NVS-03 उपग्रह के सफल प्रक्षेपण और कक्षा में स्थापित होने से भारत की स्वदेशी NavIC नेविगेशन प्रणाली की परिचालन क्षमता पूरी तरह बहाल होने की उम्मीद है।
सिंगापुर सिटी। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के पूर्व वैज्ञानिक रवि गुप्ता ने शुक्रवार को कहा कि GSLV-F18/NVS-03 मिशन का लॉन्च भारत की स्वदेशी 'नेविगेशन विद इंडियन कॉन्स्टेस्टेशन' (NavIC) प्रणाली के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा, जिसके कक्षा में स्थापित होने के बाद इसके पूरी तरह से चालू होने की उम्मीद है।
चौथे उपग्रह के जुड़ने से परिचालन क्षमता फिर से हासिल
आज रात होने वाले लॉन्च से पहले ANI से बात करते हुए गुप्ता ने कहा कि तकनीकी कारणों से बाधित हुई NavIC प्रणाली चौथे उपग्रह के जुड़ने से अपनी परिचालन क्षमता फिर से हासिल कर लेगी। उन्होंने कहा कि आज हमारे देश के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण दिन है क्योंकि हमारी NavIC प्रणाली, जो कुछ समय के लिए कुछ तकनीकी कारणों से बाधित हो गई थी, अब फिर से चालू होने जा रही है। नेविगेशन किसी भी शांति काल की गतिविधि के साथ-साथ युद्ध की गतिविधि का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
स्वदेशी नेविगेशन प्रणाली के रणनीतिक महत्व पर डाला प्रकाश
एक स्वदेशी नेविगेशन प्रणाली के रणनीतिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए गुप्ता ने कहा कि सटीक नेविगेशन सैन्य अभियानों में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, क्योंकि मिसाइलें, विमान, पनडुब्बियां और नौसेना के जहाज विश्वसनीय नेविगेशन प्रणालियों पर निर्भर करते हैं। उन्होंने कहा कि युद्ध के दौरान सटीक नेविगेशन का महत्व अत्यधिक महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि हमारे सभी मिसाइल, विमान, पनडुब्बियां और जहाज नेविगेशन प्रणाली पर निर्भर करते हैं। यह चौथा उपग्रह होगा। एक बार जब यह कक्षा में स्थापित हो जाएगा, तो हमारी अपनी नेविगेशन प्रणाली पूरी तरह से चालू हो जाएगी।
GPS और GLONASS जैसी विदेशी नेविगेशन प्रणालियों पर निर्भरता
उन्होंने आगे बताया कि GPS और GLONASS जैसी विदेशी नेविगेशन प्रणालियों पर निर्भरता महत्वपूर्ण स्थितियों के दौरान चुनौतियों का कारण बन सकती है, विशेषकर यदि इन सेवाओं तक पहुंच प्रतिबंधित हो। गुप्ता ने कहा कि अब तक हम जीपीएस (GPS), ग्लोनास (GLONASS), या किसी अन्य व्यावसायिक रूप से उपलब्ध प्रणालियों पर निर्भर हैं, जिन्हें हमने देखा है कि कभी-कभी, जब हम महत्वपूर्ण क्षण में होते हैं, तो इन प्रणालियों तक पहुंच से वंचित कर दिया जाता था - सीधे या किसी गड़बड़ी के बहाने से।
घटकों की आपूर्ति श्रृंखला और डिजाइन पर नियंत्रण बनाए रखें
तकनीकी आत्मनिर्भरता के महत्व पर जोर देते हुए पूर्व DRDO वैज्ञानिक ने कहा कि भारत को अपनी नेविगेशन बुनियादी ढांचे में उपयोग किए जाने वाले महत्वपूर्ण घटकों की आपूर्ति श्रृंखला और डिजाइन पर नियंत्रण बनाए रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस तरह की प्रणाली का महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इस प्रणाली में जाने वाले घटकों पर हमारी आपूर्ति श्रृंखला पर पूरा नियंत्रण होना चाहिए; निश्चित रूप से डिजाइन हमारा होना चाहिए। और फिर, यदि हम किसी भी प्रणाली को शामिल कर रहे हैं, तो हमारे पास उनकी जांच और निरीक्षण करने की क्षमता होनी ताकि हम पूरी तरह से उन पर निर्भर रह सकें और भरोसा कर सकें।
यह प्रणाली एक मजबूत और बहुत विश्वसनीय प्रणाली
गुप्ता ने स्वदेशी क्षमताओं को विकसित करने में DRDO और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा किए गए कार्यों की भी सराहना की और प्रणाली की विश्वसनीयता पर विश्वास व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मुझे आपको यह बताते हुए खुशी हो रही है कि हमारे देश के DRDO और ISRO ने इस क्षेत्र में काफी काम किया है। हम इस क्षेत्र में पूरी तरह से आत्मनिर्भर हैं। और यह प्रणाली एक मजबूत और बहुत विश्वसनीय प्रणाली बनने जा रही है।
शुक्रवार को रात 11:51 बजे NVS-03 उपग्रह के लॉन्च का समय निर्धारित
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने शुक्रवार को रात 11:51 बजे अपने NVS-03 उपग्रह के लॉन्च का समय निर्धारित किया है, जो भारत की समय संप्रभुता (टाइम सॉवरेग्निटी) को मजबूत करने और भारतीय क्षेत्रीय नेविगेशन उपग्रह प्रणाली (IRNSS) के साथ उपग्रह नेविगेशन प्रणालियों को मजबूत करने के लिए अंतरिक्ष में इस तरह की तीसरी स्वदेशी परमाणु घड़ी रखेगा, जिसे अब NavIC के रूप में जाना जाता है।
NVS-03 उपग्रह को GSLV-F18 लॉन्च वाहन पर ले जाऐंगें
NVS-03 उपग्रह को GSLV-F18 लॉन्च वाहन द्वारा ले जाया जाएगा, जो भारत के जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (GSLV) की 20वीं उड़ान है। यह लॉन्च श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (SDSC SHAR) के दूसरे लॉन्च पैड से होना तय है। NVS-03, IRNSS श्रृंखला के लिए नेविगेशन सेवाओं की निरंतरता प्रदान करने के लिए परिकल्पित अगली पीढ़ी की नेविगेशन उपग्रह प्रणाली का तीसरा उपग्रह है। इससे पहले के उपग्रह NVS-02 और NVS-01 थे, जिनमें अन्य दो स्वदेशी परमाणु घड़ियां थीं।
(इनपुटः ANI)
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