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आसमान में मेक इन इंडिया

आसमान में मेक इन इंडिया: कर्नाटक में एच-125 हेलीकॉप्टर निर्माण इकाई का शुभारंभ

पीएम मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने वेमेगल स्थित टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स के एयरबस एच-125 लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर की फाइनल असेंबली लाइन का वर्चुअल उद्घाटन किया।

आसमान में मेक इन इंडिया कर्नाटक में एच-125 हेलीकॉप्टर निर्माण इकाई का शुभारंभ

India–France Boost Defence Ties with H125 Helicopter Assembly Line Launch |

मुंबई। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने मुंबई से वर्चुअल माध्यम से कर्नाटक के वेमेगल स्थित टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स के एयरबस एच-125 लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर की फाइनल असेंबली लाइन का उद्घाटन किया। वर्चुअल उद्घाटन के दौरान फाइनल असेंबली लाइन परिसर में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, फ्रांस की सशस्त्र सेना और वयोवृद्ध मामलों की मंत्री कैथरीन वाउटरिन, केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री केआर नायडू तथा कर्नाटक सरकार के बड़े एवं मध्यम उद्योग मंत्री एमबी पाटिल भी उपस्थित थे।

ऊंचाई वाले मिशनों के लिए तैयार बहुउद्देशीय एच-125 एम

एच-125 एम को कई जरूरी मिशन में ऊंचाई पर प्रभावी फोर्स मल्टीप्लायर के रूप में कार्य करने के लिए अनुकूलित किया गया है। यह बहुउपयोगी प्लेटफॉर्म अपनी कम ध्वनिक और तापीय पहचान का लाभ उठाते हुए सामरिक टोही और निगरानी अभियानों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए डिजाइन किया गया है।  इसके साथ ही, एच-125 एम ऊंचाई पर लॉजिस्टिक्स में निर्णायक बढ़त प्रदान करता है, जिससे दूरस्थ अग्रिम चौकियों तक आवश्यक आपूर्ति सुनिश्चित होती है। साथ ही, यह खोजी एवं बचाव अभियान तथा चिकित्सीय निकासी अभियानों के लिए एक त्वरित प्रतिक्रिया संसाधन के रूप में भी कार्य करता है।

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माउंट एवरेस्ट पर उतरने वाला अनोखा हेलीकॉप्टर

एच-125 इतिहास का एकमात्र ऐसा हेलीकॉप्टर है जो माउंट एवरेस्ट की चोटी पर उतर चुका है, जिससे इसकी प्रदर्शन सीमा मौजूदा लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर बेड़ों से कहीं अधिक बेहतर साबित होती है। भारतीय सेना के लिए, जो दुनिया के सबसे चुनौतीपूर्ण उच्च-ऊंचाई और उच्च-तापमान वातावरण में काम करती है, यह असाधारण प्रदर्शन एक महत्वपूर्ण निर्णायक बढ़त प्रदान कर सकता है। सी-295 सैन्य परिवहन विमान अंतिम असेंबली लाइन के बाद, यह टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स और एयरबस का दूसरा प्रमुख औद्योगिक सहयोग है, जो भारत में एक समग्र सैन्य एयरोस्पेस पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती प्रदान करेगा।

रणनीतिक साझेदारी में महत्वपूर्ण मील का पत्थर: राजनाथ सिंह

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एच-125 हेलीकॉप्टरों की फाइनल असेंबली लाइन को भारत और फ्रांस के बीच रणनीतिक साझेदारी में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया। उन्होंने टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स और एयरबस हेलीकॉप्टर को एच-125 पहल के लिए बधाई दी, जो इससे पहले भारत में सी-295 परिवहन विमान के निर्माण हेतु उनके सहयोग के बाद शुरू किया गया है। रक्षा मंत्री ने इस परियोजना को इस बात का प्रतीक बताया कि किस प्रकार भारत अंतरराष्ट्रीय मूल उपकरण निर्माता(ओईएम) के साथ सहयोग कर मेक-इन-इंडिया विजन में प्रभावी योगदान दे सकता है।

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मेक-इन-इंडिया और आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूत कदम

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस पहल को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की उस प्रतिबद्धता की प्रमुख उपलब्धियों में से एक बताया, जिसके तहत मित्र देशों के साथ परस्पर लाभकारी साझेदारियों के माध्यम से महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों में आत्मनिर्भरता हासिल करने तथा उच्च-स्तरीय उत्पादों और उपकरणों के निर्माण को बढ़ावा दिया जा रहा है।

1000 करोड़ निवेश और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर

राजनाथ सिंह ने बताया कि एच-125 में 1,000 करोड़ रुपए से अधिक का निवेश होने की संभावना है और इससे कुशल एवं मेहनती युवाओं के लिए प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होंगे। उन्होंने एच-125 हेलीकॉप्टरों को उनकी असाधारण विश्वसनीयता, बहु-उपयोगिता और विविध परिचालन परिस्थितियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रसिद्ध मंच बताया। उन्होंने कहा, "एच-125 विश्व स्तर पर सबसे प्रभावी और भरोसेमंद सिंगल-इंजन हेलीकॉप्टरों में से एक साबित हुआ है।"

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रक्षा क्षेत्र में निजी भागीदारी बढ़ाने के सुधारों का असर

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रक्षा औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र में निजी क्षेत्र के योगदान को बढ़ाने के लिए रक्षा मंत्रालय द्वारा किए गए सुधारों का उल्लेख किया। इनमें आयुध कारखानों का निगमितकरण, उदारीकृत निवेश योजनाएं तथा रक्षा औद्योगिक गलियारों की स्थापना शामिल है। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक रूप से भारत का रक्षा उत्पादन कई कारणों, जैसे उच्च पूंजी निवेश की आवश्यकता और लंबी परिपक्वता अवध, के चलते मुख्यतः सार्वजनिक क्षेत्र पर केंद्रित रहा, जिसके परिणामस्वरूप उत्पादन और निर्यात में निजी क्षेत्र का योगदान अपेक्षाकृत कम रहा। उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के परिणामस्वरूप अब कुल रक्षा उत्पादन में निजी क्षेत्र की हिस्सेदारी लगभग एक-चौथाई तक पहुंच गई है, और रक्षा निर्यात में कई गुना वृद्धि हुई है। इससे भारत दुनिया के शीर्ष रक्षा निर्यातक देशों में शामिल हो गया है।

छोटे उद्योगों को प्रोत्साहन और उन्नत स्वदेशी समाधानों पर जोर

रक्षा मंत्री ने कहा कि इस विकास पथ ने MSME और सहायक क्षेत्रों को व्यापक प्रोत्साहन दिया है, जिनकी संख्या आज बढ़कर 16,000 से अधिक हो गई है। उन्होंने यह भी बताया कि वर्तमान में अनेक विदेशी कंपनियां भारतीय MSME से कई चीजें प्राप्त कर रही हैं। उन्होंने कंपनियों से आग्रह किया कि वे सार्थक प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के माध्यम से इस साझेदारी को और मजबूत करें तथा अन्य देशों की सुरक्षा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए उन्नत समाधान भी प्रदान करें।

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