भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने मोबाइल और ऑनलाइन बैंकिंग के डिजिटल युग में बढ़ते जोखिमों से निपटने के लिए बैंकों को मजबूत परिचालन अनुशासन और डेटा प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी है।
डिजिटल बैंकिंग में बढ़ते जोखिम, RBI अलर्ट
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने मोबाइल और ऑनलाइन बैंकिंग के डिजिटल युग में बढ़ते जोखिमों से निपटने के लिए बैंकों को मजबूत परिचालन अनुशासन और डेटा प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी है। इससे डिजिटल अरेस्ट और नए तरह के फ्रॉड से बैंक उपभोक्ताओं के हित सुरक्षित रखे जा सकेंगे।
पूरे साल की प्रक्रिया बने अनुपालन
रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर स्वामीनाथन जे. ने कहा कि बैंकों को अनुपालन को तिमाही के अंत की औपचारिकता नहीं, बल्कि पूरे साल चलने वाली निरंतर प्रक्रिया मानना चाहिए।
वे शुक्रवार को ‘कॉलेज ऑफ सुपरवाइजर’ के तीसरे वार्षिक वैश्विक सम्मेलन में ‘डिजिटल युग में बैंकिंग निगरानी के मुद्दे और चुनौतियां’ विषय पर बोल रहे थे। यह भाषण सोमवार को आरबीआई की वेबसाइट पर जारी किया गया।
सिर्फ जांच काफी नहीं, पहले से तैयारी जरूरी
स्वामीनाथन ने कहा, “तेजी से बदलते माहौल में पीछे की ओर देखने वाली अनुपालन जांच जरूरी हैं, लेकिन वे पर्याप्त नहीं हैं। कमजोर संकेतों को जल्दी पहचानना, घटनाओं से पहले लचीलापन परखना और किसी बड़ी गड़बड़ी से पहले हस्तक्षेप करना जरूरी है।”
गड़बड़ी को जल्दी ठीक करना परिपक्वता का संकेत
उन्होंने कहा कि जब किसी गड़बड़ी का पता चल जाए, तो उसे जल्दी समझना और समय रहते सुधार करना ही नियंत्रण प्रणाली की परिपक्वता का पैमाना बन जाता है। आरबीआई ने कहा है कि तकनीकी प्रगति के साथ-साथ परिचालन जोखिम (Operational Risk) भी तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में मजबूत परिचालन अनुशासन और डेटा गवर्नेंस के जरिए न केवल जोखिमों का बेहतर प्रबंधन किया जा सकता है, बल्कि ग्राहकों की शिकायतों का भी तुरंत समाधान संभव है।
डेटा गवर्नेंस पर विशेष जोर
डिप्टी गवर्नर ने कहा कि मौजूदा दौर में मजबूत डेटा गवर्नेंस और डेटा प्रबंधन बेहद जरूरी है, ताकि समस्याओं को समय रहते पकड़ा जा सके और उन्हें गंभीर बनने से रोका जा सके। स्वामीनाथन ने साफ कहा कि थर्ड-पार्टी (तीसरे पक्ष) प्रबंधन को जोखिम प्रबंधन का हिस्सा माना जाना चाहिए। बैंक अपनी जिम्मेदारियों को आउटसोर्स नहीं कर सकते।
उन्होंने यह भी कहा कि बैंकों को ग्राहक शिकायतों की जड़ तक जाकर समय पर समाधान करना चाहिए।
कागजों पर मजबूत, लेकिन सिस्टम में कमजोरी संभव
डिप्टी गवर्नर ने कहा कि दशकों से पर्यवेक्षकों को खाताबही पढ़ने और प्रक्रियाओं का निरीक्षण करने का प्रशिक्षण दिया जाता रहा है और आज भी यह जारी है। हालांकि, कोई बैंक कागजों पर स्वस्थ दिख सकता है, लेकिन एक ही घटना से गंभीर व्यवधान पैदा हो सकता है।
अब ध्यान सिस्टम और कोड पर
उन्होंने कहा कि अब ध्यान शाखा और उत्पाद से हटकर प्रणाली और कोड की ओर जा रहा है। दूसरे शब्दों में, बैंकिंग स्थिरता अब सिर्फ पूंजी और तरलता पर नहीं, बल्कि परिचालन क्षमता, डेटा अखंडता और तृतीय-पक्ष निर्भरता पर भी निर्भर करती है।
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