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मुनाफा देने वाला म्यूचुअल फंड उद्योग अब ढलान पर

&quotम्यूचुअल फंड्स&quot की तेजी में गिरावट का दौर शुरू

भारत लगातार मुनाफा देने वाला म्यूचुअल फंड उद्योग अब ढलान पर जाता नजर आ रहा है।

quotम्यूचुअल फंड्सquot की तेजी में गिरावट का दौर शुरू

"म्यूचुअल फंड्स" की तेजी में गिरावट का दौर शुरू

मुनाफा देने वाला म्यूचुअल फंड उद्योग अब ढलान नजर आ रहा

मुंबई।

भारत लगातार मुनाफा देने वाला म्यूचुअल फंड उद्योग अब ढलान पर जाता नजर आ रहा है। शेयर मार्केट में तेजी के रूझान के बावजूद 2018 के बाद पहली बार अधिकांश इक्विटी म्यूचुअल फंड योजनाओं का एक वर्षीय रॉलिंग रिटर्न नकारात्मक हो गया है। 

"एलेरा कैपिटल" के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, एग्रेसिव इक्विटी इन्वेस्टमेंट और कंसेन्ट्रेटेड फ्लो भी निवेशकों को परफॉर्मेंस स्लोडाउन से नहीं बचा सके। यह रुझान अगस्त 2025 के आसपास परिलक्षित हुआ, जब AUM-वेटेड मीट्रिक, जो इक्विटी फंडों के कुल प्रदर्शन को ट्रैक करता है, पहली बार 2018 के बाद नेगेटिव टेरिटरी में चला गया। एक वर्षीय रॉलिंग रिटर्न, जो निवेशक भावना और प्रवाह का महत्वपूर्ण संकेतक है, अब शून्य से नीचे आ गया है, जो कई वर्षों की तेजी के बाद एक बड़ा बदलाव है।

इक्विटी फंडों ने फरवरी 2025 के बाद से डेट फंड्स की तुलना में प्रदर्शन में पिछड़ना शुरू कर दिया है। “इक्विटी प्रीमियम” केवल 10% रह गया है, जो अक्टूबर 2020 के बाद सबसे न्यूनतम अंतर है।सतर्क हो रहे हैं इन्वेस्टर्स
इसके बाद इन्वेस्टर्स सतर्कता बरत रहे हैं। जुलाई में कुल शुद्ध इक्विटी म्यूचुअल फंड निवेश ₹42,700 करोड़ था, जो अगस्त में ₹33,430 करोड़ और सितंबर में ₹30,400 करोड़ रह गया। स्मॉलकैप श्रेणी में निवेश में सबसे बड़ी गिरावट देखी गई। थीमैटिक और सेक्टोरल फंड भी दबाव में हैं, जबकि अधिकांश निवेश अब नई फंड ऑफ़रिंग्स (NFOs) में केंद्रित हैं। एलेरा के अनुसार, पॉजिटिव एक वर्षीय रिटर्न देने वाली योजनाओं का पर्सेंटेज 2020 के कोविड-19 बाजार गिरावट के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। बड़े, मिड और स्मॉलकैप फंडों में मध्य रिटर्न सभी नेगेटिव हैं, विशेष रूप से स्मॉलकैप योजनाओं में तेज गिरावट देखी गई है।

एलारा कैपिटल के डेटा के मुताबिक, इस प्रदर्शन में गिरावट के चलते निवेशकों का रुझान बदल रहा है। पिछले दो महीनों (अगस्त और सितंबर) में प्योर इक्विटी फंड्स में निवेश का प्रवाह 12,300 करोड़ रु. तक कम हो गया है। यह जुलाई में 42,700 करोड़ रु. से घटकर अगस्त में 33,430 करोड़ और सितंबर में और घटकर 30,400 करोड़ रु. रह गया। इसके अलावा, फंड मैनेजर मिडकैप शेयरों में अपना कैश रिजर्व तेजी से कम करके बाजार में पैसा लगा रहे हैं। 
नए निवेश का एक बड़ा हिस्सा (25%) केवल छह स्टॉक्स में केंद्रित हो गया है, जिससे जोखिम बढ़ गया है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि सरकार और आरबीआई के फैसलों से दिसंबर तिमाही के बाद कमाई की रफ्तार बढ़ेगी, जो 2026 तक बाजार को 11% तक ऊपर ले जा सकती है।

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