जबलपुर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने सेवानिवृत्त कर्मचारियों के हित में एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए स्पष्ट किया है कि रिकवरी (वसूली) के नाम पर पेंशननहीं रोकी जा सकती।
नहीं डाली जा सकती कर्मचारियों पर जिम्मेदारी
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने सेवानिवृत्त कर्मचारियों के हित में एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए स्पष्ट किया है कि रिकवरी (वसूली) के नाम पर पेंशननहीं रोकी जा सकती। अदालत ने कहा कि यदि किसी मामले में वसूली आवश्यक भी हो, तो पेंशन से कटौती नहीं की जाएगी, बल्कि संबंधित राशि 6 प्रतिशत ब्याज के साथ वापस कराई जाएगी। हाई कोर्ट की एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा कि तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों से सेवानिवृत्ति के बाद किसी भी प्रकार की वसूली नियमों के विरुद्ध है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सेवा के दौरान यदि विभागीय गलती से अतिरिक्त भुगतान हुआ हो, तो उसकी जिम्मेदारी कर्मचारी पर नहीं डाली जा सकती।
आदालत ने यह भी कहा
पेंशन सेवानिवृत्त कर्मचारी का वैधानिक अधिकार है।प्रशासनिक त्रुटियों का बोझ पेंशनर्स पर नहीं डाला जा सकता।अवैध रूप से की गई वसूली की राशि 6% ब्याज सहित लौटानी होगी।भविष्य में इस तरह की वसूली से पेंशन रोकना अमान्य माना जाएगा।
पेंशनस पाने वालों में खुशी
इस फैसले से प्रदेश के हजारों पेंशनर्स को राहत मिली है, जो वर्षों से रिकवरी के डर और पेंशन कटौती की समस्या से जूझ रहे थे। पेंशनर्स संगठनों ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए इसे सामाजिक न्याय की दिशा में बड़ा कदम बताया है।
करनी होगी भुगतान प्रक्रिया की समीक्षा
हाई कोर्ट के इस आदेश के बाद अब विभागों को अपनी भुगतान प्रक्रिया और सेवा अभिलेखों की कड़ी समीक्षा करनी होगी, ताकि भविष्य में इस तरह की गलतियों से बचा जा सके।यह फैसला न केवल मध्य प्रदेश बल्कि अन्य राज्यों के पेंशनर्स के लिए भी नजीर साबित हो सकता है।
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