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हथियार सप्लाई मामले में NIA ने एक अमेरिकी और 6 यूक्रेनी नागरिकों को किया गिरफ्तार

NIA ने म्यांमार के जातीय युद्ध समूहों को हथियारों और आतंकी उपकरणों की आपूर्ति करने व उन्हें प्रशिक्षण देकर सहायता करने के आरोप में छह यूक्रेनी और एक अमेरिकी नागरिक को गिरफ्तार किया है।

हथियार सप्लाई मामले में nia ने एक अमेरिकी और 6 यूक्रेनी नागरिकों को किया गिरफ्तार

NIA Arrests US and Ukrainian Nationals for Aiding Myanmar Insurgents |

नई दिल्ली। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने म्यांमार के जातीय युद्ध समूहों को हथियारों और आतंकी उपकरणों की आपूर्ति करने व उन्हें प्रशिक्षण देकर सहायता करने के आरोप में छह यूक्रेनी और एक अमेरिकी नागरिक को गिरफ्तार किया है। आरोपियों की पहचान मैथ्यू आरोन वैन डायक (अमेरिकी नागरिक), हुर्बा पेट्रो, स्लीविक तारास, इवान सुकमनोव्स्की, स्टेफनकीव मारियन, होंचारुक मक्सिम और कामिन्स्की विक्टर (सभी यूक्रेनी नागरिक) के रूप में हुई है। इन सभी को धारा 18 (आतंकवादी साजिश) और BNS के तहत दर्ज एक मामले में गिरफ्तार किया गया है।

कोर्ट ने दी 11 दिन की हिरासत

विशेष NIA जज प्रशांत शर्मा ने सोमवार को सभी सात आरोपियों को 11 दिनों की हिरासत में भेज दिया, जबकि NIA ने 15 दिनों की रिमांड मांगी थी। NIA ने आरोप लगाया कि जातीय सशस्त्र समूहों से जुड़े ये आरोपी हथियारों की आपूर्ति और प्रशिक्षण के जरिए कुछ प्रतिबंधित भारतीय विद्रोही समूहों की मदद कर रहे हैं, जिससे निश्चित रूप से भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और हित प्रभावित होते हैं।

दिल्ली, लखनऊ और कोलकाता से हुई गिरफ्तारी

रिमांड देते समय कोर्ट ने कहा कि ऐसा नहीं है कि FIR में आरोपियों द्वारा राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ किए गए अवैध कार्यों का जिक्र नहीं है, इसलिए यूए(पी)ए की धारा 18 व्यापक रूप से लागू होती है। इससे पहले NIA ने दिल्ली से तीन, लखनऊ से तीन यूक्रेनी नागरिकों और कोलकाता से एक अमेरिकी नागरिक को गिरफ्तार किया था। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रशांत शर्मा ने इन सातों को 27 मार्च तक हिरासत में भेजा है और इसकी सुनवाई बंद कमरे में हुई। NIA की ओर से विशेष लोक अभियोजक अतुल त्यागी और अमित रोहिला पेश हुए।

यूरोप से ड्रोन की एक बड़ी खेप लेकर आए थे आरोपी

आरोप है कि ये लोग वीजा पर भारत आए और फिर मिजोरम में दाखिल हुए, जो कि एक संरक्षित क्षेत्र है। इसके बाद वे म्यांमार गए और वहां के जातीय युद्ध समूहों से संपर्क किया। NIA का दावा है कि उन्होंने म्यांमार में प्रशिक्षण लिया और वहां के समूहों को प्रशिक्षित भी किया, जो भारत के विद्रोही संगठनों से जुड़े हैं। यह भी आरोप है कि वे भारत के रास्ते यूरोप से ड्रोन की एक बड़ी खेप लेकर आए थे। दूसरी ओर, वरिष्ठ अधिवक्ता प्रमोद कुमार दुबे और अधिवक्ता अंकुर सहगल ने आरोपियों की ओर से पेश होकर NIA की हिरासत की अर्जी का विरोध किया।

यूक्रेन का जताया विरोध, की तत्काल रिहाई की मांग

NIA द्वारा छह यूक्रेनी नागरिकों को गिरफ्तार कि जाने के बाद भारत में यूक्रेन के राजदूत ने एक आधिकारिक विरोध नोट सौंपा है, जिसमें उनकी तत्काल रिहाई की मांग की गई है। यूक्रेन के विदेश मंत्रालय की प्रेस सेवा ने इन गिरफ्तारियों पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि भारत में देश के राजदूत डॉ. ओलेक्जेंडर पोलिशचुक ने भारत के विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज के साथ एक बैठक की। इस बैठक के दौरान उन्होंने "एक आधिकारिक विरोध नोट" सौंपा, जिसमें यूक्रेनी नागरिकों की तत्काल रिहाई और उनसे मिलने की अनुमति देने की मांग की गई थी।

अमेरिकी दूतावास ने किया टिप्पणी से परहेज

अमेरिकी दूतावास के एक प्रवक्ता ने कहा कि उन्हें इस स्थिति की जानकारी है। प्रवक्ता ने कहा, "हमें इस स्थिति की जानकारी है। निजता संबंधी कारणों से, हम अमेरिकी नागरिकों से जुड़े मामलों पर कोई टिप्पणी नहीं कर सकते।"

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