प्राइम न्यूज़ – एक कसम, राष्ट्र प्रथम

दी सलाह बेवजह न काटा जाए आवेदन

संसदीय समिति ने एजुकेशन लोन आवेदन बेवजह निरस्त करने पर जतायी चिंता

उच्च शिक्षा के लिए गरीब व निम्न आय वर्ग के छात्रों की एजुकेशन लोन पर निर्भरता बढ़ती जा रही है, लेकिन बैंकिग सिस्टम की जटिलताओं से छात्रों के लिए एजूकेशन लोन लेना अब मुश्किल होता जा रहा है।

संसदीय समिति ने एजुकेशन लोन आवेदन बेवजह निरस्त करने पर जतायी चिंता

संसदीय समिति ने एजुकेशन लोन आवेदन बेवजह निरस्त करने पर जतायी चिंता

दी सलाह बेवजह न काटा जाए आवेदन

नई दिल्ली। 
देश में दिनोंदिन मंहगी होती जा रही उच्च शिक्षा के लिए गरीब व निम्न आय वर्ग के छात्रों की एजुकेशन लोन पर निर्भरता बढ़ती जा रही है। लेकिन बैंकिग सिस्टम की जटिलताओं से छात्रों के लिए एजूकेशन लोन लेना अब मुश्किल होता जा रहा है। इस मामले का एक संसदीय समिति ने संज्ञान लिया है। संसदीय समिति ने इस विषय पर चिंता जताते हुए सरकार को सलाह दी है कि छात्रों के लोन आवेदनों को बेवजह काटा या खारिज न किया जाए। 

कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता वाली समिति ने एजुकेशन लोन के विषय पर राज्यसभा में एक रिपोर्ट पेश की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में उच्च शिक्षा (हायर एजुकेशन) का खर्च तो आसमान छू रहा है, लेकिन छात्रों के लिए एजुकेशन लोन मिलना मुश्किल होता जा रहा है। समिति ने अपनी रिपोर्ट में खुलासा किया है कि पिछले कुछ सालों में लोन लेने वाले छात्रों की संख्या घटी है, लेकिन प्रति छात्र कर्ज का बोझ बढ़ा है। संसदीय समिति ने इस पर चिंता जताई है और सरकार को सलाह दी है कि छात्रों के लोन आवेदनों को बेवजह काटा या खारिज न किया जाए। 

पीएम विद्यालक्ष्मी योजना के तहत भी नहीं मिला लोन

इकोनामिक टाइम्स की एक खबर के अनुसार पैनल ने रिपोर्ट में कहा है कि कई बैंकों ने 25 फरवरी 2025 से 31 अगस्त 2025 के दौरान पीएम विद्यालक्ष्मी योजना के तहत एजुकेशन लोन के लिए एक भी आवेदन को मंजूरी नहीं दी है, जो गरीब छात्रों के आवेदनों के प्रति बैंकों के उदासीन रवैये को दर्शाता है। ऐसे में संसदीय पैनल ने शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग, वित्तीय सेवाएं विभाग और भारतीय रिजर्व बैंक से सिफारिश की है कि पीएम विद्यालक्ष्मी और दूसरी सरकारी योजनाओं के तहत एजुकेशन लोन के लिए आवेदन की मंजूरी, अस्वीकृति और लंबित रहने के लिए सख्त दिशा निर्देश जारी करें। समिति ने कहा कि शिक्षा लोन कणो लेकर कॉमन गाइडलाइंस जारी होनी चाहिए और आवेदनों पर फैसला लेने में देरी नहीं होनी चाहिए। इसके साथ ही आंकड़ों के आधार पर पैनल ने कहा है कि पीएम विद्यालक्ष्मी योजना के तहत एजुकेशन लोन के लिए कुछ आवेदनों में मंजूरी की दर कम है।

बिना गारंटी नहीं मिलता लोन

संसदीय समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि बैंक और वित्तीय संस्थान कागजी मकड़जाल में उलझाकर लोन अस्वीकार करते हैं। 'बिना गारंटी' लोन के वादे के बावजूद, बैंक गारंटर और दस्तावेजों पर जोर दिया हैं। इससे छात्रों के सामने मुश्किल आती है। रिपोर्ट में लोन के मामले में देश के विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय असमानता पर भी चर्चा की गई है। लोन लेने वालों में तमिलनाडु, केरल और महाराष्ट्र सबसे आगे हैं, जबकि उत्तर भारत और ग्रामीण इलाके बहुत पीछे हैं।

इसे भी पढ़ेंः

बच्ची से निर्भया जैसी दरिंदगी, झाड़ी में लेजाकर प्राइवेट पार्ट में घोंपी रॉड

https://www.primenewsnetwork.in/state/nirbhaya-like-brutality-committed-against-the-girl-a-rod-inserted-into-her-parts/100763

Related to this topic: