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कारगिल विजय दिवस 2026

कारगिल विजय दिवस 2026: द्रास में शहीदों को श्रद्धांजलि, वीर परिवारों ने साझा किए गर्व और बलिदान के भाव

कारगिल विजय दिवस पर द्रास में शहीदों को नमन। युद्ध नायकों के परिजनों ने साझा किए गर्व और बलिदान के जज्बात, देखें पूरी खबर।

कारगिल विजय दिवस 2026 द्रास में शहीदों को श्रद्धांजलि वीर परिवारों ने साझा किए गर्व और बलिदान के भाव

Kargil Heroes Remembered as Families Pay Tribute in Dras |

द्रास (लद्दाख)। भारत 26 जुलाई को 27वां कारगिल विजय दिवस मनाने की तैयारी में है। इस अवसर पर कारगिल युद्ध के नायकों के परिवारों ने द्रास में शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि दी, उनके बलिदान को याद किया और उनकी विरासत पर गर्व जताया।

शहीद लांस नायक मोहम्मद असलम के बेटे ने जताया गर्व

कारगिल युद्ध में ड्यूटी के दौरान शहीद हुए बहादुर लांस नायक मोहम्मद असलम के बेटे मोहम्मद अफजल ने बताया कि उनका परिवार हर साल कारगिल विजय दिवस मनाने के लिए द्रास आता है। उन्होंने कहा, "मेरे पिता, लांस नायक मोहम्मद असलम, 1999 में कारगिल युद्ध में शहीद हुए थे। हम हर साल विजय दिवस मनाने के लिए यहां आते हैं। यह हमारे लिए गर्व का पल है।

पिता की विरासत से प्रेरित होकर सेना में जाने की इच्छा

अफजल ने आगे कहा, "मुझे अपने पिता की ज़्यादा यादें नहीं हैं, लेकिन मैंने अपनी मां, परिवार और सेना से इन कार्यक्रमों के दौरान उनके बारे में बहुत कुछ सुना है। मुझे उन पर बहुत गर्व है।" अफजल ने भारतीय सेना में शामिल होकर देश की सेवा करने की इच्छा भी व्यक्त की। उन्होंने कहा, "मैं अपने देश के लिए जो कुछ भी कर सकता हूं, करूंगा। अगर मुझे मौका मिला, तो मैं निश्चित रूप से सेवा करूंगा।"

शहीद धर्मवीर सिंह की पत्नी ने याद किए वीरता के पल

17 जाट रेजिमेंट के बहादुर सैनिक धर्मवीर सिंह की पत्नी विद्या देवी ने कहा कि उस जगह पर आना जहां उनके पति लड़े थे, उन्हें अपने निजी नुकसान के बावजूद गर्व से भर देता है। उन्होंने कहा, "मेरे पति कारगिल में थे और 1999 में शहीद हो गए थे। वे सेना में थे - 17 जाट रेजिमेंट के शहीद धर्मवीर। आज यहां आकर मुझे बहुत गर्व महसूस हो रहा है। मेरे पति इस देश के नायक थे। जब मैं इन पहाड़ों को देखती हूं और उनकी बहादुरी को याद करती हूं, तो यह बात मेरे दिल में गहराई तक महसूस होती है।

बलिदान के दर्द के बीच देश पर गर्व की भावना

विद्या देवी ने आगे कहा, "वे एक सच्चे नायक हैं। मैं उनके साहस को सलाम करती हूं। भले ही मैंने उन्हें खो दिया, लेकिन मुझे गर्व है कि उन्होंने देश के लिए इतना बड़ा बलिदान दिया।" उन्होंने आगे कहा, "उस समय हमारे पास फोन नहीं थे। हम चिट्ठियों के जरिए बातचीत करते थे, जिन्हें पहुंचने में महीनों लग जाते थे। लेकिन वे आज भी इस देश के नायक हैं।"
​(भाषांतर: Ravi Pandey । इनपुट: ANI)

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