमता है।

एआई की दौड़ में पिछड़ चुका है यूरोप

एएनआई को दिए एक विशेष साक्षात्कार में रिक्टर ने कहा कि यूरोप अपनी खुद की एआई क्षमताएं और संप्रभु एआई (सोवरेन एआई) स्थापित करने का अवसर खो चुका है। उन्होंने बताया कि यूरोप फिलहाल गिरावट के दौर में है। वहां बेरोजगारी बढ़ रही है। इसके विपरीत भारत एआई, आईटी, विनिर्माण और कृषि पर ध्यान केंद्रित करते हुए तेजी से सही दिशा में आगे बढ़ रहा है।

फिलहाल अमेरिका और चीन है दो एआई महाशक्तियां

रिक्टर ने फरवरी में दिल्ली में आयोजित 'एआई इम्पैक्ट समिट' का जिक्र किया, जहां प्रधानमंत्री मोदी ने घोषणा की थी कि भारत को भविष्य की एआई महाशक्ति बनना चाहिए। रिक्टर के अनुसार वर्तमान में अमेरिका और चीन दो महाशक्तियां हैं। चीन अमेरिका से स्वतंत्र होकर अपना खुद का एआई विकसित कर रहा है। अब भारत भी उसी दिशा में कदम बढ़ा रहा है और विनिर्माण क्षेत्र में एआई को लागू करने की कोशिश कर रहा है।

भ्रष्टाचार में कमी व्यापार के लिए एक सकारात्मक संकेत

इंडस्ट्री 4.0 की महाशक्ति बनने की भारत की कोशिशें रंग ला रही हैं क्योंकि सरकार भ्रष्टाचार और कागजी कार्रवाई की बाधाओं को कम करने में महत्वपूर्ण प्रगति कर रही है। रिक्टर ने कहा कि मौजूदा सरकार के सत्ता में आने के बाद से काफी बदलाव आए हैं। भ्रष्टाचार में कमी आना व्यापार शुरू करने के लिए एक बहुत ही सकारात्मक संकेत है।

वैश्वीकरण का नया इंजन भारत

इस विकास को बनाए रखने के लिए रिक्टर ने इस बात पर जोर दिया कि भारत को विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) का स्वागत करना जारी रखना चाहिए और संरक्षणवाद की नीति से बचना चाहिए। दुनिया अब भारत को वैश्वीकरण के एक नए इंजन के रूप में देख रही है। रिक्टर ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की चुनौतियों पर निराशा व्यक्त की लेकिन भारत के भविष्य को लेकर वे पूरी तरह आश्वस्त और उत्साहित नजर आए।

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