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मिडिल ईस्ट तनाव से आर्थिक वृद्धि धीमी

मिडिल ईस्ट तनाव : आर्थिक वृद्धि की धीमी रह सकती है रफ्तार

पश्चिम एशिया में जारी तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि की वजह से देश की आर्थिक वृद्धि की रफ्तार धीमी रह सकती है। वित्त मंत्रालय ने मार्च 2026 की अपनी मंथली इकोनॉमिक रिव्यू रिपोर्ट जारी करते हुए

मिडिल ईस्ट तनाव  आर्थिक वृद्धि की धीमी रह सकती है रफ्तार

Middle East Tension |

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि की वजह से देश की आर्थिक वृद्धि की रफ्तार धीमी रह सकती है। वित्त मंत्रालय ने मार्च 2026 की अपनी मंथली इकोनॉमिक रिव्यू रिपोर्ट जारी करते हुए यह संभावना जतायी है। वित्त मंत्रालय ने समीक्षा रिपोर्ट में लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ने और आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) बाधित होने से इससे देश में मुद्रास्फीति (महंगाई) बढ़ने की प्रबल आशंका भी जतायी है।

तेल महंगा, बढ़ी उत्पादन लागत

वित्त मंत्रालय ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि ग्लोबल मार्केट में तेल की कीमतें बढ़ने से देश में कंपनियों की उत्पादन लागत बढ़ गई है। इसके साथ ही समुद्री रास्तों में तनाव की वजह से माल ढुलाई का किराया और इंश्योरेंस प्रीमियम महंगा हो गया है। जरूरी इनपुट्स की सप्लाई में देरी होने से मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर असर पड़ रहा है। इस वजह से देश की आर्थिक विकास दर यानी GDP ग्रोथ पर भी असर पड़ सकता है। वित्त मंत्रालय ने स्थिति को लेकर सतर्क रहने और कदम उठाने का सुझाव दिया है।

GDP ग्रोथ अनुमान पर दबाव

वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि आर्थिक विकास दर के अनुमान पर भी दबाव बन सकता है। पहले जहां FY27 के लिए 7.0 फीसदी से 7.4 फीसदी ग्रोथ का अनुमान लगाया गया था, अब इसमें गिरावट का खतरा जताया गया है। बढ़ती लागत और सप्लाई में रुकावट के कारण उद्योगों की उत्पादन क्षमता प्रभावित हो सकती है, जिससे विकास की रफ्तार धीमी पड़ सकती है।

कुछ हफ्तों में सुस्त हुई रफ्तार

वित्त मंत्रालय ने अपनी ताजा रिपोर्ट में माना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार कुछ हफ्तों में धीमी हुई है। इसकी सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया में चल रहा तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें हैं। मंत्रालय ने माना है कि इन बाहरी झटकों की वजह से देश के अंदर इनपुट कॉस्ट यानी प्रोडक्शन की लागत बढ़ गई है।

महंगाई बढ़ने का खतरा बरकरार

मंत्रालय की रिपोर्ट में आने वाले दिनों में रिटेल महंगाई में भी उछाल की संभावना जतायी है। रिपोर्ट के अनुसार अभी तक महंगाई बढ़ने की मुख्य वजह खाद्य पदार्थों की कीमतें थीं, लेकिन मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि कच्चे तेल की बढ़ी हुई कीमतों का पूरा असर अभी तक घरेलू बाजार में नहीं दिखा है। अगर वैश्विक स्तर पर एनर्जी की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो आने वाले दिनों में महंगाई और बढ़ सकती है। यह अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा रिस्क है। पिछले महीने फरवरी में रिटेल महंगाई बढ़कर 3.21% पर पहुंच गई थी।

फरवरी तक मजबूत थी अर्थव्यवस्था

वित्त मंत्रालय की रिपोर्ट में कहा गया है कि फरवरी 2026 तक भारतीय इकोनॉमी काफी मजबूत स्थिति में थी। डोमेस्टिक डिमांड, इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार और सरकारी नीतियों की मदद से सप्लाई और डिमांड दोनों मोर्चों पर प्रदर्शन अच्छा रहा था। मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर में बढ़त बनी हुई थी, वहीं गाड़ियों की बिक्री और डिजिटल पेमेंट्स (UPI) में भी लगातार ग्रोथ दर्ज की गई थी।

मार्च में बदले ग्लोबल हालात

मंत्रालय के अनुसार, मार्च 2026 से ग्लोबल हालात बदलने लगे। वेस्ट एशिया में तनाव बढ़ने से एनर्जी मार्केट और लॉजिस्टिक्स (माल ढुलाई) बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। इसका सीधा असर भारत के प्रोडक्शन सेक्टर पर पड़ा है।

इकोनॉमी के संकेतक भी हुए कमजोर

रिपोर्ट में ई-वे बिल जनरेशन में आई कमी और फ्लैश PMI (परचेज मैनेजर इंडेक्स) के कमजोर आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा गया है कि महीने-दर महीने आधार पर इकोनॉमी की रफ्तार थोड़ी धीमी हुई है।

डिमांड बनी, लेकिन ग्रामीण चिंता

राहत की बात यह है कि देश में घरेलू मांग अभी भी बनी हुई है। व्हीकल रजिस्ट्रेशन और डिजिटल ट्रांजैक्शन के आंकड़े बता रहे हैं कि लोग खरीदारी कर रहे हैं। हालांकि, रिपोर्ट में चेतावनी भी जारी की है। मंत्रालय ने कहा है कि ग्रामीण इलाकों में सेंटीमेंट थोड़ा कमजोर हुआ है। मांग और सप्लाई के बीच यह अंतर बताता है कि फिलहाल सुस्ती कंजम्पशन की कमी से नहीं, बल्कि बढ़ती लागत और सप्लाई में रुकावटों की वजह से है।

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