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अब नहीं फटेंगी मोबाइल-ईलेक्ट्रिक कारों की बैटरियां

अब नहीं फटेंगी मोबाइल-ईलेक्ट्रिक कारों की बैटरियां, लिक्विड फॉर्मूला से लिथियम-ऑयन बैटरी बनेगी सुरक्षित

स्मार्टफोन हो या इलेक्ट्रिक कार, लिथियम-आयन बैटरियों में आग लगने की घटनाएं पूरी दुनिया में चिंता का कारण बनी हुई हैं। थर्मल रनवे प्रक्रिया या ज्यादा गर्मी से यह बैटरियां मिनटों में धधक उठती हैं।

अब नहीं फटेंगी मोबाइल-ईलेक्ट्रिक कारों की बैटरियां लिक्विड फॉर्मूला से लिथियम-ऑयन बैटरी बनेगी सुरक्षित

फाइल फोटो |

बीजिंग, चीन। स्मार्टफोन हो या इलेक्ट्रिक कार, लिथियम-आयन बैटरियों में आग लगने की घटनाएं पूरी दुनिया में चिंता का कारण बनी हुई हैं। थर्मल रनवे प्रक्रिया या ज्यादा गर्मी से यह बैटरियां मिनटों में धधक उठती हैं। लेकिन अब स्मार्टफोन यूजर्स के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। मोबाइल में इस्तेमाल होने वाली लिथियम-आयन बैटरियों में आग लगने और फटने की घटनाओं को कम करने का दावा एक नए वैज्ञानिक शोध में किया गया है। यह शोध बैटरी से जुड़ी सुरक्षा को लेकर अब तक की सबसे अहम खोजों में से एक माना जा रहा है।

तापमान के प्रति संवेदनशील है नया केमिकल मिश्रण

ज्यादातर बैटरियों में तरल 'इलेक्ट्रोलाइट' आग पकड़ता है। अब हॉन्गकॉन्ग के वैज्ञानिकों की टीम ने ऐसा नया केमिकल मिश्रण तैयार किया है, जो तापमान के प्रति संवेदनशील है। गर्मी बढ़ते ही यह रासायनिक प्रतिक्रियाएं धीमी कर देता है, जिससे आग की आशंका खत्म हो जाती है। हॉन्गकॉन्ग की चाइनीज यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने बैटरी टेक्नोलॉजी में एक अहम सुधार किया है। वैज्ञानिकों ने बैटरी के इलेक्ट्रोलाइट में मामूली बदलाव करते हुए दो खास सॉल्वेंट्स का इस्तेमाल किया है। यही छोटा सा बदलाव बैटरी के अत्यधिक गर्म होने और आग लगने के खतरे को काफी हद तक कम कर देता है।

ओवरहीटिंग बनती है बैटरी में आग लगने या फटने का कारण

टेस्ट के दौरान बैटरी में कील से छेद किया तो तापमान सिर्फ 3.5 डिग्री सेल्सियस बढ़ा जबकि सामान्य बैटरियों में यह 555 डिग्री तक पहुंच जाता है, जो उन्हें बम की तरह उड़ाने के लिए काफी है। इस प्रयोग के आधार पर स्पष्ट है कि नई तकनीक बैटरी को ओवरहीटिंग से बचाने में कितनी कारगर हो सकती है। यही ओवरहीटिंग आगे चलकर आग लगने या बैटरी फटने का कारण बनती है। इस शोध को लेकर वैज्ञानिकों का कहना है कि इस बदलाव से बैटरी की परफॉर्मेंस पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ता। यानी बैटरी की चार्जिंग क्षमता, बैकअप और लाइफ पहले जैसी ही बनी रहती है, लेकिन सुरक्षा का स्तर कई गुना बढ़ जाता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह तकनीक कमर्शियल लेवल पर अपनाई जाती है, तो आने वाले समय में स्मार्टफोन, लैपटॉप और इलेक्ट्रिक डिवाइस कहीं ज्यादा सुरक्षित हो सकते हैं। इससे न सिर्फ यूजर्स का भरोसा बढ़ेगा, बल्कि मोबाइल बैटरी ब्लास्ट जैसी घटनाओं में भी बड़ी कमी आ सकती है।

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