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भारत का दवा निर्यात 28 अरब डॉलर पार

वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत का दवा निर्यात 28 अरब डॉलर के पार हुआ

अमेरिका के भारी भरकम टैरिफ और वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत के दवा निर्यात में पिछले वित्त वर्ष के दौरान उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज हुई है।

वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत का दवा निर्यात 28 अरब डॉलर के पार हुआ

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हैदराबाद। अमेरिका के भारी भरकम टैरिफ और वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत के दवा निर्यात में पिछले वित्त वर्ष के दौरान उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज हुई है। भारत का दवा निर्यात पिछले वित्त वर्ष के फरवरी तक सालाना आधार पर पांच प्रतिशत की वृद्धि के साथ 28 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक रहा।

अमेरिकी टैरिफ का सीमित असर

अमेरिका के 100% टैरिफ के दबाव के बावजूद, भारत का फार्मा निर्यात 2024-25 में 9.4% की वृद्धि के साथ 30.47 अरब डॉलर तक पहुंच गया।

जेनेरिक दवाओं ने संभाली स्थिति

अमेरिका को होने वाला निर्यात, जिसमें 90% से अधिक जेनेरिक दवाएं हैं, स्थिर बना हुआ है, जबकि कुल फार्मा निर्यात 2025-26 (फरवरी तक) में 5.6% बढ़कर 28.29 अरब डॉलर हो गया।

भविष्य में तेज विस्तार की उम्मीद

भारतीय दवा निर्यात संवर्धन परिषद के महानिदेशक के राजा भानु ने यह जानकारी देते हुए बताया कि वर्तमान में लगभग 60 अरब डॉलर वाले इस क्षेत्र के 2030 तक बढ़कर 130 अरब अमेरिकी डॉलर होने का अनुमान है।

चिंतन शिविर में रखी गई रणनीति

उन्होंने 'चिंतन शिविरः औषधि निर्यात में वृद्धि' के उद्घाटन सत्र में कहा, "वैश्विक चुनौतियों के बावजूद दवा निर्यात ने अपनी वृद्धि की गति बनाए रखी है। वित्त वर्ष 2025-26 की अप्रैल से फरवरी अवधि के दौरान निर्यात 28.29 अरब डॉलर रहा, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 5.6 प्रतिशत अधिक है।"

विविध उत्पादों का योगदान

इस वृद्धि में तैयार दवाएं, जैविक उत्पाद, टीके और आयुष उत्पादों का प्रमुख योगदान रहा।

पिछले वर्ष भी रहा मजबूत प्रदर्शन

राजा भानु ने बताया कि वित्त वर्ष 2024-25 में दवा निर्यात 30.47 अरब डॉलर रहा, जो सालाना आधार पर 9.4 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है।

2030 तक बड़ा लक्ष्य निर्धारित

भविष्य की योजना के बारे में भानु ने कहा कि वर्ष 2030 तक 65 अरब डॉलर के निर्यात का लक्ष्य रखा गया है।

नए बाजारों पर फोकस जरूरी

इसके लिए नीतियों को प्राथमिकता देना, पारंपरिक बाजारों से आगे नए बाजारों में विस्तार करना, विदेशी निवेश बढ़ाना और नियमों की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाना आवश्यक होगा।

वैश्विक स्तर पर मजबूत स्थिति

उन्होंने बताया कि दवा उत्पादन के मामले में भारत विश्व में तीसरे स्थान पर है और उसका निर्यात 200 से अधिक देशों तक पहुंचता है।

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