दिल्ली-एनसीआर और लखनऊ के राज्य राजधानी क्षेत्र (एससीआर) की तर्ज पर अब वाराणसी के समीपवर्ती जिलों को मिलाकर काशी-विंध्य क्षेत्र (केवीआर) बनाया जाएगा।
वाराणसी के आसपास बनेगा काशी-विंध्य क्षेत्र
दिल्ली-एनसीआर और लखनऊ के राज्य राजधानी क्षेत्र (एससीआर) की तर्ज पर अब वाराणसी के समीपवर्ती जिलों को मिलाकर काशी-विंध्य क्षेत्र (केवीआर) बनाया जाएगा। योगी सरकार की कैबिनेट ने इसके गठन को मंजूरी दे दी है।
कैबिनेट बैठक में मिली मंजूरी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव को हरी झंडी दी गई। सरकार का मानना है कि वाराणसी और उसके आसपास के जिलों का सुनियोजित विकास करने के लिए यह कदम जरूरी है।
सात जिले होंगे शामिल
कैबिनेट से मंजूर प्रस्ताव के अनुसार केवीआर में वाराणसी और विंध्याचल मंडल के कुल सात जिले शामिल होंगे— वाराणसी, जौनपुर, चंदौली, गाजीपुर, मिर्जापुर, भदोही और सोनभद्र।
आर्थिक गतिविधियों का बनेगा नया जोन
इन सभी जिलों को मिलाकर एक बड़ा आर्थिक गतिविधि क्षेत्र विकसित किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि इस क्षेत्र में उद्योग, व्यापार और निवेश को बढ़ावा मिले।
विकास और रोजगार पर फोकस
केवीआर के गठन से पूर्वांचल के इन जिलों में विकास की रफ्तार तेज होगी। साथ ही रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। इस क्षेत्र की आबादी करीब दो करोड़ बताई जा रही है।
बेहतर नागरिक सुविधाएं मिलेंगी
सरकार का कहना है कि केवीआर बनने के बाद क्षेत्र में रहने वाले लोगों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इससे क्षेत्रीय विकास को मजबूती मिलेगी।
प्रशासनिक ढांचा तय
केवीआर की कार्यकारी समिति के अध्यक्ष मुख्यमंत्री होंगे। प्रमुख सचिव, आवास को मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) बनाया जाएगा। वाराणसी के मंडलायुक्त सदस्य सचिव होंगे, जबकि विंध्याचल मंडल के कमिश्नर सदस्य के रूप में शामिल रहेंगे।
सरकार पर नहीं पड़ेगा अतिरिक्त बोझ
प्रस्ताव के मुताबिक केवीआर के विकास से राज्य सरकार पर कोई अतिरिक्त आर्थिक भार नहीं आएगा, जबकि क्षेत्र को बड़े स्तर पर विकास का लाभ मिलेगा।
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