जयराम रमेश ने केंद्र से पूछा कि क्या सामाजिक कल्याण योजनाओं के लिए आधार की जगह वोटर आईडी लाना मोदी सरकार की आधिकारिक नीति है।
नई दिल्ली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद जयराम रमेश ने केंद्र सरकार पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने गुरुवार को सवाल उठाया कि क्या सामाजिक कल्याण योजनाओं के लाभार्थियों की पहचान के लिए आधार की जगह वोटर आईडी कार्ड का इस्तेमाल करने का प्रस्ताव सरकार की आधिकारिक नीति बन गया है। रमेश ने इस मामले पर सरकार से स्पष्टीकरण की मांग की है।
सोशल मीडिया पर उठे तीखे सवाल
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा करते हुए जयराम रमेश ने कहा कि केंद्रीय पंचायती राज मंत्री ने पिछले कुछ दिनों में दो बार यह बयान दिया है कि सामाजिक कल्याण योजनाओं के लाभार्थियों की पहचान में आधार की जगह वोटर आईडी का उपयोग किया जाएगा। रमेश ने कड़े शब्दों में पूछा कि क्या सरकार ने औपचारिक रूप से इस प्रस्ताव को अपनी नीति के रूप में अपना लिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर ऐसा है, तो इसका स्पष्ट अर्थ यह होगा कि आधार का उपयोग अब उस मूल उद्देश्य के लिए नहीं किया जाएगा जिसके लिए इसे परिकल्पित किया गया था।
योजनाओं के लाभ से वंचित होने की आशंका
कांग्रेस नेता ने सामाजिक कल्याण और सुरक्षा योजनाओं के क्रियान्वयन में आधार के इस्तेमाल को लेकर भी गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने आरोप लगाया कि आधार के मौजूदा क्रियान्वयन के कारण पहले ही देश के लाखों गरीब लोग इन कल्याणकारी योजनाओं के लाभ से वंचित हो चुके हैं। इसके साथ ही उन्होंने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर (SIR) का हवाला देते हुए अंदेशा जताया कि यदि इसे लाभार्थियों की पहचान का आधार बनाया गया, तो बड़े पैमाने पर और भी अधिक लोग सरकारी योजनाओं के दायरे से बाहर हो जाएंगे।
हक-हकूक की चोरी का गंभीर आरोप
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए जयराम रमेश ने इस पूरे घटनाक्रम को कांग्रेस पार्टी द्वारा चुनावी प्रक्रियाओं और नागरिकों के अधिकारों को लेकर उठाए जा रहे मुद्दों से जोड़ा। उन्होंने दावा किया कि नागरिकों को उनके वैध अधिकारों से वंचित करना एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए उन्होंने लिखा, "वोटर चोरी तो सिर्फ एक ट्रेलर है, पूरी पिक्चर तो हक-हकूक की चोरी है।" कांग्रेस नेता की यह टिप्पणी केंद्रीय मंत्री के उस हालिया बयान के बाद सामने आई है जिसमें उन्होंने लाभार्थियों की पहचान के लिए आधार के स्थान पर वोटर आईडी के इस्तेमाल का प्रस्ताव दिया था।
(इनपुट: ANI)
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