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भारत के विकास को मिलेगी नई रफ्तार

भारत में इन्फ्रास्ट्रक्चर निवेश में जबरदस्त उछाल की उम्मीद

क्रिसिल रेटिंग्स की एक ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, भारत के प्रमुख बुनियादी ढांचा (इन्फ्रास्ट्रक्चर) क्षेत्रों में निवेश चालू और अगले वित्त वर्ष के दौरान 45-50 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी के साथ बढ़ने की उम्मीद

भारत में इन्फ्रास्ट्रक्चर निवेश में जबरदस्त उछाल की उम्मीद

फाइल फोटो |

मुंबई (महाराष्ट्र)। क्रिसिल रेटिंग्स की एक ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, भारत के प्रमुख बुनियादी ढांचा (इन्फ्रास्ट्रक्चर) क्षेत्रों में निवेश चालू और अगले वित्त वर्ष के दौरान 45-50 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी के साथ बढ़ने की उम्मीद है। मजबूत सरकारी नीतियों और घरेलू मांग के चलते इन क्षेत्रों में निवेश का स्तर लगभग 23-24 लाख करोड़ रुपये तक पहुँच सकता है। इन प्रमुख क्षेत्रों में नवीकरणीय ऊर्जा (रिन्यूएबल्स), सड़कें, रियल एस्टेट और डेटा सेंटर जैसे नए ज़माने के क्षेत्र शामिल हैं, जो भारत के कुल बुनियादी ढांचा निवेश का लगभग आधा हिस्सा हैं और देश की जीडीपी वृद्धि को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

तेजी बनी रहेगी, लेकिन वैश्विक तनाव से महंगाई का खतरा

क्रिसिल रेटिंग्स के मुख्य रेटिंग अधिकारी कृष्णन सीतारामन ने बताया कि निवेश की यह वृद्धि दर अगले दो वर्षों तक बरकरार रहने की संभावना है। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि पश्चिमी एशिया में चल रहे संघर्ष का इन क्षेत्रों पर कोई सीधा असर तो नहीं पड़ेगा, लेकिन यदि यह तनाव लंबे समय तक खिंचता है, तो परोक्ष रूप से मुद्रास्फीति (महंगाई) का दबाव देखने को मिल सकता है।

रिन्यूएबल और डेटा सेंटर सेक्टर में तेज विस्तार की संभावना

नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में रिपोर्ट में कहा गया है कि मजबूत प्रोजेक्ट पाइपलाइन और सरकारी समर्थन के कारण सालाना 50-55 गीगावाट (GW) क्षमता जोड़े जाने की उम्मीद है। इसके साथ ही, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्लाउड सेवाओं के बढ़ते चलन के कारण डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर में भी तेजी आएगी। वित्त वर्ष 2028 तक डेटा सेंटर की क्षमता में सालाना 35-40 प्रतिशत की वृद्धि देखी जा सकती है।

कुछ जोखिम बरकरार, लेकिन कंपनियों की वित्तीय स्थिति मजबूत

हालांकि, रिपोर्ट में कुछ संभावित जोखिमों का भी ज़िक्र किया गया है। इनमें नवीकरणीय ऊर्जा की खरीद में देरी, सड़क परियोजनाओं के आवंटन में सुस्ती और आवासीय रियल एस्टेट में बिना बिके मकानों की बढ़ती संख्या शामिल है। इन चुनौतियों के बावजूद, क्रिसिल का मानना है कि इस क्षेत्र की कंपनियां वित्तीय रूप से मज़बूत हैं। डिप्टी मुख्य रेटिंग अधिकारी मनीष गुप्ता के अनुसार, स्थापित कंपनियों का ट्रैक रिकॉर्ड और उनकी मज़बूत क्रेडिट प्रोफाइल उन्हें इन बाधाओं से निपटने में मदद करेगी।

संतुलित फंडिंग और समय पर प्रोजेक्ट पूरे करना होगा जरूरी

रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि इन क्षेत्रों में लगभग 15-20 प्रतिशत निवेश इक्विटी के माध्यम से होगा, जबकि नए उभरते क्षेत्रों को उनकी परिपक्वता के आधार पर अधिक शुरुआती पूंजी की आवश्यकता हो सकती है। कुल मिलाकर, वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच बुनियादी ढांचे में निवेश की इस रफ्तार को बनाए रखने के लिए समय पर काम पूरा करना और समझदारी भरा वित्तीय प्रबंधन सबसे महत्वपूर्ण होगा।

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