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BRICS के साथ भारत का व्यापार घाटा बड़ी चुनौती

BRICS के साथ भारत का व्यापार घाटा बड़ी चुनौती, निर्यात के मुकाबले आयात तेजी से बढ़ा

रिपोर्ट के अनुसार H1 CY2026 में BRICS देशों के साथ भारत का व्यापार घाटा 17.2% बढ़कर करीब 130 अरब डॉलर हो गया। आयात 13.5% बढ़ा, जबकि निर्यात 4.6% बढ़ा।

brics के साथ भारत का व्यापार घाटा बड़ी चुनौती निर्यात के मुकाबले आयात तेजी से बढ़ा

India’s BRICS Trade Deficit May Remain a Major Challenge: Report |

नई दिल्ली (भारत)। BRICS देशों के साथ भारत का व्यापार बढ़ रहा है, लेकिन इसके साथ व्यापार घाटा भी बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। रुबिक्स डेटा साइंसेज की रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 की पहली छमाही में BRICS के अन्य 10 सदस्यों के साथ भारत का वस्तुओं का व्यापार घाटा सालाना आधार पर 17.2 प्रतिशत बढ़कर करीब 130 अरब डॉलर पहुंच गया। इस दौरान भारत का आयात 13.5 प्रतिशत बढ़ा, जबकि निर्यात में सिर्फ 4.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। चीन और रूस भारत के लिए आयात के सबसे बड़े स्रोत रहे। रिपोर्ट ऐसे समय आई है जब भारत 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में 18वें BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने जा रहा है।

130 अरब डॉलर पहुंचा व्यापार घाटा

रिपोर्ट के मुताबिक, H1 CY2026 में अन्य BRICS देशों के साथ भारत का वस्तु व्यापार घाटा सालाना आधार पर 17.2 प्रतिशत बढ़कर करीब 130 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया। एक साल पहले इसी अवधि में यह आंकड़ा 111 अरब अमेरिकी डॉलर था। भारत ने केवल मिस्र और इथियोपिया के साथ व्यापार अधिशेष दर्ज किया, जबकि बाकी आठ BRICS सदस्यों के साथ भारत का व्यापार घाटे में रहा।

आयात में 13.5 प्रतिशत की तेज वृद्धि

बढ़ता व्यापार घाटा मुख्य रूप से आयात में तेज वृद्धि को दर्शाता है। H1 CY2026 में अन्य 10 BRICS देशों से भारत का आयात करीब 178 अरब अमेरिकी डॉलर रहा, जो H1 CY2025 की तुलना में 13.5 प्रतिशत अधिक है। इसके मुकाबले भारत का निर्यात करीब 48 अरब अमेरिकी डॉलर रहा और इसमें 4.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। चीन और रूस भारत के आयात के सबसे बड़े स्रोत रहे, जिनकी हिस्सेदारी क्रमशः 41 प्रतिशत और 20 प्रतिशत रही।

BRICS देशों के साथ कुल व्यापार भी बढ़ा

व्यापार घाटे के बावजूद H1 CY2026 में अन्य BRICS सदस्यों के साथ भारत का कुल वस्तु व्यापार सालाना आधार पर 11.5 प्रतिशत बढ़कर करीब 226 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया। इस समूह में चीन और संयुक्त अरब अमीरात भारत के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार रहे। भारत के कुल BRICS व्यापार में चीन की हिस्सेदारी 37 प्रतिशत और UAE की हिस्सेदारी 20 प्रतिशत रही।

BRICS का कुल व्यापार 5.8 ट्रिलियन डॉलर पहुंचा

रिपोर्ट के अनुसार, H1 CY2026 में 11 सदस्यीय BRICS समूह का कुल वस्तु व्यापार सालाना आधार पर 15.4 प्रतिशत बढ़कर करीब 5.8 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया। इस दौरान समूह का निर्यात 12.5 प्रतिशत बढ़कर 3.2 ट्रिलियन डॉलर और आयात 19.1 प्रतिशत बढ़कर 2.6 ट्रिलियन डॉलर रहा। आयात की रफ्तार निर्यात से अधिक रहने के कारण समूह का व्यापार अधिशेष 660 अरब डॉलर से घटकर 597 अरब डॉलर रह गया।

पश्चिम एशिया संघर्ष के बीच अलग-अलग रुझान

रिपोर्ट में पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच अलग-अलग देशों के व्यापारिक रुझानों में अंतर का भी उल्लेख किया गया है। H1 CY2026 में ईरान का व्यापार 22.8 प्रतिशत और UAE का व्यापार 10 प्रतिशत घटा। वहीं, इसी अवधि में भारत का कुल वस्तु व्यापार करीब 12 प्रतिशत बढ़ा। रिपोर्ट में बदलते क्षेत्रीय हालात के बीच व्यापार के अलग-अलग रुझानों को रेखांकित किया गया है।

वैश्विक व्यापार में BRICS की अहम हिस्सेदारी

रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में वैश्विक वस्तु निर्यात में BRICS की हिस्सेदारी करीब 24 प्रतिशत और आयात में 19 प्रतिशत रही। इस वजह से यह समूह वैश्विक व्यापार के लिए महत्वपूर्ण बना हुआ है। हालांकि, भारत के लिए आयात की तेज रफ्तार एक अहम चुनौती है। रिपोर्ट के मुताबिक, भविष्य में BRICS देशों के भीतर भारत के निर्यात को बढ़ाना एक महत्वपूर्ण प्राथमिकता बनी रह सकती है।

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