ताजिकिस्तान के दुशानबे में SCO बैठक को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि युद्ध से समस्याओं का समाधान संभव नहीं है। उन्होंने आतंकवाद पर कड़ा रुख अपनाने का आह्वान किया।
दुशानबे (ताजिकिस्तान)। वैश्विक तनावों और संघर्षों के बीच भारत ने एक बार फिर बातचीत और कूटनीति का रास्ता अपनाने की वकालत की है। ताजिकिस्तान की राजधानी दुशानबे में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की 'काउंसिल ऑफ हेड्स ऑफ गवर्नमेंट' की बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने स्पष्ट कहा कि "युद्ध कभी भी युद्ध का जवाब नहीं हो सकता, इससे केवल अंतहीन हिंसा का दौर शुरू होता है।"
"वार्ता और कूटनीति ही एकमात्र रास्ता"
दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में चल रहे सैन्य टकरावों पर चिंता जताते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि सैन्य बल प्रयोग से सिर्फ तबाही और हिंसा का दौर लंबा खींचता है। उन्होंने दोहराया, "आज जब दुनिया में कई जगहों पर संघर्ष की स्थिति है, तो उनका समाधान केवल संवाद के जरिए ही संभव है। भारत हमेशा से शांतिपूर्ण समाधान, संवाद और कूटनीति में विश्वास रखता आया है।"
आतंकवाद के इकोसिस्टम को पूरी तरह खत्म करने का आह्वान
क्षेत्रीय सुरक्षा पर बोलते हुए राजनाथ सिंह ने आतंकवाद, ड्रग्स तस्करी और संगठित अपराध को क्षेत्रीय शांति व व्यापार के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया।
उन्होंने कड़े शब्दों में कहा, "आतंकवाद से निपटने में कोई भी दोहरा मापदंड स्वीकार्य नहीं होना चाहिए। आतंकवादियों को पनाह देने, वित्तीय मदद पहुंचाने और उनकी सहायता करने वाले पूरे इकोसिस्टम को सामूहिक रूप से ध्वस्त करने की जरूरत है।"
सिंह ने कहा, "आतंकवाद न केवल निर्दोष जिंदगियां छीनता है, बल्कि निवेश, व्यापार और आर्थिक विकास को भी बुरी तरह प्रभावित करता है। यह समाज में कट्टरता घोलता है और हमारे युवाओं को बेहतर अवसरों से वंचित करता है।"
गौरतलब है कि जब रक्षा मंत्री मंच से आतंकवाद पर भारत का रुख साफ कर रहे थे, उस समय पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री इशाक डार भी बैठक में मौजूद थे।
आर्थिक सहयोग और व्यापार सुगमता पर जोर
व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने के लिए रक्षा मंत्री ने 'बहुपक्षीय व्यापार एवं आर्थिक सहयोग कार्यक्रम (2026-2030)' की कार्ययोजना के प्रति भारत के पूर्ण समर्थन का ऐलान किया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि इस योजना की सफलता तभी संभव है जब सीमा-पार व्यापार में व्यवहारिक सुधार किए जाएं। उन्होंने निम्नलिखित बिंदुओं को अहम बताया:
- कस्टम क्लीयरेंस की प्रक्रिया तेज की जाए।
- व्यापारिक मानकों को पारस्परिक मान्यता मिले।
- विश्वसनीय भुगतान प्रणाली और निर्बाध माल ढुलाई सुनिश्चित हो।
- उन्होंने कहा कि भारत इन सभी क्षेत्रों में अपना तकनीकी और प्रशासनिक अनुभव साझा करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
- भारत और मध्य एशिया के ऐतिहासिक व सांस्कृतिक संबंध
रक्षा मंत्री ने SCO की प्रासंगिकता को रेखांकित करते हुए कहा कि संगठन की सफलता इस बात से तय होगी कि वह आम जनता को कितना प्रत्यक्ष लाभ पहुंचा पाता है।
उन्होंने मध्य एशिया के साथ भारत के सदियों पुराने सभ्यतागत और व्यापारिक रिश्तों को याद किया। दक्षिणी ताजिकिस्तान के अजिना तेपे में मिली बुद्ध की लेटी हुई प्रतिमा का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यह भारत से बौद्ध धर्म के ऐतिहासिक प्रसार और अटूट सांस्कृतिक संबंधों का जीवंत प्रतीक है।
द्विपक्षीय बैठकों में अहम मुद्दों पर चर्चा
SCO सम्मेलन के इतर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कूटनीतिक बैठकों का सिलसिला भी जारी रखा। उन्होंने ताजिकिस्तान के प्रधानमंत्री कोहिर रसुलजोदा और ईरान के प्रथम उपराष्ट्रपति मोहम्मद रजा अरेफ से अलग-अलग मुलाकात कर द्विपक्षीय संबंधों व आपसी सहयोग को और मजबूत करने पर विस्तृत चर्चा की।
(भाषांतर: Ravi Pandey । इनपुट: ANI)
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