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भारत की GDP 7.4% बढ़ने का अनुमान

भारत की जीडीपी  7.4%  की दर से बढ़ने का अनुमान

भारत का वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वित्त वर्ष 2025–26 (अप्रैल 2025 से मार्च 2026) में 7.4% की दर से बढ़ने की संभावना है।

भारत की जीडीपी  74  की दर से बढ़ने का अनुमान

India GDP 2025-26 |

वैश्विक संस्थानों का भरोसा

भारत का वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वित्त वर्ष 2025–26 (अप्रैल 2025 से मार्च 2026) में 7.4% की दर से बढ़ने की संभावना है। यह वृद्धि दर वित्त वर्ष 2024–25 में दर्ज 6.5% की वृद्धि की तुलना में उल्लेखनीय तेज़ी की तरफ इशारा करती है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) ने यह अनुमान जारी करते हुए कहा कि यह वृद्धि दर भारतीय अर्थव्यवस्था की मौजूदा स्थिति और भविष्य के लिए खुशनुमा उम्मीद जगाती है। "फिच" रेटिंग्स ने भी FY 2026 के लिए 7.4% की वृद्धि का अनुमान लगाया है। साथ ही अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ("IMF") ने भी 2025-26 के लिए भारत के विकास अनुमान को 7.3% तक की वृद्धि का आकलन व्यक्त किया है, जो मजबूत घरेलू मांग और मुद्रास्फीति में सुधार की स्थिति को दर्शाता है।

मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस

 सेक्टर की मजबूत भूमिका मैन्युफैक्चरिंग, कंस्ट्रक्शन और सर्विस सेक्टर में तेजी मुख्य कारक हैं, जिसमें वित्तीय और रियल एस्टेट सेवाओं में 9.9% की वृद्धि का अनुमान है। हालांकि यह वृद्धि दर केन्द्र सरकार द्वारा आर्थिक वृद्धि (जीडीपी) को मापने के आधार वर्ष में परिवर्तन को ध्यान में रखकर आंकी गई मानी जा रही है।

वैश्विक तनावों के बीच भारत की स्थिरता

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने जीडीपी अनुमानों के आधार पर बुधवार को जारी जनवरी बुलेटिन में कहा कि वर्ष 2026 की शुरुआत वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों से हुई। इनमें वेनेजुएला में अमेरिकी हस्तक्षेप, पश्चिम एशिया में तनातनी, रूस-यूक्रेन शांति समझौते को लेकर अनिश्चितता और ग्रीनलैंड विवाद शामिल हैं। इन घटनाओं से वैश्विक जोखिम एवं नीतिगत अस्थिरता बढ़ी, लेकिन भारत की मौजूदा स्थिति आगे के लिए उम्मीद जगाती है।

घरेलू मांग बनी हुई है मजबूत

आरबीआई बुलेटिन के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष 2025-26 के लिए जीडीपी वृद्धि के प्रारंभिक अनुमान भारतीय जीडीपी की मजबूती को दर्शाते हैं। ये आंकड़े भारत के दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बने रहने की तरफ भी इशारा करते हैं। रिजर्व बैंक ने कहा कि दिसंबर 2025 के उच्च-आवृत्ति संकेतकों से पता चला कि घरेलू मांग में मजबूती और वृद्धि की रफ्तार बनी हुई है।

महंगाई नियंत्रण में, निर्यात पर फोकस

खुदरा महंगाई दिसंबर में थोड़ा बढ़ी है, लेकिन आरबीआई के संतोषजनक स्तर के निचले स्तर से नीचे ही रही। बुलेटिन में कहा गया है कि भारत ने निर्यात विविधीकरण और मजबूती के प्रयास तेज किए हैं। भारत 14 देशों या समूहों के साथ व्यापार वार्ता में शामिल है।

वित्तीय संसाधनों के प्रवाह में उल्लेखनीय बढ़ोतरी

बुलेटिन के अनुसार वित्तीय संसाधनों के प्रवाह में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई। अप्रैल-दिसंबर 2025 तक वाणिज्यिक क्षेत्र में कुल वित्तीय संसाधनों का प्रवाह बढ़कर 30.8 लाख करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले साल 21.3 लाख करोड़ रुपये था। बैंक स्रोतों के अलावा गैर-बैंक स्रोतों में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई। दिसंबर 2025 के अंत तक वाणिज्यिक क्षेत्र का कुल कर्ज 15 फीसदी बढ़ा, जिसमें गैर-बैंक स्रोतों ने 16.4 फीसदी की बढ़त दर्ज की।

आर्थिक सुधारों से दीर्घकालिक लाभ की उम्मीद

बुलेटिन के मुताबिक 2025 में देश में कई बड़े आर्थिक सुधार भी हुए, जिनमें कर ढांचे का तर्कसंगत बनाना, नए श्रम कानूनों को लागू करना और वित्तीय क्षेत्र में उदारीकरण शामिल हैं। इनसे दीर्घकालिक वृद्धि को समर्थन मिलने की उम्मीद है।

आधार वर्ष में बदलाव का असर

जीडीपी वृद्धि दर में वृद्धि का एक अहम कारण हाल में केन्द्र सरकार द्वारा आर्थिक वृद्धि को मापने के लिए नया आधार वर्ष जारी करने के निर्णय को भी माना जा रहा है। बेस ईयर में बदलाव के बाद जीडीपी राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) के मौजूदा अनुमान से ज्यादा रह सकती है।

नया बेस ईयर: 2022-23

मालूम हो कि भारत सरकार जीडीपी मापने के आधार वर्ष (Base Year) को 2011-12 से बदलकर 2022-23 करने का फैसला किया है। यह बदलाव 27 फरवरी 2026 से लागू होगा। सरकार का मानना है कि इससे डिजिटल अर्थव्यवस्था, खपत पैटर्न और महामारी के बाद के बदलावों को बेहतर ढंग से दर्शाया जा सकेगा।

एसबीआई रिपोर्ट का आकलन

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एनएसओ द्वारा जारी पहले अग्रिम अनुमान में चालू वित्त वर्ष में वृद्धि दर 7.4% रहने की बात कही है, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान यह 6.5% थी। मौजूदा कीमतों पर जीडीपी आठ प्रतिशत रहने का अनुमान है।

आगे और संशोधन की संभावना

एसबीआई का मानना है कि आधार वर्ष 2022-23 करने के बाद चालू वित्त वर्ष में वृद्धि दर 7.5% रह सकती है और इसमें ऊपर की तरफ संशोधन हो सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐतिहासिक तौर पर आरबीआई और एनएसओ के जीडीपी अनुमानों के बीच का अंतर आमतौर पर 20-30 आधार अंक के बीच रहा है, इसलिए 7.4% का अनुमान तर्कसंगत और उम्मीद के मुताबिक है।अगर चाहो तो मैं

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