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बोला, अंतरिम व्यवस्था के तहत ली जा रही है कीमत

पावर कार्पोरेशन प्रीपेड स्मार्ट मीटर मूल्य को लेकर बैकफुट पर

यूपी पॉवर कॉर्पोरेशन राज्य में घरों में प्रीपेड स्मार्ट मीटर बदलने के मामले में बैकफुट पर आ गया है।

पावर कार्पोरेशन प्रीपेड स्मार्ट मीटर मूल्य को लेकर बैकफुट पर

पावर कार्पोरेशन प्रीपेड स्मार्ट मीटर मूल्य को लेकर बैकफुट पर

नियामक आयोग को बताया, अंतरिम व्यवस्था के तहत है कीमत

लखनऊ। 
यूपी पॉवर कॉर्पोरेशन राज्य में घरों में प्रीपेड स्मार्ट मीटर बदलने के मामले में बैकफुट पर आ गया है। विद्युत नियामक आयोग को भेजे गए जवाब में पावर कार्पोरेशन ने स्वीकार किया कि नियामक आयोग से अनुमति नहीं मिलने के कारण अंतरिम व्यवस्था के तहत कीमत वसूल की जा रही है। आगे से आयोग द्वारा तय किए गए मानकों के हिसाब से ही स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जाएंगे।

विद्युत उपभोक्ता परिषद ने पावर कार्पोरेशन द्वारा प्रदेश में लग रहे प्रीपेड स्मार्ट मीटर की कीमत 6016 रुपये वसूले जाने के खिलाफ विद्युत नियामक आयोग में याचिका दायर की थी। याचिका में इस कीमत की नियामक आयोग से अनुमति नहीं लेने और उपभोक्ताओं को प्रीपेड और पोस्टपेड का विकल्प चुनने देने का विकल्प नहीं देने का आरोप लगाया गया है।

नियामक आयोग ने इस पर सुनवाई करते हुए पॉवर कॉर्पोरेशन को अवमानना नोटिस जारी किया है। विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 142 में कार्रवाई की तलवार लटकता देख कॉर्पोरेशन ने बीच का रास्ता निकाला है। आयोग को भेजे गए जवाब में कॉर्पोरेशन ने कहा कि अभी यह अंतरिम व्यवस्था के तहत शुल्क लिया जा रहा है। आगे आयोग जो भी तय करेगा उसे ही माना जाएगा। कॉर्पोरेशन ने अपने जवाब में यह भी कहा कि वह आयोग में 10 बार प्रस्ताव भेज चुका ह, पर अभी तक मंजूरी नहीं मिली है।

कॉर्पोरेशन ने यह स्वीकार किया है कि आरडीएसएस स्कीम में खरीदे गए स्मार्ट प्रीपेड मीटर का प्रयोग उपभोक्ताओं के मीटर बदलने के लिए किया जा रहा है। इन उपभोक्ताओं से कोई शुल्क नहीं वसूल किया जाएगा। हालांकि पॉवर कॉपोरेशन ने यह सवाल भी उठाया है कि उसने 10 बार डाटा कास्ट बुक को लेकर प्रस्ताव भेजा है, जिस पर अभी तक कोई फैसला नहीं हुआ है।

राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने पॉवर कॉर्पोरशन के जवाब को गलत ठहराते हुए नियामक आयोग में एक नया कानूनी प्रस्ताव दाखिल किया। इसमें नियामक आयोग से पावर कार्पोरेशन के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई शुरू किये जाने की मांग की गई है। 

परिषद अध्यक्ष वर्मा ने कहा कि नोटिस के जवाब में पॉवर कॉपोरेशन अंतरिम आदेश होने की दुहाई दे रहा है। उसने अपने जवाब में केवल बिना अनुमोदन के हो रही वसूली को जायज ठहराने की कोशिश की है। जवाब में माना गया है कि कास्ट डाटा बुक आयोग से अनुमोदित नहीं की गयी है। फिर भी उपभोक्ताओं से मनमाने ढंग से रू 6016 वसूले जा रहे हैं। परिषद ने कॉर्पोरेशन के प्रस्ताव की खामियां गिनाते हुए कहा कि आयोग में आए प्रस्ताव में जीएसटी की दरें दोगुनी भेजी गई हैं। कुछ सामग्री में कई गुना वृद्धि करके दर्शाया गया। परिषद ने इन कमियों को उजागर करते हुए इसे गंभीर बताया है।

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