2025 के मानसून सीजन के दौरान भारत में आई भयंकर बाढ़ और प्राकृतिक आपदाओं का विश्लेषण किया गया है। जलवायु परिवर्तन के कारण इस बार बारिश ने देश के कई हिस्सों में तबाही मचाई है।
नकुल जैन
दुनिया में जिस तरह से जलवायु परिवर्तन बढ़ रहा है..उसी का नतीजा है कि आज पूरा विश्व प्राकृतिक आपदाओं से घिरा हुआ नजर आ रहा है..कभी पानी के अभाव में सूखा देखने को मिलता है..तो कभी भयंकर बारिश के चलते जलभराव बाढ़ के रुप में रौद्र रुप धारण कर लेता है..वहीं भूकंप और पर्वत और चट्टानों का दरकना भी इसी जलवायु परिवर्तन का मूल कारण है..अगर हम समय रहते इन चीजों से निपटने के लिए तैयार नहीं हुए तो आने वाले समय में इसका बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ सकता है..खैर भारत में इस समय में मानसून का सीजन चल रहा है..जिसके चलते देश भर में बारिश देखने को मिल रही है..वहीं इस साल की मानसून की बारिश ने लोगों को राहत देने से ज्यादा परेशानी देने का काम किया है..अबकी बार बरसात के दौरान देश के हर हिस्से में भारी जल भराव हुआ है..जिसके कारण मैदानी क्षेत्रों में बाढ़ की समस्या पैदा हुई है..तो पहाड़ी क्षेत्रों में बांध के टूटने और बादल फटने से पहाड़ों के चटकने और भयंकर बाढ़ की घटनाएं सामने आई है..इन घटनाओं के चलते लाखों लोग घर से बेघर हो गए हैं..वहीं हजारों की तादाद में जानें भी गई है...तो आईए जानते हैं इस साल आई बाढ़ ने कहां पर और कितना प्रभावित किया है....
बाढ़ प्रभावित क्षेक्ष
हिमाचल में सबसे लंबी बाढ़
उत्तर भारत के हिमाचल में इस साल मानसून के बाद बाढ़ ने सबसे पहले दस्तक दी थी..बाढ़ के चलते प्रदेश के बहुत से जिले प्रभावित हुए हैं..हालांकि इस कहर का सबसे ज्यादा असर चंबा मंडी और कुलू में देखने को मिला है..जहां इस प्राकृतिक प्रकोप ने लाखों लोगों को घर से बेघर कर दिया..वहीं बहुत से लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा है..आंकड़ों के मुताबिक अबतक बाढ़ के चलते करीब 320 लोगों की मौत हो चुकी है..वहीं लाखों लोग बेघर हो गए हैं..बाढ़ के चलते प्रदेश के बहुत से इलाकों में बिजली सेवा भी प्रभावित हुई है..बता दें कि जगह जल भराव के चलते ट्रांसफार्मर में दिक्कतें पैदा हुई है..जिसके चलते बिजली की समस्या आ रही है..भारी बारिश के चलते बहुत से इलाकों में सड़के टूट गई हैं..जिसके कारण हिमाचल के बहुत से राष्ट्रीय राजमार्ग भी इसकी चपेट में आए हैं...
उत्तराखंड में त्राहि-त्राहि
हिमाचल के जैसे ही उत्तराखंड़ के पहाड़ी इलाकों को इस साल के मानसून ने प्रभावित किया है..बाढ़ के कहर ने प्रदेश के उत्तरकाशी में अबकी बार बुरी तरह से हाहाकार मचाया है..वहीं चमोली और नई टिहरी में बादल फटने की घटनाओं ने उत्तराखंड को 10 साल पीछे ढ़केल दिया है..बाढ़ के चलते यहां पर भी काफी संख्या में लोग बेघर हो गए हैं..वहीं बहुत से लोग इस आपदा की भेंट चढ़ गए है..वहीं उत्तराखंड़ में जान के साथ माल का भी काफी नुकसान उठाना पड़ा है..आंकड़ो के मुताबिक बाढ़े कारण यहां पर करीब 2500 करोड़ का नुकसान हुआ है...वहीं आपदा के बाद लोगों के रोजगार भी बिल्कुल ठप पड़ गए हैं..जिससे इस विकट परिस्थिती की आम आदमी पर दोहरी मार पड़ी है..बाढ़ के पानी में बह जाने के कारण सैकड़ों लोग लापता भी बताए जा रहे हैं..जिनकी तलाश में सुरक्षा बलों की टीमें जुटी हुई है..
बिहार में बाढ़.. मचा हाहाकार
देश के जनसंख्या बहुल प्रदेशों में शामिल बिहार भी इस प्राकृतिक आपदा की चपेट में आने से बच नहीं पाया है..बता दें कि कुदरत के इस प्रकोप ने इस प्रदेश को भी बुरी तरह से अपनी जकड़न में ले लिया है..जिसके चलते बिहार में 20 के करीब जिले बाढ़ से हताहत हुए है..वही पांच लाख लोगों का जीवन पानी के बीच में डूबा हुआ है..भारी बारिश के चलते नदियों का उफनना और बांध का टूटना यहां बाढ़ का कारण बना है..बिहार में मुंगेर,सुपौल,वैशाली,पटना,खगड़िया,लखीसराय व अन्य बहुत से जिले प्रभावित हुए है..वहीं आंकड़ो के मुताबिक यहां 30 के करीब लोगों ने अपनी जान गंवाई है..और करीब 17 लाख से भी ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं..
नदियों के उफान से घिरा पंजाब
भारत में गेहूं और चावल के रिकार्डतोड़ उत्पादन करने वाले प्रदेश पंजाब को भी इस साल बाढ़ ने अपनी आघोष में ले लिया है..जिसके चलते पूरे प्रदेश में विकट समस्या पैदा हो गई..प्रदेश में पड़ने वाली रावी और व्यास नदी के उफान पर आ जाने से बांध का पानी नियंत्रण से बाहर हो गया..और जिसके चलते पंजाब में बाढ़ आ गई.और भयंकर तबाही मच गई..वहीं तबाही के इस मंजर के चलते अमृतसर में 30 हजार से भी ज्यादा लोग चपेट में आ गए है..वहीं फिरोजपुर, फाजिल्का, गुरदासपुर, पठानकोट जैसे जिलों का हाल भी ठीक कुछ ऐसा ही हुआ..जिसके चलते इस आपदा ने पूरे प्रदेश की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ कर रख दी..वहीं हालात बेकाबू होने के बाद सीएम ने इसे प्राकृतिक आपदा घोषित कर दिया है,,और इतना ही नहीं उन्होंने इस भयंकर स्थिती से निपटने के लिए केंद्र से मदद की गुहार भी लगाई है..वहीं इस राज्य के आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो अब तक 9 जिलों में इस आपदा ने अपना असर दिखाया है..जिसके चलते 2.5 लाख से भी ज्यादा लोग इसकी चपेट में आ चुके हैं..वहीं 29 लोगों ने जान भी गंवाई है..