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भारत की पहली राष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी नीति 'प्रहार' जारी, जीरो टॉलरेंस का सख्त संदेश

गृह मंत्रालय (MHA) ने सोमवार को 'प्रहार' (PRAHAAR) नाम से भारत की पहली व्यापक राष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी नीति और रणनीति जारी की है।

भारत की पहली राष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी नीति प्रहार जारी जीरो टॉलरेंस का सख्त संदेश

India Unveils First National Anti-Terror Policy 'PRAHAAR' |

नई दिल्ली। गृह मंत्रालय (MHA) ने सोमवार को 'प्रहार' (PRAHAAR) नाम से भारत की पहली व्यापक राष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी नीति और रणनीति जारी की है। यह आठ पन्नों की नीति आतंकवाद के सभी रूपों को रोकने और उनसे लड़ने के लिए एक व्यवस्थित और खुफिया जानकारी पर आधारित रूपरेखा पेश करती है। इस नीति में आतंकी हमलों को रोकने, त्वरित और उचित जवाबी कार्रवाई करने और विभिन्न सरकारी एजेंसियों के बीच तालमेल मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया है। यह रणनीति सरकार और समाज के सभी वर्गों की भागीदारी पर आधारित है, जो मानवाधिकारों और कानून के शासन को प्राथमिकता देती है। साथ ही, यह उन स्थितियों को कम करने पर भी ध्यान केंद्रित करती है जो कट्टरपंथ सहित आतंकवाद को बढ़ावा देती हैं।

खुफिया तंत्र और एजेंसियों का सटीक तालमेल

इस नीति का मुख्य उद्देश्य भारतीय नागरिकों और हितों की रक्षा के लिए आतंकी हमलों को रोकना, खतरों के अनुरूप त्वरित कार्रवाई करना और सरकारी क्षमताओं को एकजुट करना है। भारत की यह रणनीति 'खुफिया जानकारी द्वारा निर्देशित' है, जिसमें सूचनाएं जुटाने और उन्हें संबंधित एजेंसियों तक पहुँचाने को प्राथमिकता दी जाती है ताकि खतरों को समय रहते बेअसर किया जा सके। इस कार्य के लिए इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के तहत संचालित 'मल्टी एजेंसी सेंटर' (MAC) और 'जॉइंट टास्क फोर्स ऑन इंटेलिजेंस' (JTFI) को मुख्य मंच बनाया गया है, जहाँ देश भर में रीयल-टाइम सूचना साझा की जाती है। केंद्र और राज्य की पुलिस ताकतों के बीच भी इन तंत्रों के माध्यम से घनिष्ठ साझेदारी बनाई गई है।

साइबर सुरक्षा और टेरर फंडिंग पर कड़ा प्रहार

नीति में इस बात का भी उल्लेख है कि आतंकवादी इंटरनेट का दुरुपयोग संवाद, भर्ती और दुष्प्रचार के लिए कर रहे हैं। भारतीय कानून प्रवर्तन एजेंसियां ऐसे साइबर नेटवर्क और प्रचार को सक्रिय रूप से बाधित करने का प्रयास करती हैं। इसके अलावा, आतंकवादियों को रसद और वित्तीय सहायता देने वाले 'ओवरग्राउंड वर्कर्स' (OGW) के मॉड्यूल और अवैध हथियार सिंडिकेट के साथ उनके गठजोड़ को भी खुफिया एजेंसियों द्वारा निशाना बनाया जा रहा है। आतंकी वित्तपोषण के नेटवर्क को कानूनी ढांचे के तहत ध्वस्त करने पर विशेष बल दिया गया है। भारत जल, थल और नभ तीनों मोर्चों पर खतरों का सामना करता है, इसलिए सीमा सुरक्षा बलों और आव्रजन अधिकारियों को अत्याधुनिक तकनीकों से लैस किया गया है। बिजली, रेलवे, विमानन, बंदरगाह और परमाणु ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को भी बाहरी और आंतरिक खतरों से सुरक्षित करने की क्षमता विकसित की गई है।

CBRNED खतरे और 'जीरो टॉलरेंस' का स्पष्ट संदेश

नीति में बताया गया है कि रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल, परमाणु और डिजिटल (CBRNED) सामग्रियों तक आतंकवादियों की पहुंच रोकना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। भारत दशकों से आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में अग्रणी रहा है और पड़ोसी देशों में अस्थिरता या आतंकवाद को सरकारी नीति के रूप में इस्तेमाल किए जाने के बावजूद अपने रुख पर कायम है। यह नीति आतंकवाद के खिलाफ भारत के 'जीरो टॉलरेंस' के संकल्प को दोहराती है। इसमें स्पष्ट किया गया है कि धर्म, जातीयता या विचारधारा के आधार पर आतंकवाद को उचित नहीं ठहराया जा सकता। भारत ने हमेशा आतंकवाद के पीड़ितों का समर्थन किया है और इस विश्वास पर अडिग रहा है कि हिंसा का दुनिया में कोई औचित्य नहीं है।

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