अमरिका, इजराइल - ईरान युद्ध और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जारी अनिश्चितता के कारण भारतीय रुपया पूरे मार्च महीने में अस्थिर रह सकता है।
नई दिल्ली। अमरिका, इजराइल - ईरान युद्ध और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जारी अनिश्चितता के कारण भारतीय रुपया पूरे मार्च महीने में अस्थिर रह सकता है। इसके साथ ही कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और विदेशी फंडों की निकासी की वजह से भी डॉलर की मांग बढ़ सकती है। इन कारणों से भी रुपये पर दबाव पड़ेगा और रुपये में कमजोरी का दायरा बढ़ सकता है। इजराइल-ईरान युद्ध भारत से हजारों किलोमीटर दूर हो रहा है। लेकिन इसकी आंच में भारतीय अर्थव्यवस्था भी बुरी तरह झुलस रही है। इस साल फरवरी के अंत में ईरान-इजराइल युद्ध शुरू होने के बाद से रुपया पहले ही 92 रुपये प्रति डॉलर के निशान से नीचे गिर चुका है।
मार्च महीने में और झटके लगने के आसार
मिडिल ईस्ट संघर्ष बढ़ने पर तेल के दाम बढ़ सकते हैं, जिससे भारत का आयात बिल बढ़ेगा और रुपया कमजोर होगा। यूनियन बैंक आफ इंडिया ने एक रिपोर्ट में कहा है कि पूरे मार्च महीने के दौरान भारतीय रुपये के अस्थिर रहने की संभावना है। इसका कारण यह है कि भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आर्थिक कारक मुद्रा पर दबाव बनाए रखेंगे। 13 मार्च को ही भारतीय मुद्रा ने 92.48 रुपया प्रति डॉलर का एतिहासिक निचला स्तर छुआ था, जो मुद्रा बाजार पर वैश्विक और घरेलू घटनाक्रमों के प्रभाव को दर्शाता है।
महंगा कच्चा तेल और बिगड़ता व्यापार घाटा
रिपोर्ट में कहा गया है कि पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव रुपया के दृष्टिकोण के लिए एक प्रमुख जोखिम बना हुआ है। इस क्षेत्र में बढ़ता संघर्ष वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति मार्गों में संभावित व्यवधानों के बारे में चिंताओं को बढ़ा रहा है, जिससे कच्चे तेल की कीमतें बढ़ गई हैं। भारत एक प्रमुख तेल आयातक है और ऐसे झटकों के प्रति संवेदनशील बना है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें देश के व्यापार घाटे और चालू खाता घाटे को बढ़ा सकती हैं।
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