अमेरिका द्वारा भारत पर लगाये गये टैरिफ और वैश्विक व्यापार की प्रतिकूल परिस्थिति के बीच देश के रत्न एवं आभूषण निर्यात में जनवरी में सालाना आधार पर 5.79 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गयी है।
मुंबई। अमेरिका द्वारा भारत पर लगाये गये टैरिफ और वैश्विक व्यापार की प्रतिकूल परिस्थिति के बीच देश के रत्न एवं आभूषण निर्यात में जनवरी में सालाना आधार पर 5.79 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गयी है। इस दौरान देश का निर्यात घटकर 223.85 करोड़ डॉलर रह गया है। भारत अमेरिका में ट्रेड डील को अंतिम रूप दिये जाने के बाद आने वाले समय में इसमें सुधार की उम्मीद है।
रत्न और आभूषण निर्यात में सालाना आधार पर 5.79 प्रतिशत की गिरावट
जेम एंड ज्वैलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (जीजेईपीसी) ने बताया कि अमेरिका व अन्य प्रमुख बाजारों में टैरिफ संबंधी दबावों और व्यापार संबंधी वैश्विक चुनौतियों के कारण जनवरी में भारत के रत्न और आभूषण निर्यात में सालाना आधार पर 5.79 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 2,238.54 मिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया। बयान के मुताबिक जनवरी 2025 में कुल निर्यात पिछले वर्ष की इसी अवधि के समान 2,376.02 मिलियन अमेरिकी डॉलर रहा था।
अमेरिका को होने वाली शिपमेंट में आई भारी कमी
हालांकि, अप्रैल 2025 से जनवरी 2026 की अवधि के दौरान कुल निर्यात स्थिर रहा, जिसमें पिछले वर्ष की इसी अवधि के 23,334.73 मिलियन अमेरिकी डॉलर की तुलना में 0.64 प्रतिशत की मामूली गिरावट दर्ज की गई और यह 23,185.87 मिलियन अमेरिकी डॉलर रहा। निर्यात में गिरावट का प्रमुख कारण अमेरिका को होने वाली शिपमेंट में आई भारी कमी है। अमेरिका भारत का सबसे बड़ा रत्न और आभूषण आयातक है, जहां उच्च टैरिफ और मूल्य संबंधी नुकसान के कारण निर्यात में 45 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई है।
भारत ने अपने निर्यात बाजारों में किया विस्तार लाने का प्रयास
अंतर्राष्ट्रीय चुनौतियों को देखते हुए भारत ने अपने निर्यात बाजारों में विस्तार लाने का प्रयास किया है। इस वजह से अप्रैल 2025 से जनवरी 2026 के दौरान, संयुक्त अरब अमीरात को निर्यात में 23.71 प्रतिशत की वृद्धि हुई, हांगकांग में 33.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि ऑस्ट्रेलिया और फ्रांस ने 36 प्रतिशत से अधिक की मजबूत वृद्धि दर्ज की। इसके अलावा बेल्जियम, थाईलैंड और इज़राइल जैसे अन्य बाजारों में भी दोहरे अंकों की वृद्धि दर्ज की गई, जो भारत की बढ़ती वैश्विक उपस्थिति और बदलते व्यापारिक परिदृश्यों के अनुकूल होने की उद्योग की क्षमता को प्रदर्शित करता है।
भारत की वैश्विक उपस्थिति मजबूत
जीजेईपीसी के अध्यक्ष किरित भंसाली ने बताया कि "भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के ढांचे की घोषणा से बहुत जरूरी राहत मिली है, जिसमें आभूषणों पर संशोधित 18 प्रतिशत टैरिफ और हीरे और रंगीन रत्नों पर शून्य शुल्क शामिल है, जो हीरे, रंगीन रत्नों और जड़े हुए सोने के आभूषणों के क्षेत्र में भारत को प्रमुख प्रतिस्पर्धियों पर संरचनात्मक रूप से बेहतर स्थिति में रखेगा।" उन्होंने कहा कि इस लाभ से भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में खोई हुई पकड़ वापस पाने और व्यापार को फिर से स्थापित करने में मदद मिलने की उम्मीद है, जिससे निकट भविष्य में संभावित रूप से 3 अरब अमेरिकी डॉलर तक का इजाफा हो सकता है।
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