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भारत की सोच दुनिया को दिखाए एकता का मार्ग

भारत की सोच विश्व को एकता का मार्ग दिखाएगी: आरएसएस

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने गुरुवार को भारत की सभ्यतागत सोच और वैश्विक भूमिका के महत्व का उल्लेख किया और कहा कि यह सोच दुनिया को एकजुट करने का रास्ता दिखा सकती है।

भारत की सोच विश्व को एकता का मार्ग दिखाएगी आरएसएस

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वाशिंगटन। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने गुरुवार (स्थानीय समय) को भारत की सभ्यतागत सोच और वैश्विक भूमिका के महत्व का उल्लेख किया और कहा कि यह सोच दुनिया को एकजुट करने का रास्ता दिखा सकती है। भारत आज ऐसे मोड़ पर खड़ा है, जहां वह अधिक शांतिपूर्ण और संतुलित वैश्विक व्यवस्था बनाने में बड़ी भूमिका निभा सकता है।

भारतीय-अमेरिकी समुदाय को संबोधित किया

वह वाशिंगटन डीसी मेट्रो एरिया में ग्रेटर डीसी के भारत-अमेरिका समुदाय के लोगों को संबोधित कर रहे थे। इसका विषय था—'भारत का वैश्विक विजन और उभरते विश्व में उसकी भूमिका।'

परंपराएं आज भी समाधान देने में सक्षम

होसबोले ने भारत के विचारों को विस्तार से रखा। उन्होंने कहा कि भारत की परंपराएं केवल अतीत की बात नहीं हैं, बल्कि आज की वैश्विक समस्याओं (जैसे सामाजिक विखंडन और पर्यावरण संकट) का समाधान भी दे सकती हैं।

एकता का दर्शन भारत की पहचान

होसबोले ने अपने संबोधन में कहा, 'भारत की सोच यह मानती है कि पूरे अस्तित्व में एक ही एकता है। यह एकता हर जीवित और निर्जीव चीज में मौजूद है।' उन्होंने बताया कि यही विचार भारत के विश्व दृष्टिकोण की नींव है।

भौतिक प्रगति, लेकिन मूल्यों में कमी

उन्होंने दुनिया की मौजूदा स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि इंसान ने भौतिक रूप से बहुत प्रगति की है, लेकिन मूल्यों के स्तर पर वह पीछे रह गया है।

ज्ञान बढ़ा, लेकिन समझ घटी

दत्तात्रेय होसबोले ने कहा, 'हमारे पास चीजें बढ़ी हैं, लेकिन मूल्य नहीं। हमारे पास ज्यादा ज्ञान है, लेकिन निर्णय लेने की समझ कम है। विशेषज्ञ बढ़े हैं, लेकिन समस्याएं भी बढ़ी हैं।'

आध्यात्मिकता और विकास का संतुलन

भारत के दृष्टिकोण को अलग बताते हुए, उन्होंने कहा कि यहां भौतिक विकास के साथ आध्यात्मिक समझ को भी महत्व दिया जाता है। उन्होंने कहा, 'भारत की सोच प्रकृति को मां मानती है। हमारी जरूरतों के लिए पर्याप्त है, लेकिन लालच के लिए नहीं।'

विविधता को उत्सव के रूप में देखें

विविधता पर बात करते हुए दत्तात्रेय होसबोले ने कहा कि इसे संघर्ष का कारण नहीं, बल्कि उत्सव की तरह देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि विविधता मानव समाज की सुंदरता है। अलग-अलग संस्कृतियों को अपनी पहचान बनाए रखते हुए एकता के साथ जीना चाहिए।

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