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एमएसएमई को 20 लाख तक बिना गारंटी कर्ज

लघु एवं मध्यम उद्योगों को बिना गारंटी मिलेगा 20 लाख रुपये तक का कर्ज

मुंबई। देश में उद्योग फ्रेंडली माहौल बनाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने छोटे और मझोले कारोबारियों (एमएसएमई) को बिना गारंटी मिलेगा 20 लाख रुपए तक कर्ज मुहैया कराने का फैसला किया है।

लघु एवं मध्यम उद्योगों को बिना गारंटी मिलेगा 20 लाख रुपये तक का कर्ज

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एमएसएमई को 20 लाख लोन मंजूर

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने छोटे कारोबारियों और एमएसएमई के लिए कोलेटरल फ्री लोन की सीमा ₹10 लाख से बढ़ाकर ₹20 लाख कर दी है। यानी माइक्रो और स्मॉल एंटरप्राइजेज को बिना किसी गारंटी या संपत्ति गिरवी रखे 20 लाख रुपए तक का लोन मिल सकेगा। विशेष मामलों में मजबूत ऋण साख (credit history) के आधार पर बैंक इस सीमा को बढ़ाकर ₹25 लाख तक भी कर सकते हैं। यह सुविधा प्रधान मंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) के तहत मिलने वाले ऋणों पर भी लागू होगी। आरबीआई की इस पहल के बाद छोटे बिजनेस वाले कारोबारी बिना टेंशन के कर्ज हासिल कर सकेंगे। आरबीआई की ओर से जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक, अगर किसी एमएसई का अच्छा ट्रैक रेकॉर्ड है और फाइनेंशियल स्थिति मजबूत है तो बैंक अपनी आंतरिक पॉलिसी के तहत कोलेटरल फ्री लोन की लिमिट को 25 लाख रुपए तक बढ़ा सकते हैं। नए नियम 1 अप्रेल 2026 से लागू होंगे।

पीएमईजीपी को भी 20 लाख लोन

यह नियम न केवल सामान्य एमएसई इकाइयों पर लागू होगा, बल्कि प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) के तहत वित्तपोषित इकाइयों को भी इसका लाभ मिलेगा। आरबीआई के सर्कुलर में बैंकों को सलाह दी गई है कि वे खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआइसी) की ओर से प्रशासित पीएमईजीपी के तहत वित्तपोषित सभी इकाइयों को भी 20 लाख रुपए तक का बिना गारंटी वाला लोन प्रदान करें। क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट फॉर माइक्रो एंड स्माल इंटरप्राइजेज लोन लेने वाले उद्यमियों की गारंटी लेगा। इससे क्रेडिट की सुविधा दूरदराज स्थित छोटे उद्यमियों तक पहुंचेगी। रिजर्व बैंक के संशोधित निर्देशों में यह भी उल्लेख किया गया है कि यदि कोई उद्यमी अपनी मर्जी से सोना-चांदी या अन्य संपत्ति गिरवी रखता है, तो इसे नियमों के उल्लंघन के रूप में नहीं देखा जाएगा। यानी उद्यमी चाहे तो अतिरिक्त सुरक्षा देने के लिए अपनी संपत्ति गिरवी रख सकता है, लेकिन यह अनिवार्य नहीं होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि इस कदम से छोटे और मध्यम व्यवसायों को वित्तीय सहायता मिलने की संभावना बढेगी। गारंटी की बाधा हटने से बैंकिंग प्रणाली में एमएसएमई को जोड़ा जा सकेगा। एमएसएमई क्रेडिट गारंटी योजना का भी फायदा उठा सकेंगे।

एमएसएमई को बजट में बड़ा सहारा

याद रहे कि आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने पिछले शुक्रवार को मौद्रिक नीति की घोषणा के दौरान इन बदलावों का संकेत दिया था। एमएसएमई क्षेत्र के ऋण संबंधी इन मुख्य निर्देशों का आखिरी बार जुलाई, 2025 में अपडेट किया गया था। पिछले सप्‍ताह एमपीसी बैठक के बाद गवर्नर ने कहा था कि छोटे-मझोले उद्यमों को आगे बढ़ाने के लिए बिना गारंटी वाला कर्ज दिया जाएगा। इससे पहले, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2026-27 के केंद्रीय बजट में घोषणा की थी कि MSMEs को समर्थन देने के लिए आगामी वित्तीय वर्ष में आत्मनिर्भर भारत कोष में 4,000 करोड़ रुपये की वृद्धि की जाएगी।

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