भारतीय सेना ने सोमवार को नेताजी सुभाष यूनिवर्सिटी ऑफ़ टेक्नोलॉजी (NSUT) के साथ सेना के लिए सॉफ्टवेयर और AI-आधारित समाधानों के विकास में सहयोग करने के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किया है।
नई दिल्ली। भारतीय सेना ने सोमवार को नेताजी सुभाष यूनिवर्सिटी ऑफ़ टेक्नोलॉजी (NSUT) के साथ सेना के लिए सॉफ्टवेयर और AI-आधारित समाधानों के विकास में सहयोग करने के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किया है। एडिशनल डायरेक्टरेट जनरल ऑफ़ पब्लिक इन्फॉर्मेशन के अनुसार, NSUT के छात्र और फैकल्टी भारतीय सेना द्वारा चलाए जा रहे लाइव प्रॉब्लम-सॉल्विंग प्रोजेक्ट्स में हिस्सा लेंगे। NSUT फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (FDPs) और भारतीय सेना के लिए खास प्रोग्राम के ज़रिए क्षमता निर्माण में भी मदद करेगा।
NSUT के छात्र और फैकल्टी सेना के लाइव प्रॉब्लम-सॉल्विंग प्रोजेक्ट्स में लेंगे हिस्सा
ADGPI ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में कहा, "भारतीय सेना ने भारतीय सेना के लिए सॉफ्टवेयर और AI-आधारित समाधानों के विकास में सहयोग करने के लिए नेताजी सुभाष यूनिवर्सिटी ऑफ़ टेक्नोलॉजी (NSUT) के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर साइन किए हैं। MoU के तहत, NSUT के छात्र और फैकल्टी भारतीय सेना के लाइव प्रॉब्लम-सॉल्विंग प्रोजेक्ट्स में हिस्सा लेंगे और प्रैक्टिकल अनुभव प्राप्त करेंगे। NSUT फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (FDPs) और भारतीय सेना के लिए खास प्रोग्राम के ज़रिए क्षमता निर्माण में भी मदद करेगा, जिससे स्वदेशी इनोवेशन-आधारित रक्षा तैयारी मज़बूत होगी।"
850 'कामिकेज़' ड्रोन खरीदने की तैयारी, खरीद के एडवांस स्टेज में प्रस्ताव
भारतीय सेना तीनों सेनाओं और विशेष बलों को लैस करने के लिए 850 'कामिकेज़' (kamikaze) ड्रोन खरीदने की तैयारी कर रही है। रक्षा सूत्रों के अनुसार, भारतीय सेना का प्रस्ताव खरीद के एडवांस स्टेज में है। इस महीने के आखिरी हफ्ते में होने वाली रक्षा अधिग्रहण परिषद की एक उच्च-स्तरीय बैठक में इसे जल्द ही मंज़ूरी मिलने की संभावना है।
भारतीय सेना 30,000 और ड्रोन शामिल करने की बना रही योजना
फास्ट-ट्रैक प्रक्रियाओं के तहत लागू होने वाले इस प्रस्ताव के अनुसार, सेना को स्वदेशी स्रोतों से लॉन्चर्स के साथ लगभग 850 'लोइटरिंग म्यूनिशन' (loitering munitions) मिलेंगे। भारतीय सेना पहले से ही बड़ी संख्या में इनका उपयोग कर रही है और निकट भविष्य में अपनी सभी लड़ाकू इकाइयों को तैयार करने के लिए लगभग 30,000 और ड्रोन शामिल करने की योजना बना रही है। सेना की इन्फैंट्री बटालियनों में अब एक Ashni प्लाटून होगी, जो दुश्मन के ठिकानों और उग्रवाद विरोधी अभियानों में इन ड्रोनों के संचालन के लिए जिम्मेदार होगी।
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