मिडिल ईस्ट में अमेरिका - ईरान संघर्ष और कच्चे तेल पर लागत बढ़ने से देश के विदेशी मुद्रा भंडार में बीते सप्ताह भारी कमी आयी है।
मुंबई। मिडिल ईस्ट में अमेरिका - ईरान संघर्ष और कच्चे तेल पर लागत बढ़ने से देश के विदेशी मुद्रा भंडार में बीते सप्ताह भारी कमी आयी है। रिजर्व बैंक के अनुसार विदेशी मुद्रा भंडार में पिछले हफ्ते 7.79 अरब डालर की गिरावट आयी है। यह लगातार दूसरा हफ्ता है जब इसमें बड़ी गिरावट आई है। इसका मुख्य कारण विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में कमी और रुपये को सहारा देने के लिए RBI द्वारा बड़े पैमाने पर डॉलर बेचना है।
लगातार दूसरे सप्ताह बड़ी गिरावट
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा जारी डाटा के अनुसार 1 मई 2026 को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार $7.79 अरब घटकर $690.69 अरब रह गया है। इससे पहले 24 अप्रैल को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार 4.82 अरब डालर घटा था। पिछले दो हफ्तों में देश के कुल विदेशी मुद्रा भंडार में कुल 12.6 अरब डालर से अधिक की कमी आई है।
मिडिल ईस्ट तनाव से रुपये पर दबाव
खाड़ी में जारी तनाव के कारण भारतीय रुपया लगातार दबाव में है। मध्य पूर्व संघर्ष शुरू होने से पहले, इस वर्ष 27 फरवरी को समाप्त हुए सप्ताह के दौरान मुद्रा भंडार बढ़कर 728.494 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया था। लेकिन बीते दिनों डॉलर के मुकाबले रुपया 25 पैसे कमजोर होकर 94.47 पर बंद हुआ। RBI रुपये में ज्यादा गिरावट रोकने के लिए बाजार में लगातार हस्तक्षेप कर रहा है। इसका विदेशी मुद्रा संपत्ति और गोल्ड रिजर्व दोनों में कमी दर्ज की गई है।
विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में भी गिरावट
केंद्रीय बैंक के आंकड़ों के अनुसार, 1 मई को समाप्त हुए सप्ताह के लिए, विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में 2.797 बिलियन डॉलर की कमी आई और यह घटकर 551.825 बिलियन डॉलर रह गई। इस दौरान देश का स्वर्ण भंडार का मूल्य 5.021 अरब डालर घटकर 115.216 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया।
SDR और IMF रिजर्व स्थिति में मामूली बढ़त
शीर्ष बैंक ने बताया कि विशेष आहरण अधिकार (एसडीआर) 15 मिलियन डॉलर बढ़कर 18.789 बिलियन डॉलर हो गए हैं। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के आंकड़ों के अनुसार, रिपोर्टिंग सप्ताह के अंत में भारत की आईएमएफ के साथ आरक्षित स्थिति में भी 8 मिलियन डॉलर की वृद्धि हुई और यह बढ़कर 4.863 बिलियन डॉलर हो गई।
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