केंद्रीय मंत्री शांतनु ठाकुर और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की सांसद ममता बाला ठाकुर के बीच राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। विवाद बनगांव और बागदा के बीच प्रस्तावित नई रेल लाइन को लेकर है।
रेल परियोजना पर श्रेय की लड़ाई
केंद्रीय मंत्री शांतनु ठाकुर का दावा है कि बनगांव और बागदा के बीच नई रेल लाइन बिछाने को मौजूदा रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंजूरी दे दी है। उनका कहना है कि इस परियोजना से उत्तर 24 परगना के लोगों को, खासकर मतुआ समुदाय को, सीधा लाभ मिलेगा।
टीएमसी का पलटवार
इसके उलट टीएमसी सांसद ममता बाला ठाकुर का कहना है कि इस रेल परियोजना की मंजूरी पहले ही दी जा चुकी है। उनके मुताबिक, जब ममता बनर्जी रेल मंत्री थीं, तभी बागदा और बनगांव के बीच रेल लाइन को हरी झंडी मिल गई थी। ऐसे में दोबारा मंजूरी की बात ही गलत है।
चुनावी साख का आरोप
टीएमसी ने शांतनु ठाकुर पर विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए अपनी राजनीतिक साख चमकाने के लिए झूठा दावा करने का आरोप लगाया है। पार्टी का कहना है कि भाजपा केंद्र सरकार की पुरानी परियोजनाओं का श्रेय लेने की कोशिश कर रही है।
स्थानीय लोगों की परेशानी का मुद्दा
केंद्रीय जहाज राज्य मंत्री और मतुआ समुदाय के नेता शांतनु ठाकुर का कहना है कि बागदा इलाके के लोगों को बनगांव आने के लिए बस का सहारा लेना पड़ता है, जिससे उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। उनका कहना है कि कोलकाता जाने के लिए लोगों को बनगांव से ट्रेन पकड़नी पड़ती है और इसी परेशानी को देखते हुए केंद्र सरकार ने बागदा से बनगांव तक नई रेल लाइन बिछाने का फैसला किया है।
जमीन बनी सबसे बड़ी अड़चन
शांतनु ठाकुर के मुताबिक, यह परियोजना तभी आगे बढ़ पाएगी जब राज्य सरकार रेलवे को जरूरी जमीन मुहैया कराएगी। केंद्र सरकार अपने स्तर पर काम करने को तैयार है, लेकिन जमीन का मुद्दा राज्य सरकार के हाथ में है।
टीएमसी का दावा—काम अधूरा छोड़ा गया
टीएमसी सांसद ममता बाला ठाकुर और बनगांव टीएमसी के अध्यक्ष विश्वजीत दास का कहना है कि परियोजना को मंजूरी पहले ही मिल चुकी थी, अब जरूरत सिर्फ उसे पूरा करने की है। टीएमसी नेताओं का आरोप है कि रेल मंत्रालय रेल लाइन के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू नहीं कर रहा है। उनका कहना है कि ममता बनर्जी के रेल मंत्री रहते पश्चिम बंगाल के लिए कई रेल परियोजनाओं को मंजूरी दी गई थी।
श्रेय लेने का आरोप
टीएमसी का कहना है कि भाजपा की केंद्र सरकार उन्हीं पुरानी परियोजनाओं का श्रेय लेने की कोशिश कर रही है, जबकि जमीनी स्तर पर काम आगे नहीं बढ़ाया जा रहा है।
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