रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जैसलमेर में रक्षा सलाहकार समिति की बैठक की अध्यक्षता की। उन्होंने सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण, वित्तीय बजट, रक्षा उत्पादन और स्वदेशी तकनीक पर जोर दिया।
जैसलमेर (राजस्थान)। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को राजस्थान के जैसलमेर में रक्षा मंत्रालय की सलाहकार समिति की उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। इस दौरान उन्होंने बदलते वैश्विक सुरक्षा माहौल के बीच सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण और स्वदेशी रक्षा उत्पादन पर विशेष जोर दिया।
बदलती सुरक्षा चुनौतियां
बैठक के शुरुआती संबोधन में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि दुनिया भर में सुरक्षा के हालात तेजी से बदल रहे हैं। ऐसे में ड्रोन, मिसाइल और एयर डिफेंस सिस्टम जैसी आधुनिक प्रणालियों की भूमिका युद्ध के मैदान में लगातार बढ़ रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश के सशस्त्र बलों को भविष्य की हर चुनौती से निपटने के लिए हमेशा तैयार रहना होगा।
वित्तीय संसाधन और रक्षा बजट
आधुनिकीकरण के तीन अहम स्तंभों पर बात करते हुए राजनाथ सिंह ने बताया कि सबसे बड़ी जरूरत पर्याप्त वित्तीय संसाधनों की होती है। सरकार ने इसी बात को ध्यान में रखते हुए लगातार बजट बढ़ाया है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए भारत का कुल रक्षा बजट बढ़ाकर 7.85 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है। इसमें से 2.19 लाख करोड़ रुपये केवल आधुनिकीकरण और पूंजीगत खरीद के लिए तय किए गए हैं।
रिकॉर्ड रक्षा उत्पादन और निर्यात
रक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार स्वदेशी विनिर्माण को बढ़ावा दे रही है। भारत का रक्षा उत्पादन 2014-15 के 46,429 करोड़ रुपये से छलांग लगाकर 2025-26 में रिकॉर्ड 1.78 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया है। इसके अलावा, जो रक्षा निर्यात 2014 में दो हजार करोड़ से भी कम था, वह अब लगभग 40,000 करोड़ रुपये हो गया है। सरकार ने 2029 तक रक्षा उत्पादन को 3 लाख करोड़ और निर्यात को 50,000 करोड़ तक ले जाने का लक्ष्य रखा है।
तकनीक और निजी क्षेत्र की भागीदारी
तकनीक को युद्ध का अहम हिस्सा बताते हुए उन्होंने कहा कि डीआरडीओ नई योजनाएं ला रहा है और निजी कंपनियों को भी पूरा मौका दिया जा रहा है। एमएसएमई से लेकर बड़े कॉरपोरेट घराने तक आज देश के रक्षा तंत्र में योगदान दे रहे हैं। सेनाओं ने भी अपनी संगठनात्मक संरचना को मजबूत किया है, जिसमें सेना की असनी, भैरव और शक्तिबान जैसी नई प्लाटून ऑपरेशनल जरूरतों को पूरा कर रही हैं।
मानव संसाधन और रणनीतिक स्वायत्तता
रक्षा मंत्री ने कहा कि सैनिक और मानव संसाधन हमारी सबसे बड़ी ताकत हैं। आधुनिक युद्ध प्रणाली के दौर में रणनीतिक स्वायत्तता और स्वदेशी तकनीक राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अनिवार्य आवश्यकताएं हैं। हमारा उद्देश्य केवल हथियार खरीदना नहीं, बल्कि एक मजबूत रक्षा इकोसिस्टम तैयार करना है।
बैठक में दिग्गजों की मौजूदगी
इस महत्वपूर्ण बैठक में रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह, तीनों सेनाओं के उप-प्रमुखों के अलावा तरुण चुघ, संदीप पाठक, पवन खेड़ा, तिरुचि शिवा, सुदीप बंद्योपाध्याय, सौगत रॉय और नवीन जिंदल सहित विभिन्न दलों के सांसद मौजूद रहे।
(इनपुट: ANI)
यह भी पढ़ें: राजनाथ सिंह बोले- भारत अब कमजोर नहीं है, उकसाने वालों को मिलेगा कड़ा जवाब