केंद्र सरकार लोकसभा में पब्लिक एग्जामिनेशन अमेंडमेंट बिल 2026 पेश करेगी। प्रस्तावित संशोधन में परीक्षा गड़बड़ियों पर सख्त कार्रवाई और फास्ट-ट्रैक ट्रायल जैसे प्रावधान शामिल हैं।
नई दिल्ली (भारत)। NEET-UG 2026 पेपर लीक विवाद और परीक्षा प्रणाली को लेकर देशभर में उठे सवालों के बीच केंद्र सरकार अब कानून को और सख्त बनाने की तैयारी में है। हाल ही में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सरकार सोमवार को लोकसभा में पब्लिक एग्जामिनेशन (गलत इस्तेमाल की रोकथाम) अमेंडमेंट बिल, 2026 पेश करेगी। प्रस्तावित संशोधन का उद्देश्य परीक्षा में गड़बड़ियों पर तेजी से कार्रवाई, दोषियों के खिलाफ कड़ी सजा और मामलों के त्वरित निपटारे के जरिए भर्ती एवं प्रवेश परीक्षाओं की विश्वसनीयता बहाल करना है।
NEET विवाद के बाद कानून में सात बड़े बदलाव प्रस्तावित
इस बिल में सात मुख्य बदलाव किए गए हैं, जिनका मकसद NEET-UG 2026 परीक्षा में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियों के बाद लागू करने में आने वाली कमियों को दूर करना, खास न्यायिक सिस्टम बनाना और क्रिमिनल ट्रायल में तेज़ी लाना है। यह कानूनी दबाव 20 जुलाई को शुरू हुए संसद के चल रहे मॉनसून सेशन के पूरी तरह बर्बाद होने के बाद आया है, क्योंकि विपक्षी पार्टियों और स्टूडेंट ग्रुप्स ने पेपर लीक को लेकर केंद्र पर लगातार दबाव बनाए रखा था।
जांच और सुनवाई के लिए तय होगी सख्त समय सीमा
प्रस्तावित कानून का मकसद जांच और न्यायिक कार्यवाही दोनों के लिए सख्त समय सीमा तय करके मूल 2024 फ्रेमवर्क में बड़े बदलाव करना है। राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के एडमिनिस्ट्रेशन को सेशन कोर्ट को स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का अधिकार होगा। ये खास तौर पर एक्ट के तहत अपराधों की सुनवाई के लिए होंगे।
स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट और टास्क फोर्स का होगा गठन
स्पेशल फास्ट-ट्रैक कोर्ट में कार्यवाही रोज़ाना होनी चाहिए, और चार्जशीट फाइल होने की तारीख से तीन महीने के अंदर ट्रायल खत्म होना ज़रूरी है। केंद्र के पास हाई-स्टेक या क्रॉस-स्टेट एग्जामिनेशन फ्रॉड से निपटने के लिए एक डेडिकेटेड स्पेशल टास्क फोर्स बनाने का अधिकार है। प्रोसेस में देरी को रोकने के लिए एक्ट के तहत अपराधों की जांच दो महीने के अंदर पूरी होनी चाहिए।
पेपर लीक के दोषियों पर सख्त सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान
राज्य सरकारों और UT एडमिनिस्ट्रेशन को खास तौर पर परीक्षा में गड़बड़ी के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए स्पेशल लीगल वकील नियुक्त करने का अधिकार दिया जाएगा। ऑर्गनाइज़्ड पेपर लीक के दोषी पाए गए लोगों, कोचिंग सेंटर और सर्विस प्रोवाइडर के लिए जेल की सज़ा बढ़ाई जाएगी और ज़्यादा पैसे का जुर्माना लगाया जाएगा। राजधानी में हफ़्तों तक चले भारी हंगामे के बाद यह अमेंडमेंट बिल पेश किया गया है।
विरोध प्रदर्शन और मंत्री के इस्तीफे के बाद बढ़ा राजनीतिक दबाव
एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक के साथ कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में 37 दिनों तक चले प्रदर्शन का नतीजा यह हुआ कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफ़ा दे दिया और केंद्रीय मंत्रियों जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह के साथ कई हाई-लेवल बातचीत हुई। हालांकि CJP ने केंद्र के साथ समझौता होने के बाद जंतर-मंतर पर अपना धरना "अच्छी नीयत से" वापस लेने की घोषणा की, लेकिन अब सभी की निगाहें संसद पर टिकी हैं।
परीक्षा प्रणाली में भरोसा बहाल करने की होगी बड़ी परीक्षा
2026 अमेंडमेंट बिल का पास होना केंद्र के लिए एक ज़रूरी टेस्ट होगा क्योंकि यह इंस्टीट्यूशनल क्रेडिबिलिटी को वापस लाने, कॉम्पिटिटिव एग्जाम देने वालों के भविष्य को सुरक्षित करने और नेशनल टेस्टिंग एजेंसियों में लोगों का भरोसा फिर से बनाने की कोशिश करेगा। (Source- ANI)
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