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बैंकों को मिली बड़ी राहत

आरबीआई ने रुपये की सट्टेबाजी पर लगी पाबंदियों में दी आंशिक राहत

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने रुपये की सट्टेबाजी को रोकने के लिए लगाए गए प्रतिबंधों में आंशिक ढील देने का निर्णय लिया है।

आरबीआई ने रुपये की सट्टेबाजी पर लगी पाबंदियों में दी आंशिक राहत

RBI Eases Rupee Speculation Norms Amid Global Tension |

मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने रुपये की सट्टेबाजी को रोकने के लिए लगाए गए प्रतिबंधों में आंशिक ढील देने का निर्णय लिया है। हाल में मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच भारतीय रुपये में आई भारी गिरावट और अस्थिरता को थामने के लिए प्रतिबंध लगाये गये थे।

आरबीआई ने सट्टेबाजी रोकने के लिए लगाए थे अस्थायी प्रतिबंध

रिजर्व बैंक ने मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में तनाव और अमेरिकी-इजरायल-ईरान संघर्ष के कारण भारतीय रुपये में आई भारी गिरावट और अस्थिरता को थामने के लिए पिछले 1 अप्रैल को रुपये की सट्टेबाजी पर रोकने के लिए अस्थायी उपाय लागू किए गए थे। आरबीआई ने रुपये में आयी भारी गिरावट को देखते हुए बैंकों के ग्राहकों को नॉन-डिलिवरेबल फॉरवर्ड (NDF) सौदे ऑफर करने से रोक लगा दी थी। इसके साथ ही पहले से कैंसिल किए गए फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट्स को दोबारा बनाने पर भी रोक लगा दी गई थी। साथ ही ऑथराइज्ड डीलर्स को अपने संबंधित संस्थानों के साथ रुपये आधारित विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव लेनदेन करने से भी प्रतिबंधित कर दिया गया था। ये पाबंदियां इसलिए लगायी गयी थीं कि सट्टा आधारित आर्बिट्राज ट्रेडिंग पर रोक लगाई जा सके और रुपये पर दबाव कम किया जाए।

अब दो बड़े प्रतिबंध हटे, बाजार को मिली राहत

आरबीआई ने इनमें से दो प्रमुख प्रतिबंधों को पूरी तरह वापस ले लिया है, जबकि संबंधित पक्षों से जुड़े नियमों में कुछ बदलाव करते हुए आंशिक राहत दी है। नए संशोधन के तहत अब मौजूदा कॉन्ट्रैक्ट्स को रद्द करने और उन्हें आगे बढ़ाने (रोलओवर) की अनुमति मिल गई है। अब आरबीआई ने इन प्रतिबंधों को वापस लेते हुए बैंकों को फिर से डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स (NDCs) की सुविधा देने इजाजत दे दी है।

डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स पर फिर से मिली अनुमति

आरबीआई ने एक नोटिफिकेशन में कहा कि नए नियमों के तहत अब अधिकृत डीलर (बैंक) रेजिडेंट और नॉन-रेजिडेंट यूजर्स को रुपये से जुड़े नॉन-डिलीवरेबल डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स (NDCs) फिर से ऑफर कर सकेंगे। हालांकि, अपनी ही संबंधित कंपनियों के साथ लेनदेन पर अब भी कुछ पाबंदियां रहेंगी। नए आदेश के तहत अब बैंक अपनी 'रिलेटेड पार्टीज' के साथ पुराने कॉन्ट्रैक्ट्स को कैसल कर पाएंगे या उन्हें आगे बढ़ा सकेंगे।

रिलेटेड पार्टी ट्रांजैक्शन में आंशिक ढील, नियमों में संशोधन

आरबीआई द्वारा जारी नये नोटिफिकेशन में कहा गया है कि नए नियमों के तहत अब अधिकृत डीलर (बैंक) रेजिडेंट और नॉन-रेजिडेंट यूजर्स को रुपये से जुड़े नॉन-डिलीवरेबल डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स (NDCs) फिर से ऑफर कर सकेंगे। हालांकि, अपनी ही संबंधित कंपनियों के साथ लेनदेन पर अब भी कुछ पाबंदियां रहेंगी। नए आदेश के तहत अब बैंक अपनी 'रिलेटेड पार्टीज' के साथ पुराने कॉन्ट्रैक्ट्स को कैसल कर पाएंगे या उन्हें आगे बढ़ा सकेंगे। साथ ही, कुछ खास तरह के बैक-टू-बैक ट्रांजैक्शन की भी इजाजत दी गई है।

डॉलर दबाव के समय उठाए गए थे कड़े कदम

"इकोनॉमिक टाइम्स" की रिपोर्ट के अनुसार पिछले दिनों जब रुपये पर डॉलर के मुकाबले बहुत ज्यादा दबाव था, तब आरबीआई ने सट्टेबाजी पर लगाम लगाने के लिए ये सख्त कदम उठाए थे। इससे कुछ दिन पहले केंद्रीय बैंक ने नेट ओपन पोजीशन (NOP) की सीमा 100 मिलियन डॉलर तय कर दी थी। आरबीआई का मानना था कि कुछ बड़े खिलाड़ियों की वजह से बाजार में डॉलर की कृत्रिम कमी पैदा हो रही थी, जिसे रोकने के लिए ये कड़े नियम जरूरी थे।

सरकारी सिक्योरिटीज का बायबैक और नए बॉण्ड

भारत सरकार ने सोमवार को रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा आयोजित नीलामी के जरिए 12,686.974 करोड़ रुपये की सरकारी सिक्योरिटीज (G-secs) का बायबैक किया है। इसके साथ ही सरकार ने 13,311.383 करोड़ रुपये के नए बॉण्ड जारी किए हैं। सरकार ने जिन दो सिक्योरिटीज का बायबैक किया, वे इसी वित्त वर्ष के आखिर में मैच्योर होने वाले बॉण्ड्स का हिस्सा थे। इनमें 5.74% वाले GS 2026 के 2,316 करोड़ रुपये और 8.24% वाले GS 2027 के 1,000 करोड़ रुपये के बॉण्ड शामिल हैं। इसके अलावा, सरकार ने FY28, FY29 और FY30 में मैच्योर होने वाली सिक्योरिटीज का भी बायबैक किया है।

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