विदेशों से अन्यवासी भारतीयों (एनआरआई) द्वारा देश में भेजे जाने वाले धन (रेमिटेंस) में हाल के महीनों में भारी गिरावट देखी गई है।
रेमिटेंस में हाल के महीनों में तेज गिरावट
विदेशों से अन्यवासी भारतीयों (एनआरआई) द्वारा देश में भेजे जाने वाले धन (रेमिटेंस) में हाल के महीनों में भारी गिरावट देखी गई है। विशेष रूप से लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के तहत भारत भेजे जाने वाले धन में काफी गिरावट आयी है।
NRE और NRO खातों में बढ़ोतरी
हालांकि NRE और NRO खातों में वृद्धि देखी गई है। इस गिरावट का मुख्य कारण वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के दौर में कुछ देशों में वीजा नियमों में सख्ती और अप्रवासी भारतीयों की कमाई कम होना माना जा रहा है।
विदेशी मुद्रा प्रवाह पर असर की आशंका
इससे भारत में विदेशी मुद्रा प्रवाह (FDI) और रुपये की स्थिरता पर असर पड़ सकता है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल-नवंबर 2025 के दौरान प्रवासी भारतीयों (एनआरआई) द्वारा जमा किया गया धन 26.56 प्रतिशत गिरकर 9.2 अरब डॉलर रह गया है, जो 2024 की समान अवधि में 12.55 अरब डॉलर था।
कुल एनआरआई जमा में उतार-चढ़ाव
नवंबर 2025 के आखिर तक कुल एनआरआई जमा 168.23 अरब डॉलर रहा। नवंबर 2024 में एनआरआई जमा 162.69 अरब डॉलर था और अक्टूबर 2024 में एनआरआई जमा 168.23 अरब डॉलर था। एनआरआई जमा योजनाओं में फॉरेन करेंसी नॉन रेजिडेंट (एफसीएनआर) जमा, नॉन रेजिडेंट एक्सटर्नल (एनआरई) जमा और नॉन रेजिडेंट ऑर्डिनरी (एनआरओ) जमा शामिल है।
FCNR (B) जमा में सबसे ज्यादा गिरावट
अप्रैल-नवंबर 2025 के दौरान एफसीएनआर (बैंक) या एफसीएनआर (बी) जमा में आवक 1.86 अरब डॉलर रह गई, जो एक साल पहले 6.31 अरब डॉलर थी। नवंबर में एफसीएनआर (बी) खाते में कुल जमा 34.67 अरब डॉलर थी। यह खाता विदेशी मुद्रा में चलाया जाता है, जिससे रुपये में उतार-चढ़ाव का इस पर असर नहीं होता है। हालांकि, NRE और NRO खातों में वृद्धि देखी गई, जो लचीलापन दर्शाते हैं।
NRE खातों में बढ़ी आवक
एनआरई खातों में इस दौरान 4.26 अरब डॉलर आया है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में 3.38 अरब डॉलर आया था। नवंबर 2025 में एनआरई खातों में 100.50 अरब डॉलर था। अप्रैल-नवंबर के दौरान 3.09 अरब डॉलर आया है, जो एक साल पहले की समान अवधि में 2.86 अरब डॉलर आया था। एनआरओ जमा में नवंबर 2025 में कुल 32.80 अरब डॉलर थे।
NRE और NRO खातों का अंतर
NRE (Non-Resident External) और NRO (Non-Resident Ordinary) खाते अनिवासी भारतीयों (NRIs) के लिए भारत में बैंक खाते होते हैं। NRE खाता विदेशों से कमाई गई आय के लिए होता है और पूरी तरह से कर-मुक्त व रेमिट करने योग्य (free to repatriate) होता है।
NRO खाता कर योग्य
लेकिन NRO खाता भारत में अर्जित आय (जैसे किराया, पेंशन) के लिए होता है, जो कर योग्य (taxable) होता है और इसमें रेमिटेंस पर सीमाएँ होती हैं। वैश्विक आर्थिक अस्थिरता को विदेशों से भारत धन भेजने में आयी गिरावट का मुख्य कारण माना जा रहा है। इसके अलावा टैक्स कलेक्शन एट सोर्स (TCS) नियमों में बदलाव का भी असर पड़ा है, जिससे लोग विदेश में खर्च करने से पहले सोच-विचार कर रहे हैं।
रुपये और विदेशी मुद्रा भंडार पर प्रभाव
यह गिरावट विदेशी मुद्रा की गतिशीलता में बदलाव का संकेत देती है, जो देश के विदेशी मुद्रा भंडार और रुपये की स्थिरता को प्रभावित कर सकता है। इस गिरावट का असर भारत के विदेशी मुद्रा भंडार और रुपये की स्थिरता पर पड़ सकता है। इससे कुछ राज्यों, जैसे केरल, में स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ रहा है, जहां प्रवासियों द्वारा भेजे गए धन पर निर्भरता अधिक है।
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