UNGA के 81वें सत्र में संगीता कुमारी सिंह देव ने सुरक्षित और शांतिपूर्ण परमाणु तकनीक के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने सतत विकास में IAEA की भूमिका और तकनीकी सहयोग पर जोर दिया।
न्यूयॉर्क (अमेरिका)। भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में परमाणु विज्ञान और तकनीक के सुरक्षित, संरक्षित और शांतिपूर्ण उपयोग के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल की प्रमुख और सांसद संगीता कुमारी सिंह देव ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में 'अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की रिपोर्ट' पर संबोधन के दौरान यह बात कही। उन्होंने परमाणु विज्ञान के शांतिपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देने में IAEA की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
परमाणु विज्ञान के शांतिपूर्ण उपयोग में IAEA की भूमिका पर जोर
संगीता कुमारी सिंह देव ने अपने संबोधन में परमाणु विज्ञान के शांतिपूर्ण उपयोग के लिए नियामक ढांचे के विकास पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि IAEA सदस्य देशों की मानवीय और संस्थागत क्षमताओं को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उनके संबोधन में परमाणु तकनीक के सुरक्षित उपयोग और प्रभावी नियामक व्यवस्था के महत्व को रेखांकित किया गया।
भारतीय मिशन ने X पर साझा की संबोधन की जानकारी
संयुक्त राष्ट्र में भारतीय मिशन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर संगीता कुमारी सिंह देव के संबोधन की जानकारी साझा की। मिशन के अनुसार, उन्होंने UNGA के 81वें सत्र में IAEA की रिपोर्ट पर भारत का पक्ष रखा और परमाणु विज्ञान एवं तकनीक के सुरक्षित, संरक्षित और शांतिपूर्ण उपयोग के प्रति देश की प्रतिबद्धता दोहराई। बयान में सतत विकास में IAEA की भूमिका और परमाणु तकनीक के क्षेत्र में भारत की महत्वपूर्ण प्रगति का भी उल्लेख किया गया।
IAEA के तकनीकी सहयोग कार्यक्रम को भारत का समर्थन
भारतीय मिशन के बयान के अनुसार, संगीता कुमारी सिंह देव ने IAEA के तकनीकी सहयोग कार्यक्रम (Technical Cooperation Programme) और उसकी प्रमुख पहलों के प्रति भारत के समर्थन पर प्रकाश डाला। उन्होंने सतत विकास में परमाणु विज्ञान और तकनीक के योगदान को महत्वपूर्ण बताया। साथ ही, उन्होंने परमाणु तकनीक के सुरक्षित और शांतिपूर्ण उपयोग को आगे बढ़ाने में अंतरराष्ट्रीय सहयोग की भूमिका को भी रेखांकित किया।
साउथ-साउथ सहयोग के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दोहराई
संगीता कुमारी सिंह देव ने साउथ-साउथ सहयोग (South-South Cooperation) के प्रति भारत की प्रतिबद्धता भी दोहराई। भारतीय मिशन के अनुसार, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि परमाणु विज्ञान के लाभ उन सभी देशों तक पहुंचने चाहिए जो इसका उपयोग करना चाहते हैं। इसके साथ ही, उन्होंने परमाणु सुरक्षा और संरक्षा के मजबूत ढांचे को बनाए रखने के महत्व को रेखांकित किया। (Source: ANI)
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