सोशल मीडिया पर हाल में AI जनरेटेड और डीप फेक कंटेंट की आयी बाढ़ को देखते हुए केन्द्र सरकार अब इसपर लगाम लगाने की तैयारी में जुट गयी है।
AI और डीप फेक कंटेंट पर लगाम के लिए कानून की तैयारी, मसौदा जारी
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय बनाएगा नया कानून
नई दिल्ली।
सोशल मीडिया पर हाल में "AI जनरेटेड और डीप फेक" कंटेंट की आयी बाढ़ को देखते हुए केन्द्र सरकार अब इसपर लगाम लगाने की तैयारी में जुट गयी है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई से तैयार कंटेंट को नियमित करने सहित कई और चीजों में बदलाव के लिए केंद्र सरकार का इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय नए कानून बनाने जा रहा है।
मंत्रालय ने आईटी कानून 2021 में कुछ बदलावों का मसौदा जारी किया है। "डीपफेक" और "एआई" से बने कंटेंट की पहचान करने और उसको प्रसारित करने वालों का पता लगाने के लिए इसमें कई प्रावधान किए गए हैं। इसमें प्रावधान किया गया है कि एआई से तैयार किए जाने वाले कंटेंट के बारे में साफ साफ बताना होगा, उस पर लिखना होगा कि कंटेंट असली नहीं, एआई से बना हुआ है। इससे इससे झूठी बातें प्रचारित करने, किसी के बारे में अफवाह फैलाने, गलत धारणा बनाने और चुनावी धांधली जैसी समस्याओं पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि इंटरनेट को ओपन, सेफ, विश्वसनीय और जवाबदेह रखने के लिए ये जरूरी है।
इलेक्ट्रोनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने सभी संबंधित पक्षों से फीडबैक मांगा है। इसे छह नवंबर तक ईमेल पर भेजा जा सकता है। इसमें यह प्रावधान किया गया है कि जो भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एआई कंटेंट बनाने देगा और उसे शेयर करने देगा, उसे हर ऐसे कंटेंट पर बहुत प्रमुखता से लेबल लगाना होगा। उसे स्थायी रूप से यूनिक मेटाडेटा आइडेंटिफायर एम्बेड भी करना पड़ेगा। इसका मतलब है कि ऐसी पहचान बतानी होगी, जिससे यह पता चले कि कंटेंट कहां से जेनरेट किया गया है।
केन्द्रीय IT मंत्रालय ने गैरकानूनी सोशल मीडिया कंटेट हटाने वाले नियमों में संशोधन किया है। इसके तहत अब जॉइंट सेक्रेटरी से ऊपर के अधिकारी ही सोशल मीडिया मंचो को कंटेंट हटाने का नोटिस भेज सकते है। यह संशोधन 1 नवंबर से लागू होगा।