मोदी सरकार की उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजनाओं का सकारात्मक परिणाम सामने आने लगा है। इस योजना की वजह से भारत एक बड़े इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादक और निर्यातक के रूप में उभरा है।
नई दिल्ली। मोदी सरकार की उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजनाओं का सकारात्मक परिणाम सामने आने लगा है। इस योजना की वजह से भारत एक बड़े इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादक और निर्यातक के रूप में उभरा है। खासकर मोबाइल फोन के क्षेत्र में, जहाँ उत्पादन और निर्यात दोनों सेक्टर में कई गुना वृद्धि देखी गई है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष के पहले आठ महीनों (अप्रैल-नवंबर 2025) में देश का इलेक्ट्रानिक्स निर्यात करीब 38 प्रतिशत बढ़ा है। इस दौरान 31 अरब डालर के उत्पादों का निर्यात किया गया है।
'मेक इन इंडिया' और PLI योजना से इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र को हुआ सबसे ज्यादा फ़ायदा
'मेक इन इंडिया' और उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (PLI) योजना से भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र को सबसे ज्यादा फ़ायदा हुआ है। इस योजना से भारत एक बड़े इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादक और निर्यातक के रूप में उभरा है। विशेषकर मोबाइल फोन के क्षेत्र में, जहाँ उत्पादन और निर्यात दोनों में कई गुना वृद्धि देखी गई है। इन योजनाओं ने निवेश आकर्षित किया, रोज़गार पैदा किए, और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में भारत की स्थिति मजबूत की है, जिससे देश आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है।
PLI स्कीम से देश में पैदा हुए 12.6 लाख से ज़्यादा प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोज़गार
मोदी सरकार की PLI योजनाओं के फलस्वरूप देश में बड़े पैमाने पर विदेशी निवेश आया है, जिससे 12.6 लाख से ज़्यादा प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोज़गार पैदा हुए हैं। योजना के परिणामस्वरूप देश में मोबाइल उत्पादन के सेक्टर में वर्ष 2014-15 में केवल 2 मोबाइल विनिर्माण इकाइयाँ थीं, जो अब 300 से अधिक हो गई हैं। इसके साथ ही मोबाइल निर्यात 2014-15 के ₹22,000 करोड़ से बढ़कर 2024-25 में ₹2.2 लाख करोड़ से ज़्यादा हो गया है।
2024-25 में ₹3.26 लाख करोड़ का हो गया भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात
इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में भी देश ने लंबी छलांग लगायी है। इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात 2014-15 के ₹38,000 करोड़ से बढ़कर 2024-25 में ₹3.26 लाख करोड़ हो गया है, जिससे भारत प्रमुख निर्यातक देश बनकर उभरा है। पीएलआई (PLI) योजना से MSME क्षेत्र के उद्योगों ने उत्पादन, निवेश और रोजगार के क्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है। खासकर कपड़ा, इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों में, जिससे MSME पारिस्थितिकी तंत्र मजबूत हुआ है और उन्हें मूल्य श्रृंखलाओं में सहायक इकाइयों के रूप में विकसित होने का अवसर मिला है। इससे भारत अब केवल आयातक नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यातक बन गया है, खासकर मोबाइल फोन और दूरसंचार उपकरणों के क्षेत्र में।
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