मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने नानबैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के लिए ऋण वसूली के नियम काफी सख्त कर दिये है।
मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने नानबैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के लिए ऋण वसूली के नियम काफी सख्त कर दिये है। ग्राहकों का शोषण रोकने के लिहाज से एनबीएफसी के ऊपर अपने कर्मचारियों को प्रशिक्षण और रजिस्ट्रेशन की बाध्यता लागू कर दी है। लेकिन इन नियमों को लेकर NBFC का कहना है कि RBI की सख्ती से उनकी लागत काफी बढ़ जाएगी और कर्ज वसूली में नयी समस्याएं खड़ी होगी। RBI ने 12 फरवरी 2026 को जारी नए नियमों के तहत एनबीएफसी (NBFCs) और बैंकों के लिए ऋण वसूली (Loan Recovery) एजेंटों के संबंध में जारी नये नियम 1 जुलाई 2026 से प्रभावी होंगे। नए नियमों के अनुसार, रिकवरी एजेंटों के लिए IIBF (इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग एंड फाइनेंस) से ट्रेनिंग और सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य है, और वे सुबह 8 बजे से शाम 7 बजे के बीच ही कॉल कर सकते हैं। देश के सभी वित्तीय संस्थान (बैंक, ग्रामीण बैंक, एनबीएफसी, हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां, सहकारी बैंक आदि) इस नियम की परिधि में आयेंगे।
NBFCs के लिए सर्टिफाइड एजेंट नियम
रिजर्व बैंक द्वारा एनबीएफसी के लिए नए नियमों के अनुसार अब केवल सर्टिफाइड रिकवरी एजेंटों को ही काम पर रखा जा सकता है। यह सुनिश्चित करना एनबीएफसी की जिम्मेदारी होगी कि उनके एजेंट सही प्रशिक्षित हैं। एजेंटों द्वारा गाली-गलौज, धमकी देने, अजीब समय पर कॉल करने या सोशल मीडिया पर परेशान करने पर रोक लगा दी गयी है। ऋण वसूली के लिए एजेंट सुबह 8 बजे से शाम 7 बजे के बीच ही कॉल कर सकेंगे और ग्राहकों की गोपनीयता बनाए रखने के लिए बाध्य होंगे। साथ ही यदि ग्राहक शिकायत करता है, तो शिकायत का निपटारा होने तक रिकवरी की प्रक्रिया रोकनी होगी।
इन नियमों का उद्देश्य ग्राहकों को मानसिक उत्पीड़न से बचाना और ऋण वसूली को अधिक पारदर्शी बनाना है, जिससे रिकवरी प्रक्रियाओं में मानवीय दृष्टिकोण अपनाया जा सके। इसका मुख्य उद्देश्य है कि लोन चुकाने में असमर्थ या देरी करने वाले ग्राहकों को अनुचित दबाव से बचाना। अक्सर ऐसा देखा जाता है कि रिकवरी एजेंट कर्ज पर ली गयी गाड़ियां सड़कों पर ही लोगों से छीनकर पैदल कर देते है। अब इन हरकतों पर लगाम लगेगी। इससे विशेष रूप से वैसे लोगों को राहत मिलेगी जो रिकवरी के दौरान उत्पीड़न का शिकार होते हैं। एनबीएफसी कंपनियों को ऋण वसूली में लगे कर्मचारियों और एजेंटों के लिए एक विस्तृत आचार संहिता बनानी होगी। उन्हें काम शुरू करने से पहले इन नियमों का पालन करने का लिखित बयान भी लेना होगा।
एनबीएफसी पर बढ़े अनुपालन खर्च
द्वारा ऋण वसूली के लिए सख्त नियमों के प्रस्ताव से गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) की अनुपालन लागत बढ़ने की आशंका है। खासकर बड़ी कंपनियों को छोड़कर वैसी कंपनियां जो ऋण की वसूली के लिए बाहरी एजेंसियों (थर्ड-पार्टी) पर निर्भर रहती हैं। इन एजेंसियों को आरबीआई के नए नियमों के अनुसार ऋण वसूली करने वाले एजेंटों को प्रशिक्षण देने और उनकी निगरानी करने से अतिरिक्त खर्च बढ़ेगा।
देश की एक बड़ी एनबीएफसी के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'जो कंपनियां ऋण वसूली का काम बाहरी एजेंसियों से कराती हैं उनकी लागत बढ़ सकती है। हर ऋण वसूली से जुड़ी बाहरी एजेंसी को प्रशिक्षण और प्रमाणन लेना होगा और बैंक या एनबीएफसी के नियमों का पालन करना होगा। इससे एनबीएफसी का खर्च बढ़ेगा। जिन एनबीएफसी के पास अपनी खुद की ऋण वसूली से जुड़ी टीम नहीं है, उन पर नियमों का बोझ ज्यादा पड़ेगा। हालांकि, ग्राहकों के लिए ये नए नियम फायदेमंद होंगे।' बड़ी एनबीएफसी कंपनियां, जैसे श्रीराम फाइनैंस और सुंदरम फाइनैंस ऋण वसूली का काम खुद ही करती हैं और बाहरी एजेंसियों पर निर्भर नहीं रहतीं।
आरबीआई ने अपने मसौदा परिपत्र में प्रस्ताव दिया है कि बैंक और उनकी रिकवरी एजेंसियां कर्ज लेने वालों के साथ सख्ती या जबरदस्ती वाला व्यवहार नहीं कर सकेंगी। मसौदा नियमों के अनुसार, गाली-गलौज या धमकी भरी भाषा का इस्तेमाल, बार-बार या गुमनाम कॉल करना, अनुचित संदेश भेजना, कर्जदार या उसके परिचितों को परेशान करना, सार्वजनिक रूप से बेइज्जती करना, हिंसा की धमकी देना, या कर्ज और भुगतान न करने के परिणामों के बारे में गलत जानकारी देना पूरी तरह प्रतिबंधित होगा।
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