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देश में चीनी के दाम 7 फीसदी तक बढ़ने का अनुमान

भारत में इस सीजन 7 प्रतिशत तक महंगी हो सकती है चीनी, क्रिसिल की रिपोर्ट में हुआ खुलासा

क्रिसिल रिपोर्ट के मुताबिक भारत में चीनी कीमतें 7% तक बढ़ सकती हैं। सरकार ने मांग को नियंत्रित करने और जमाखोरी रोकने के लिए सख्त कदम उठाए हैं। पढ़ें पूरी खबर।

भारत में इस सीजन 7 प्रतिशत तक महंगी हो सकती है चीनी क्रिसिल की रिपोर्ट में हुआ खुलासा

Representative Image (File Photo) |

नई दिल्ली। भारत में मौजूदा सीजन में चीनी की कीमतों में करीब 7 प्रतिशत की बढ़ोतरी की उम्मीद है। क्रिसिल इंटेलिजेंस के अनुसार, सरकार के ड्यूटी-फ्री इंपोर्ट की अनुमति देने के बावजूद, कम इन्वेंट्री और मजबूत घरेलू मांग के कारण बाजार में सप्लाई की कमी बनी हुई है। रिसर्च और एनालिटिक्स फर्म की हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि इंपोर्ट से कीमतों में होने वाली बढ़ोतरी को कुछ हद तक कम करने में मदद मिलेगी, जिसके चलते फर्म ने पहले की 9 प्रतिशत बढ़ोतरी के अनुमान को घटा दिया है।

अगस्त-सितंबर में भी कीमतों में तेजी की संभावना

क्रिसिल इंटेलिजेंस ने कहा, "अतिरिक्त सप्लाई से चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है। अब SS26 के लिए औसत कीमतों में 7 प्रतिशत की बढ़ोतरी का अनुमान है, जबकि पहले यह अनुमान 9 प्रतिशत था।" अक्टूबर 2025 से सितंबर 2026 तक चलने वाले 2025-26 चीनी सीजन (SS26) के लिए, क्रिसिल को उम्मीद है कि इंपोर्ट की मंजूरी के बावजूद अगस्त और सितंबर में कीमतें बढ़ती रहेंगी। हालांकि, अब यह बढ़ोतरी पहले के लगभग 15-20 प्रतिशत के अनुमान की तुलना में 300-500 बेसिस पॉइंट्स कम रहने की संभावना है।

10 लाख टन आयात से बढ़ेगा देश का चीनी स्टॉक

देश में चीनी का स्टॉक बढ़ाने के लिए 10 लाख टन कच्ची चीनी का आयात (import) किया जा रहा है। इससे सीजन के अंत में बचने वाला कुल स्टॉक 39 लाख टन से बढ़कर 49 लाख टन होने की उम्मीद है। इस बढ़ोतरी से देश के पास घरेलू जरूरत को पूरा करने के लिए चीनी का स्टॉक डेढ़ महीने से बढ़कर अब करीब दो महीने का हो जाएगा। रिपोर्ट में कहा गया है, "हालांकि SS26 में चीनी उत्पादन में लगभग 8 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है, लेकिन मजबूत घरेलू मांग और कम ओपनिंग स्टॉक के कारण इन्वेंट्री पर दबाव बने रहने की उम्मीद है।"

महंगी गन्ना लागत से चीनी मिलों के मार्जिन पर असर

चीनी उत्पादकों के लिए क्रिसिल का अनुमान है कि SS26 में इंटीग्रेटेड मिलों के EBITDA मार्जिन में केवल 50 बेसिस पॉइंट्स के आसपास ही बढ़ोतरी होगी। ऐसा इसलिए है क्योंकि चीनी की ऊंची कीमतों और वॉल्यूम में मामूली बढ़ोतरी से होने वाले फायदे, गन्ने की ऊंची लागत के कारण काफी हद तक खत्म हो जाएंगे। गन्ने के लिए 'फेयर एंड रेमुनरेटिव प्राइस' (FRP) और 'स्टेट एडवाइज्ड प्राइस' (SAP) में क्रमशः 4.4 प्रतिशत और 8.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।

SS27 में बेहतर मार्जिन और मुनाफे की उम्मीद

SS27 के लिए मुनाफे का आउटलुक ज़्यादा मजबूत है। उस समय कम इन्वेंट्री से चीनी की बिक्री से मिलने वाली आय (realisation) को सहारा मिलने की उम्मीद है, और डिस्टिलरी व को-जेनरेशन बिजनेस के बेहतर प्रदर्शन से इंडस्ट्री के मार्जिन में 100-200 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी हो सकती है। आने वाले त्योहारों के मौसम में खुदरा कीमतों को बढ़ने से रोकने और स्थानीय सप्लाई बनाए रखने के लिए, सरकार ने 10 लाख मीट्रिक टन (1 मिलियन टन) कच्ची चीनी के ड्यूटी-फ्री आयात को मंजूरी दी है। यह लगभग एक दशक में देश का पहला चीनी आयात है।

जमाखोरी रोकने के लिए बनाए कड़े नियम

इसके साथ ही, सट्टेबाजी के लिए जमाखोरी को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए गए हैं। इनमें डीलरों के लिए 400 टन की स्टॉक लिमिट, बड़े औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए 15 दिन की इन्वेंट्री लिमिट और मिलों से खरीदे गए स्टॉक को उठाने के लिए 7 दिन की अनिवार्य समय-सीमा शामिल है।
​(इनपुट: ANI)

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