PM मोदी ने कहा कि भारत का स्वच्छ ऊर्जा अभियान सौर ऊर्जा तक सीमित नहीं है। देश पवन, जलविद्युत और परमाणु ऊर्जा के विस्तार पर भी काम कर रहा है।
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली में आयोजित अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण सम्मेलन में कहा कि भारत का विकास मॉडल स्थिरता और विकास के संतुलन पर आधारित है। उन्होंने सौर ऊर्जा के साथ-साथ पवन, जलविद्युत और परमाणु ऊर्जा जैसे कम-कार्बन ऊर्जा स्रोतों के विस्तार पर भारत के फोकस को रेखांकित किया। मोदी ने कहा कि जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए भारत स्वच्छ ऊर्जा, हाइड्रोजन और इलेक्ट्रिक वाहनों सहित कई क्षेत्रों में आगे बढ़ रहा है।
12 साल में तीन गुना हुई पवन ऊर्जा क्षमता
प्रधानमंत्री ने कहा, “सौर ऊर्जा के साथ-साथ भारत ने अन्य स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्रों में भी महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं।” उन्होंने बताया कि पिछले 12 वर्षों में भारत की पवन ऊर्जा क्षमता तीन गुना हो गई है और जलविद्युत क्षमता में भी बढ़ोतरी हुई है।
परमाणु ऊर्जा पर भी बढ़ रहा फोकस
परमाणु ऊर्जा को लेकर मोदी ने कहा कि भारत परमाणु ऊर्जा उत्पादन को तेजी से आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने पर्यावरण को लेकर होने वाली बहस पर टिप्पणी करते हुए कहा, “पर्यावरण पर लंबे-लंबे भाषण देने वाले वही लोग हैं जो मेरे द्वारा परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं को आगे बढ़ाने पर उन्हें रोकने के लिए अदालतों में दौड़ पड़ते हैं।”
भारत ने अपने परमाणु ऊर्जा मिशन के तहत 2047 तक परमाणु ऊर्जा क्षमता को 100 गीगावाट तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। सरकार ने इस क्षेत्र में व्यापक भागीदारी और छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों के विकास को बढ़ावा देने के लिए भी कदमों की घोषणा की है।
हाइड्रोजन और इलेक्ट्रिक वाहनों पर भी जोर
मोदी ने कहा कि भारत स्वच्छ ऊर्जा और टिकाऊ परिवहन के लिए कई रास्तों पर काम कर रहा है। इनमें कोयला गैसीकरण, हाइड्रोजन और इलेक्ट्रिक वाहन शामिल हैं। उन्होंने भारत की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन के हालिया शुभारंभ का भी जिक्र किया। प्रधानमंत्री के अनुसार, यह स्वच्छ परिवहन के क्षेत्र में एक नए चरण की शुरुआत है। इस ट्रेन ने इस साल जुलाई में जिंद-सोनीपत खंड पर परिचालन शुरू किया।
12 साल में 2 गीगावाट से 160 गीगावाट से ज्यादा सौर क्षमता
भारत में सौर ऊर्जा के विस्तार का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि देश की सौर ऊर्जा क्षमता करीब 12 साल पहले 2 गीगावाट थी, जो अब बढ़कर 160 गीगावाट से अधिक हो गई है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना के तहत 5 लाख से अधिक घरों में छत पर सौर पैनल लगाए गए हैं। वहीं, प्रधानमंत्री-कुसुम योजना के तहत करीब 3 लाख किसानों को सौर पंपों का लाभ मिला है।
भारत की वैश्विक जलवायु पहलों का जिक्र
प्रधानमंत्री ने भारत की कई अंतरराष्ट्रीय जलवायु पहलों का भी उल्लेख किया। इनमें अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन, आपदा प्रतिरोधी अवसंरचना गठबंधन, वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन, अंतर्राष्ट्रीय बिग कैट गठबंधन और मिशन LiFE शामिल हैं। मोदी ने कहा कि भारत वैश्विक जलवायु कार्रवाई में अधिक समानता की लगातार वकालत करता रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत का प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन वैश्विक औसत से कम है।
भारत का दृष्टिकोण सभ्यतागत परंपराओं में निहित
प्रधानमंत्री ने कहा, “भारत का दृष्टिकोण उसकी सभ्यतागत परंपराओं में निहित है।” उन्होंने कहा कि भारत मौजूदा जलवायु चुनौतियों के समाधान देने के साथ-साथ सामूहिक वैश्विक कार्रवाई की भी अपील कर रहा है। 19 और 20 सितंबर को आयोजित हो रहे दो दिवसीय NGT सम्मेलन में 17 देशों के न्यायाधीश, पर्यावरण विशेषज्ञ, नीति निर्माता और न्यायिक प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण शासन और पर्यावरण न्याय से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की जा रही है। (Source: ANI)
यह भी पढ़ें: कैमूर में प्लास्टिक पाइप फैक्ट्री पर STF-पुलिस की छापेमारी, 27 किलो से ज्यादा गांजा बरामद