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ईरान युद्ध बीच रूस ने रोका उर्वरक निर्यात

ईरान युद्ध के बीच रूस ने उर्वरक निर्यात पर लगायी रोक

नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध का असर अब सिर्फ तेल और गैस तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उर्वरकों की आपूर्ति पर भी दिखने लगा है।

ईरान युद्ध के बीच रूस ने उर्वरक निर्यात पर लगायी रोक

Iran Conflict |

नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध का असर अब सिर्फ तेल और गैस तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उर्वरकों की आपूर्ति पर भी दिखने लगा है। वैश्विक तनाव के बीच Russia ने घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता देते हुए एक महीने के लिए खाद के निर्यात पर रोक लगा दी है। China ने भी इसी तरह का कदम उठाया है, जिससे वैश्विक उर्वरक बाजार में हलचल बढ़ गई है।

वैश्विक बाजार में बढ़ी चिंता

रूस और चीन के फैसलों ने उन देशों की चिंता बढ़ा दी है, जो उर्वरकों के लिए आयात पर निर्भर हैं। भारत भी इनमें शामिल है, जहां खाद की कमी और कीमतों में बढ़ोतरी का खतरा मंडरा रहा है।

भारत की निर्भरता बढ़ा रही चिंता

भारत अपनी कुल उर्वरक जरूरतों का लगभग 33% हिस्सा रूस से आयात करता है। देश में सबसे ज्यादा मांग यूरिया की रहती है और हर बुआई सीजन में इसकी कमी चर्चा में रहती है।

होर्मुज जलडमरूमध्य बना बड़ी चुनौती

Strait of Hormuz में बढ़ते तनाव के कारण खाड़ी देशों से उर्वरकों की शिपिंग प्रभावित हो रही है। इससे भारत की आपूर्ति व्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है।

एलएनजी पर निर्भर उत्पादन

भारत में यूरिया उत्पादन मुख्य रूप से एलएनजी पर आधारित है। देश अपने एलएनजी आयात का बड़ा हिस्सा Qatar सहित खाड़ी देशों से मंगाता है। यदि शिपिंग बाधित होती है, तो उत्पादन पर असर पड़ सकता है।

अन्य उर्वरकों पर भी संकट

यूरिया के अलावा पोटाश और डीएपी की आपूर्ति भी प्रभावित हो सकती है। पोटाश के लिए भारत लगभग पूरी तरह आयात पर निर्भर है, जबकि डीएपी के लिए जरूरी कच्चा माल भी विदेशों से आता है।

कीमतों में बढ़ोतरी तय

हालांकि सप्लाई पूरी तरह रुकने की संभावना कम है, लेकिन शिपिंग लागत, बीमा और वैकल्पिक मार्गों के कारण कीमतों में बढ़ोतरी लगभग तय मानी जा रही है।

लंबा चला युद्ध तो बढ़ेगी मुश्किल

Iran, Israel और United States के बीच जारी तनाव अगर लंबा खिंचता है, तो इसका असर खेती और खाद्य उत्पादन पर भी पड़ेगा।

सरकार का भरोसा, लेकिन खतरा बरकरार

सरकार का कहना है कि खरीफ सीजन के लिए फिलहाल पर्याप्त भंडार मौजूद है। लेकिन अगर संकट लंबे समय तक जारी रहा, तो महंगे आयात और बढ़ती सब्सिडी सरकार और किसानों दोनों के लिए चुनौती बन सकती है

आत्मनिर्भरता पर जोर जरूरी

यह संकट दिखाता है कि भारत को उर्वरक क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने, वैकल्पिक स्रोत तलाशने और दीर्घकालिक रणनीति बनाने की जरूरत है, ताकि भविष्य में ऐसे हालात से बेहतर तरीके से निपटा जा सके।

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https://www.primenewsnetwork.in/world/hormuz-situation-now-permanent-says-iran-navy/154886

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