नेस्ले इंडिया ने लैक्टोजेन प्रो 1 में व्हे प्रोटीन के आसानी से पचने संबंधी दावे पर FSSAI को विस्तृत जवाब सौंपा है। नियामक ने दावे के समर्थन में वैज्ञानिक प्रमाण मांगे थे।
नई दिल्ली (भारत)। नेस्ले इंडिया ने अपने शिशु पोषण उत्पाद लैक्टोजेन प्रो 1 की लेबलिंग से जुड़े पाचन संबंधी दावे पर भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) को विस्तृत जवाब सौंपा है। यह मामला उत्पाद में मौजूद व्हे प्रोटीन के आसानी से पचने के दावे से जुड़ा है। नियामक ने इस दावे के समर्थन में वैज्ञानिक प्रमाण मांगे थे। इसके बाद कंपनी ने अपना पक्ष रखते हुए बताया कि वह इस मामले में FSSAI को पहले ही विस्तृत जवाब दे चुकी है।
FSSAI ने व्हे प्रोटीन के दावे पर मांगे वैज्ञानिक प्रमाण
FSSAI के ताजा नोटिस में लैक्टोजेन प्रो 1 की पैकेजिंग और विज्ञापन सामग्री में किए गए उस दावे के समर्थन में सबूत मांगे गए हैं, जिसमें कहा गया है कि उत्पाद में मौजूद व्हे प्रोटीन आसानी से पच जाता है। व्हे प्रोटीन दूध के प्रोटीन का ही एक हिस्सा है। नियामक ने संबंधित खाद्य कारोबार संचालक को निर्धारित समय के भीतर जरूरी दस्तावेज और वैज्ञानिक प्रमाण जमा करने का निर्देश दिया है। मामले में दावे की पुष्टि के लिए सहायक साक्ष्य मांगे गए हैं।
कंपनी ने कहा- FSSAI को पहले ही सौंप चुके हैं जवाब
नेस्ले इंडिया के एक प्रवक्ता ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि FSSAI की हालिया पोस्ट में 18 सितंबर को की गई पोस्ट की बातों को ही दोहराया गया है। प्रवक्ता के अनुसार, पहले की पोस्ट उत्पाद की लेबलिंग से संबंधित थी। उन्होंने कहा, FSSAI की हालिया पोस्ट में 18 सितंबर की उस पोस्ट की बातों को ही दोहराया गया है, जो उत्पाद लेबल से संबंधित थी। हमने इस मामले पर FSSAI को अपना विस्तृत जवाब पहले ही सौंप दिया है।
शिशु पोषण उत्पादों के दावों पर FSSAI की कार्रवाई
यह मामला शिशु पोषण उत्पादों से जुड़े दावों की जांच के लिए FSSAI की व्यापक कार्रवाई का हिस्सा है। नियामक ने खाद्य निर्माताओं और अन्य इकाइयों द्वारा कथित तौर पर भ्रामक स्वास्थ्य दावे किए जाने और नियमों के विपरीत प्रचार किए जाने पर सवाल उठाए हैं। इससे पहले जारी नोटिसों में शिशु पोषण उत्पादों से जुड़े इम्युनिटी और पाचन संबंधी दावों पर भी स्पष्टीकरण मांगा गया था। इसके अलावा, डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए शिशु दुग्ध विकल्पों के प्रचार पर भी नियामक ने आपत्ति जताई थी।
इम्युनिटी और मस्तिष्क विकास से जुड़े दावों पर भी सवाल
FSSAI ने शिशु पोषण उत्पादों में मौजूद कुछ तत्वों के जरिए सामान्य रोग प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर बनाने के दावों पर चिंता जताई थी। नियामक ने व्हे प्रोटीन के आसानी से पचने संबंधी दावे के समर्थन में भी वैज्ञानिक प्रमाण मांगे थे। इसके साथ ही, सोशल मीडिया पर शिशु दुग्ध विकल्पों से संतुलित पोषण, मजबूत इम्युनिटी और मस्तिष्क के विकास जैसे फायदे मिलने का दावा करने वाली प्रचार सामग्री पर सवाल उठाए गए थे। नियामक इन दावों के समर्थन में आवश्यक प्रमाण चाहता है।
शिशु पोषण से जुड़े नियमों के उल्लंघन की आशंका
FSSAI के अनुसार, कुछ प्रचार सामग्री शिशु दुग्ध विकल्प अधिनियम, 1992 (2003 में संशोधित) और खाद्य सुरक्षा और मानक (शिशु पोषण के लिए खाद्य पदार्थ) विनियम, 2020 का उल्लंघन कर सकती है। नियामक ने संबंधित पक्षों से स्पष्टीकरण और दावों के समर्थन में दस्तावेज मांगे हैं। इन जवाबों और उपलब्ध प्रमाणों की समीक्षा के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। फिलहाल, लैक्टोजेन प्रो 1 के पाचन संबंधी दावे को लेकर कंपनी और नियामक के बीच यह प्रक्रिया जारी है। (Source: ANI)
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