वैश्विक चुनौतियों और कमजोर होते रुपये के बीच भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में भारी बढ़ोत्तरी हुई है। देश का विदेशी मुद्रा भंडार इस माह रिकार्ड स्तर पर पहुंच गया है।
देश के विदेशी मुद्रा भंडार में भारी बढ़ोतरी
704 अरब डॉलर के पार पहुंचा
नंई दिल्ली
वैश्विक चुनौतियों और कमजोर होते रुपये के बीच भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में भारी बढ़ोत्तरी हुई है। देश का विदेशी मुद्रा भंडार इस माह रिकार्ड स्तर पर पहुंच गया है। 16 जनवरी को समाप्त हुए सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार 14 अरब 16 करोड़ डॉलर बढ़कर 704 अरब 89 करोड़ डॉलर हो गया। इस दौरान स्वर्ण भंडार और विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां दोनों में बढ़ोतरी हुई है।
रिजर्व बैंक द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार देश का विदेशी मुद्रा भंडार इस समय अपने सर्वोच्च स्तर 704 अरब 89 करोड़ डॉलर पर आ गया है। पिछले सप्ताह देश का कुल विदेशी मुद्रा भंडार 14.16 अरब डॉलर बढ़कर 701.36 अरब डॉलर रहा था। इससे पहले सितंबर 2024 में विदेशी मुद्रा भंडार 704.89 अरब डॉलर के स्तर तक पहुंचा था, हालांकि हाल के महीनों में रुपये में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने के लिए इसका उपयोग किया गया, जिससे भंडार पर दबाव देखा गया था।
पिछले सप्ताह के मुकाबले यह चार अरब 62 करोड़ डॉलर अधिक
आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक, 23 जनवरी को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा मानी जाने वाली विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां (FCA) 2.36 अरब डॉलर बढ़कर 562.88 अरब डॉलर हो गईं। पिछले सप्ताह के मुकाबले यह चार अरब 62 करोड़ डॉलर अधिक है। डॉलर में दर्शाई जाने वाली इन परिसंपत्तियों में यूरो, पाउंड और जापानी येन जैसी गैर-अमेरिकी मुद्राओं में उतार-चढ़ाव का असर भी शामिल रहता है।
स्वर्ण भंडार का मूल्य 5.63 अरब डॉलर बढ़कर 123.08 अरब डॉलर पहुंचा
समीक्षाधीन सप्ताह में स्वर्ण भंडार का मूल्य 5.63 अरब डॉलर बढ़कर 123.08 अरब डॉलर पहुंच गया। इसके अलावा, विशेष आहरण अधिकार (SDR) में 3.3 करोड़ डॉलर की बढ़ोतरी हुई और यह 18.73 अरब डॉलर हो गया। वहीं, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के पास भारत की आरक्षित स्थिति भी 1.8 करोड़ डॉलर बढ़कर 4.70 अरब डॉलर हो गई है।
विदेशी मुद्रा भंडार देश के केंद्रीय बैंक द्वारा धारित या नियंत्रित विदेशी परिसंपत्तियाँ होती हैं। ये भंडार सोने या किसी विशिष्ट मुद्रा से युक्त होते हैं। इनमें विशेष आहरण अधिकार और विदेशी मुद्राओं में अंकित विपणन योग्य प्रतिभूतियाँ जैसे ट्रेजरी बिल, सरकारी बांड, कॉर्पोरेट बांड और इक्विटी तथा विदेशी मुद्रा ऋण भी शामिल हो सकते हैं।
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